Uttarakhand Budget: उत्तराखंड में इन दिनों अगले वित्तीय वर्ष के Uttarakhand Budget को लेकर सबसे बड़ी कवायद चल रही है। करीब सवा करोड़ प्रदेशवासियों के लिए लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का Uttarakhand Budget तैयार किया जा रहा है, जिसे धामी सरकार का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी बजट माना जा रहा है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह सरकार का आखिरी पूर्ण Uttarakhand Budget सत्र होगा, इसलिए इस पर राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक तीनों ही नजरिए से खास निगाहें टिकी हैं। सरकार चाहती है कि यह बजट केवल खर्च-कमाई का लेखा–जोखा न होकर प्रदेश के विकास का रोडमैप बने।
केंद्रीय बजट के बाद बढ़ी राज्य से उम्मीदें
हाल ही में पेश हुए केंद्रीय बजट में उत्तराखंड को पर्यटन, आयुष, हर्बल और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कई संकेत मिले हैं, लेकिन राज्य सरकार के कुछ प्रस्ताव शामिल नहीं हो पाए। ऐसे में अब धामी सरकार के सामने चुनौती है कि वह Uttarakhand Budget के माध्यम से उन अधूरे बिंदुओं को पूरा करे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का Uttarakhand Budget युवाओं, महिलाओं, किसानों और पर्वतीय जिलों पर अधिक केंद्रित हो सकता है, ताकि चुनाव से पहले बड़ा सकारात्मक संदेश दिया जा सके।
READ MORE: खटीमा में सीएम धामी ने क्रिकेट मैदान में दिखाया जोश, युवाओं को दिया नशा मुक्त समाज का संदेश
राज्य की कमाई का पूरा गणित
उत्तराखंड की आय मुख्य रूप से टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू पर टिकी है। टैक्स के रूप में जीएसटी से लगभग 10 हजार करोड़, वैट से करीब 2600 करोड़, स्टांप शुल्क से 2600 से 3000 करोड़, एक्साइज ड्यूटी से लगभग 5000 करोड़ और परिवहन कर से करीब 1500 से 2000 करोड़ रुपये मिलते हैं। यही धन सरकार की योजनाओं का आधार बनता है। इसके अलावा केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के रूप में राज्य को लगभग 15 से 17 हजार करोड़ रुपये प्राप्त होते हैं, जो Uttarakhand Budget की रीढ़ माने जाते हैं।

नॉन टैक्स से भी भरता है खजाना
राज्य को खनन से करीब 1000 करोड़, वन विभाग से लगभग 600 करोड़ और ऊर्जा क्षेत्र से 1000 करोड़ रुपये की आय होती है। स्कूल फीस, अस्पताल शुल्क और अन्य सरकारी सेवाओं से करीब 600 करोड़ रुपये मिलते हैं। विभागीय धन को एफडी में रखने से लगभग 100 करोड़ का ब्याज और बिजली-पानी कर से करीब 250 करोड़ रुपये का राजस्व भी प्राप्त होता है। इन सभी स्रोतों को जोड़ें तो राज्य को कुल 45 से 48 हजार करोड़ रुपये की आमदनी होती है।
READ MORE: यमकेश्वर से निकला बड़ा संदेश, शिक्षा और संस्कार साथ चलेंगे तभी सशक्त बनेगा भारत
खर्च का भारी दबाव
आमदनी के साथ खर्च का बोझ भी कम नहीं है। राज्य कर्मचारियों के वेतन पर लगभग 17 हजार करोड़ और पेंशन पर करीब 8 हजार करोड़ रुपये खर्च हो जाते हैं। कर्ज के ब्याज में 6000 करोड़ और मूलधन चुकाने में 5000 करोड़ रुपये चले जाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल और ग्रामीण विकास पर भी हजारों करोड़ रुपये व्यय होते हैं। लोक निर्माण विभाग पर 3500 करोड़, स्वास्थ्य पर 7000 करोड़ और शिक्षा-युवा कल्याण पर करीब 10 हजार करोड़ रुपये सालाना खर्च होते हैं।
READ MORE: सोशल मीडिया की ताकत बढ़ी, लेकिन फेक वीडियो बने पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
जनअपेक्षाओं वाला बजट बनाने की कोशिश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कई मंचों से कह चुके हैं कि Uttarakhand Budget आम जनता की जरूरतों के मुताबिक होगा। पलायन रोकना, स्थानीय रोजगार बढ़ाना, पर्यटन को गांवों से जोड़ना और महिला सशक्तिकरण इस Uttarakhand Budget की प्राथमिकता रहेंगे। सरकार होम स्टे, स्वरोजगार, लघु उद्योग, कृषि आधारित स्टार्टअप और पर्वतीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए विशेष प्रावधान कर सकती है।
READ MORE: देहरादून में बिजली महंगी, फरवरी से बढ़ीं दरें, उपभोक्ताओं पर फिर बढ़ा आर्थिक बोझ
गैरसैंण से सियासी और भावनात्मक संदेश
संभावना है कि Uttarakhand Budget सत्र ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित होगा। इससे पहाड़ी क्षेत्रों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का संदेश जाएगा। वित्त सचिव दिलीप जावलकर के अनुसार सभी विभागों से प्रस्ताव लेकर रूपरेखा तैयार की जा रही है और तय समय पर Uttarakhand Budget को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। जानकारों का मानना है कि यदि सरकार ने आय के नए स्रोत विकसित किए और गैर जरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखा, तो यह Uttarakhand Budget उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है।
Follow Us: YouTube| TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram
