Uttarakhand Census: उत्तराखंड में जनगणना (Uttarakhand Census) को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। 2011 के बाद पहली बार होने जा रही इस जनगणना (Uttarakhand Census) में इस बार डिजिटल तकनीक का व्यापक इस्तेमाल किया जाएगा। पहले चरण में मकानों की गणना की जाएगी, जिसके लिए केंद्र सरकार की ओर से एक वेब पोर्टल और मोबाइल एप्लीकेशन लॉन्च किया जाएगा। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से आम नागरिक स्वयं अपने मकान से जुड़ी जानकारी दर्ज करा सकेंगे और राष्ट्रीय महत्व के इस कार्य में सीधे भागीदार बन पाएंगे।
अप्रैल से सितंबर के बीच होगा मकानों का सर्वे
उत्तराखंड में जनगणना (Uttarakhand Census) के नोडल अधिकारी और सचिव आईएएस दीपक कुमार ने बताया कि राज्य में पिछले छह महीनों से जनगणना (Uttarakhand Census) की तैयारियां चल रही हैं। अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच किसी एक उपयुक्त माह में मकानों की गणना शुरू की जाएगी। मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह समय तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार की जनगणना (Uttarakhand Census) पारंपरिक तरीके से हटकर आधुनिक डिजिटल प्रणाली पर आधारित होगी, जिससे आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता बढ़ेगी।
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लोग खुद दर्ज करा सकेंगे अपनी जानकारी
नोडल अधिकारी के अनुसार जनगणना (Uttarakhand Census) से पहले आम जनता के लिए एक विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा। इस पर लोग स्वयं अपने घर, परिवार और आवास से जुड़ी जानकारियां अपलोड कर सकेंगे। एप्लीकेशन में कुछ जरूरी सवालों के जवाब देने होंगे, जिसके बाद एक यूनिक आईडी जनरेट होगी। बाद में जब जनगणना (Uttarakhand Census) के लिए नियुक्त प्रकाशक घर-घर पहुंचेंगे, तो वे इन जानकारियों का सत्यापन करेंगे। इससे प्रक्रिया तेज, सरल और भरोसेमंद बनेगी।
देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल जनगणना
दीपक कुमार ने बताया कि भारत में पहली जनगणना (Uttarakhand Census) 1872 में ब्रिटिश शासनकाल में हुई थी और तब से अब तक यह प्रक्रिया मैन्युअल तरीके से होती रही है। लेकिन यह पहला अवसर है जब जनगणना (Uttarakhand Census) का पूरा काम डिजिटल माध्यम से किया जाएगा। सर्वे करने वाले कर्मचारी टैबलेट और मोबाइल आधारित वेब एप्लीकेशन के जरिए डाटा एकत्र करेंगे। यह डाटा सीधे केंद्रीय सर्वर पर अपलोड होगा, जिससे कागजी रिकॉर्ड की जरूरत नहीं पड़ेगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी।

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2027 में होगी लोगों की गणना
मकानों की गणना के बाद दूसरे चरण में 2027 के फरवरी माह में 20 दिनों के भीतर लोगों की जनगणना (Uttarakhand Census) की जाएगी। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना जारी हो चुकी है। नोडल अधिकारी ने बताया कि इस बड़े अभियान के लिए पर्याप्त स्टाफ की तैनाती की जाएगी और युद्धस्तर पर कार्य होगा। राज्य के हर हिस्से-चाहे वह हिमालय के दुर्गम गांव हों या शहरों की मलिन बस्तियां-हर जगह जनगणना टीम पहुंचेगी। किसी भी क्षेत्र को इससे बाहर नहीं रखा जाएगा।
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मलिन बस्तियों समेत हर नागरिक होगा शामिल
जनगणना (Uttarakhand Census) में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होगा। दीपक कुमार ने स्पष्ट किया कि मलिन बस्तियों को लेकर कई भ्रांतियां रहती हैं, लेकिन जनगणना में उन्हें भी अलग-अलग श्रेणियों में शामिल किया जाएगा। रिकॉग्नाइज, नोटिफाइड और आइडेंटिफाइड जैसी कैटेगरी में इन बस्तियों का डाटा दर्ज होगा। उन्होंने आम जनता से अपील की कि वे इस राष्ट्रीय कार्य में बढ़-चढ़कर सहयोग करें। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जानकारी देकर देश के विकास की दिशा तय करने में सहभागी बनें।
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