India–US interim trade framework: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार ढांचे का स्वागत करते हुए इसे दोनों देशों के लिए सकारात्मक कदम बताया। इस समझौते के तहत अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ढांचा भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते भरोसे, साझेदारी और आर्थिक सहयोग का स्पष्ट संकेत है।
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साझेदारी में दिखी नई मजबूती (IndiaUS interim trade framework)
India–US interim trade framework के लेकर प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए बताया कि भारत और अमेरिका ने अंतरिम व्यापार समझौते के एक फ्रेमवर्क पर सहमति जताई है। उन्होंने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी आभार जताया और कहा कि द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में उनकी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता अहम रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह समझौता दोनों देशों के रिश्तों में भरोसे और स्थायित्व को और गहरा करेगा।
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‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगा सीधा फायदा
इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने कहा कि यह व्यापार ढांचा ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती देगा। भारतीय किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, मछुआरों और नवाचार से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। खास बात यह है कि निर्यात बढ़ने से बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है, जिससे महिलाओं और युवाओं को विशेष लाभ मिल सकता है।
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निवेश और तकनीकी सहयोग को मिलेगा बढ़ावा (India–US interim trade framework)
साथ ही, प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका नवाचार को बढ़ावा देने के लिए साझा रूप से काम कर रहे हैं। यह समझौता निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को गहरा करेगा। इसके परिणामस्वरूप भरोसेमंद और लचीली आपूर्ति शृंखलाएं विकसित होंगी, जो वैश्विक आर्थिक स्थिरता में योगदान देंगी।
‘विकसित भारत’ लक्ष्य से जुड़ा समझौता (India–US interim trade framework)
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अंतरिम व्यापार ढांचा भारत के दीर्घकालिक विकास लक्ष्य ‘विकसित भारत’ की दिशा में एक अहम कदम है। वैश्विक बाजारों में भारत की भागीदारी बढ़ने से देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख और बढ़ेगी।
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वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल का बयान (India–US interim trade framework)
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह अंतरिम व्यापार ढांचा भारत और अमेरिका को आर्थिक सहयोग पर केंद्रित रखेगा। उनके मुताबिक, यह समझौता दोनों देशों के बीच सतत विकास और साझा समृद्धि के लक्ष्य को दर्शाता है।
$30 ट्रिलियन अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच
पीयूष गोयल ने कहा कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को लगभग 30 ट्रिलियन डॉलर के अमेरिकी बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। विशेष रूप से एमएसएमई, किसान और मछुआरे इससे लाभान्वित होंगे। सरकार का अनुमान है कि इससे लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
प्रमुख सेक्टरों में खुलेंगे नए अवसर (India US interim)
इसके अलावा, अमेरिकी टैरिफ घटने से कई प्रमुख सेक्टरों को फायदा होगा। इनमें वस्त्र और परिधान, चमड़ा और फुटवियर, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी सेक्टर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
कुछ उत्पादों पर शून्य टैरिफ का प्रावधान
वहीं दूसरी ओर, समझौते के तहत कई उत्पादों पर टैरिफ पूरी तरह खत्म करने का भी प्रावधान है। इनमें जेनेरिक दवाएं, रत्न और आभूषण, हीरे और विमान के पुर्जे शामिल हैं। इससे भारत की निर्यात क्षमता बढ़ेगी और ‘मेक इन इंडिया’ को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा।
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सेक्शन 232 से छूट और ऑटो पार्ट्स कोटा
मंत्री ने बताया कि भारत को अमेरिकी कानून के तहत सेक्शन 232 में विमान के पुर्जों पर छूट मिलेगी। इसके साथ ही ऑटो पार्ट्स के लिए टैरिफ रेट कोटा तय किया गया है। जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स को लेकर भी सकारात्मक और व्यावहारिक समाधान निकाला गया है।
कृषि और ग्रामीण हित पूरी तरह सुरक्षित
खास बात यह है कि सरकार ने कृषि और ग्रामीण आजीविका से जुड़े हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। मक्का, गेहूं, चावल, सोया, पोल्ट्री, दूध, पनीर, एथेनॉल, तंबाकू, सब्जियां और मांस जैसे संवेदनशील उत्पादों को इस ढांचे से बाहर रखा गया है, ताकि किसानों पर कोई नकारात्मक असर न पड़े।
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संतुलित और व्यावहारिक व्यापार ढांचा India US interim trade framework
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतरिम व्यापार ढांचा संतुलित और व्यावहारिक है। एक ओर यह निर्यात, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देता है, वहीं दूसरी ओर घरेलू उद्योग और कृषि क्षेत्र की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।
वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका
साथ ही, इस समझौते से वैश्विक आपूर्ति शृंखला में भारत की भूमिका और मजबूत होगी। अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक साझेदार के रूप में उभरेगा, जिससे भविष्य में निवेश और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी।
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रणनीतिक साझेदारी की नई दिशा
अंततः, भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार ढांचा केवल एक आर्थिक समझौता नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी की नई दिशा को दर्शाता है। यह समझौता भारत की विकास यात्रा को गति देगा और वैश्विक मंच पर देश की आर्थिक स्थिति को और मजबूत करेगा।
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