AI Adoption in India: भारत में AI Adoption in India अब केवल एक तकनीकी ट्रेंड नहीं, बल्कि उद्योगों की कार्यप्रणाली का अहम हिस्सा बन चुकी है। कृत्रिम मेधा (Artificial Intelligence) के बढ़ते उपयोग ने कंपनियों की भर्ती रणनीति, कार्य संरचना और कौशल की प्राथमिकताओं को बदल दिया है। हालिया अध्ययन संकेत देते हैं कि इस बदलाव का सबसे अधिक प्रभाव प्रवेश स्तर (एंट्री-लेवल) की नौकरियों पर दिखाई दे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है किAI Adoption in India भारतीय आईटी उद्योग को नई दिशा दे रहा है, जहां पारंपरिक भूमिकाएं धीरे-धीरे तकनीक-आधारित कौशल में परिवर्तित हो रही हैं।
रिपोर्ट में सामने आए महत्वपूर्ण निष्कर्ष
Indian Council for Research on International Economic Relations (ICRIER) द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह पाया गया कि देश के प्रमुख आईटी केंद्रों में कंपनियां तेजी से एआई को अपने दैनिक संचालन में शामिल कर रही हैं। यह सर्वेक्षण नवंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच 10 शहरों की 650 आईटी कंपनियों पर आधारित था।
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रिपोर्ट के अनुसार, AI Adoption in India के चलते 60 प्रतिशत से अधिक कंपनियों ने डोमेन विशेषज्ञता के साथ एआई और डेटा से जुड़े कौशल वाले पेशेवरों की मांग में वृद्धि दर्ज की है। कंपनियों का कहना है कि ऑटोमेशन और मशीन लर्निंग आधारित प्रणालियां अब निर्णय-प्रक्रिया का हिस्सा बन चुकी हैं, जिससे पारंपरिक कार्यों की प्रकृति बदल रही है।
एंट्री-लेवल नौकरियों पर असर क्यों?
अध्ययन में यह भी स्पष्ट हुआ कि AI Adoption in India का प्रभाव सबसे पहले एंट्री-लेवल पदों पर पड़ा है। पहले जिन कार्यों के लिए बड़ी संख्या में फ्रेशर्स की भर्ती की जाती थी, अब उनमें से कई कार्य स्वचालित सॉफ्टवेयर और एआई टूल्स द्वारा किए जा रहे हैं।
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इसका परिणाम यह हुआ कि शुरुआती स्तर की भर्तियों में हल्की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी बताती है कि मध्यम और वरिष्ठ स्तर की भूमिकाओं में स्थिरता बनी हुई है, क्योंकि रणनीतिक निर्णय और जटिल विश्लेषण अभी भी मानव विशेषज्ञता पर निर्भर हैं।
तकनीकी भूमिकाओं की मांग में तेजी
आईटी उद्योग में एक महत्वपूर्ण बदलाव यह देखने को मिला है कि सॉफ्टवेयर डेवलपर, डेटा एनालिस्ट, मशीन लर्निंग इंजीनियर और डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर जैसी भूमिकाओं की मांग बढ़ी है। AI Adoption in India ने उन पेशेवरों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं जो डेटा प्रबंधन, एल्गोरिदम डिजाइन और ऑटोमेशन तकनीकों में दक्ष हैं। कंपनियां अब ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं जो पारंपरिक तकनीकी ज्ञान के साथ एआई और डेटा साइंस की समझ भी रखते हों। इस बदलाव ने आईटी सेक्टर में प्रतिस्पर्धा को और अधिक कौशल-आधारित बना दिया है। अब केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रासंगिक तकनीकी दक्षता भी अनिवार्य हो गई है।
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उत्पादकता में वृद्धि और प्रशिक्षण पर जोर
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि एआई से प्रभावित हजारों कारोबारी प्रक्रियाओं में उत्पादकता में सुधार देखा गया है। यानी AI Adoption in India का समग्र प्रभाव नकारात्मक नहीं, बल्कि मिश्रित और कई मामलों में सकारात्मक है। कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को एआई टूल्स के उपयोग के लिए प्रशिक्षित कर रही हैं। सर्वे में शामिल लगभग आधी कंपनियों ने बताया कि उन्होंने जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए हैं। वहीं एक बड़ा हिस्सा निकट भविष्य में औपचारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण का दायरा अभी सीमित है और इसे व्यापक बनाने की आवश्यकता है ताकि अधिक कर्मचारी बदलती तकनीकी मांगों के अनुरूप खुद को तैयार कर सकें।
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अपस्किलिंग और रीस्किलिंग की बढ़ती जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि AI Adoption in India के इस दौर में कौशल उन्नयन (Upskilling) और पुनः कौशल विकास (Reskilling) भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। यदि कर्मचारी समय रहते एआई, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में दक्षता हासिल करते हैं, तो वे रोजगार के नए अवसरों का लाभ उठा सकते हैं।
रिपोर्ट यह संकेत देती है कि AI Adoption in India पारंपरिक नौकरियों को पूरी तरह समाप्त नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें नए रूप में ढाल रहा है। भविष्य में मानव बुद्धिमत्ता और कृत्रिम मेधा का संयोजन ही कार्यस्थल की सफलता का आधार बनेगा।
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भविष्य की दिशा
AI Adoption in India भारतीय आईटी उद्योग में एक संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत दे रही है। एंट्री-लेवल भूमिकाओं में कमी के बावजूद, उन्नत तकनीकी कौशल वाले पेशेवरों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में वही संगठन और कर्मचारी सफल होंगे, जो तकनीकी नवाचार को अपनाते हुए निरंतर सीखने की संस्कृति को बढ़ावा देंगे। AI और मानव कौशल का संतुलित संयोजन ही भारत के डिजिटल भविष्य को मजबूती प्रदान करेगा।
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