Islamabad attack: इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद को निशाना बनाकर किए गए हमले ने पूरे पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था और आंतरिक कट्टरपंथ को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच एजेंसियों ने पुष्टि की है कि इस हमले को अंजाम देने वाला आरोपी यासिर एक पाकिस्तानी नागरिक था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि हमले के पीछे धार्मिक कट्टरता, नफरत फैलाने की मंशा और सांप्रदायिक तनाव को भड़काने का उद्देश्य था। इस Islamabad attack ने न केवल राजधानी की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं, बल्कि अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।
नमाज के दौरान हुआ Islamabad attack, इलाके में मची अफरा-तफरी
यह Islamabad attack उस समय हुआ जब मस्जिद में बड़ी संख्या में नमाजी मौजूद थे। धमाके की आवाज सुनते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, Islamabad attack के बाद धुएं का गुबार छा गया और कुछ ही मिनटों में सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस Islamabad attack ने स्थानीय लोगों को गहरे सदमे में डाल दिया।
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जांच में खुलासा, अकेले नहीं था यासिर
सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि यासिर ने यह हमला अकेले नहीं किया। उसके संपर्कों और डिजिटल गतिविधियों की जांच में ऐसे सबूत मिले हैं, जो किसी कट्टरपंथी नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यासिर कुछ समय से उग्र विचारधाराओं से प्रभावित था और सोशल मीडिया के जरिए उसे लगातार भड़काऊ सामग्री मिल रही थी। यह भी जांच की जा रही है कि क्या उसे किसी संगठन से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष मदद मिली थी।

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Islamabad attack के पीछे मकसद, सांप्रदायिक तनाव फैलाने की साजिश
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस हमले का मुख्य उद्देश्य शिया समुदाय में डर पैदा करना और देश में सांप्रदायिक तनाव को हवा देना था। पाकिस्तान में पहले भी शिया समुदाय को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हमले समाज को बांटने और अस्थिरता फैलाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा होते हैं। राजधानी जैसे संवेदनशील शहर में इस तरह की वारदात होना सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
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सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
Islamabad attack के बाद पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए गए हैं और दोषियों को सख्त सजा दिलाने का आश्वासन दिया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि किसी भी समुदाय के खिलाफ हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और देश में शांति बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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शिया समुदाय में रोष और डर का माहौल
Islamabad attack के बाद शिया समुदाय में गुस्सा और भय दोनों देखने को मिल रहा है। समुदाय के नेताओं ने सरकार से सुरक्षा बढ़ाने और हमलावरों के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने की मांग की है। उनका कहना है कि बार-बार होने वाले ऐसे हमले अल्पसंख्यकों को असुरक्षित महसूस कराते हैं। कई धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने भी इस Islamabad attack की निंदा करते हुए एकजुटता का संदेश दिया है और शांति बनाए रखने की अपील की है।
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कट्टरपंथ के खिलाफ सख्त कदम की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि इस Islamabad attack ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि पाकिस्तान को कट्टरपंथ और नफरत फैलाने वाली विचारधाराओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने की जरूरत है। केवल सुरक्षा बढ़ाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि समाज में सहिष्णुता, संवाद और शिक्षा के जरिए चरमपंथ की जड़ों पर प्रहार करना होगा। इस्लामाबाद की शिया मस्जिद पर हुआ यह Islamabad attack एक चेतावनी है कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं सामाजिक ताने-बाने को और कमजोर कर सकती हैं।
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