Himachal Vidhansabha Session: हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा दिन राजनीतिक रूप से बेहद अहम रहा। सदन में प्रश्नकाल के साथ कार्यवाही शुरू हुई और इसके बाद नियम-102 के तहत राजस्व घाटा अनुदान (RDG) बहाली के मुद्दे पर चर्चा ने जोर पकड़ लिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। चर्चा पूरी होने के बाद प्रस्ताव को मतदान के लिए रखने की तैयारी भी की गई, जिससे यह साफ हो गया कि RDG का मुद्दा राज्य की राजनीति के केंद्र में है।
RDG पर सरकार का आक्रामक रुख
चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में राज्य को बड़ी वित्तीय सहायता मिली थी, जिसमें हजारों करोड़ रुपये RDG और GST मुआवजे के रूप में प्राप्त हुए। इसके बावजूद कर्मचारियों के लंबित एरियर का भुगतान नहीं किया गया।
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उन्होंने आरोप लगाया कि RDG को बंद करने से राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना था कि हिमाचल की वित्तीय संरचना में RDG की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है और इसे समाप्त करना राज्य के लिए गंभीर चुनौती पैदा करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा सरकार खर्चों में कटौती कर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की दिशा में कदम उठा रही है
नेता प्रतिपक्ष ने उठाया विधायक निधि का मुद्दा
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सदन में विधायक क्षेत्र विकास निधि जारी न होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विधायकों द्वारा अपने क्षेत्रों में की गई घोषणाएं निधि जारी न होने के कारण अटकी हुई हैं, जिससे जनता के बीच असमंजस की स्थिति बन रही है।
इस पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि विधायकों के साथ बैठक कर पूरी वित्तीय स्थिति स्पष्ट की जाएगी और सामूहिक चर्चा के बाद निर्णय लिया जाएगा।
बागवानों की सब्सिडी पर इंतजार
Himachal Vidhansabha Session में बागवानी से जुड़े मुद्दे भी गूंजे। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्पष्ट किया कि जिन बागवानों की सब्सिडी लंबित है, उन्हें फिलहाल इंतजार करना होगा। उन्होंने कहा कि सब्सिडी का भुगतान वर्तमान बजट प्रावधानों पर निर्भर करेगा।
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यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रदेश के कई क्षेत्रों में बागवान सब्सिडी को लेकर चिंतित हैं। सरकार ने संकेत दिया कि बजट संतुलन बनाए रखते हुए ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
दिव्यांगजनों के आरक्षित पदों का सवाल
Himachal Vidhansabha Session दूसरे दिन की कार्यवाही में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित पदों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विपक्ष के एक विधायक ने पूछा कि विभिन्न विभागों में दिव्यांगजनों के लिए आरक्षित कितने पद अभी खाली हैं। साथ ही सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे दिव्यांगजनों का मुद्दा भी उठाया गया।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री धनी राम शांडिल ने जवाब देते हुए कहा कि विभागों में रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इस वर्ग के हितों की अनदेखी नहीं करेगी।
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सत्र की कार्यवाही और प्रश्नों की संख्या
Himachal Vidhansabha Session में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने बताया कि सदन में बड़ी संख्या में प्रश्न प्राप्त हुए हैं, जिन्हें सूचीबद्ध किया जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि बजट सत्र के दौरान विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने वाली है।
RDG बहाली पर मतदान की तैयारी
सदन में RDG बहाली को लेकर लाए गए सरकारी संकल्प पर लंबी बहस के बाद इसे मतदान के लिए रखने की तैयारी की गई। यदि प्रस्ताव पारित होता है, तो केंद्र सरकार से RDG बहाल करने की सिफारिश की जाएगी। सत्ता पक्ष का तर्क है कि RDG राज्य की वित्तीय स्थिरता के लिए आवश्यक है, जबकि विपक्ष सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठा रहा है।
राजनीतिक और आर्थिक संदेश
Himachal Vidhansabha Session दूसरे दिन की कार्यवाही ने यह स्पष्ट कर दिया कि Himachal Vidhansabha Session सिर्फ वित्तीय दस्तावेज पेश करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राजनीतिक दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं की परीक्षा भी है। RDG, विधायक निधि, बागवानों की सब्सिडी और दिव्यांगजनों के पद जैसे मुद्दों ने सरकार और विपक्ष दोनों को अपने-अपने पक्ष मजबूत तरीके से रखने का अवसर दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सदन में पारित प्रस्ताव और चर्चाएं राज्य की आर्थिक दिशा को किस तरह प्रभावित करती हैं। फिलहाल, Himachal Vidhansabha Session में जारी बहस ने प्रदेश की वित्तीय चुनौतियों और राजनीतिक रणनीतियों को खुलकर सामने ला दिया है।
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