Shankaracharya Case: उत्तर प्रदेश की धार्मिक और राजनीतिक हलचलों के बीच ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। माघ मेले के दौरान प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर शुरू हुआ मतभेद अब गंभीर आरोपों और कानूनी कार्रवाई तक पहुंच गया है। हाल में सामने आए कथित Shankaracharya Case यौन शोषण के आरोपों के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि शंकराचार्य की ओर से हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की गई है।
यह पूरा Shankaracharya Case धार्मिक परंपराओं, प्रशासनिक नियंत्रण और राजनीतिक बयानबाजी के जटिल मिश्रण के रूप में देखा जा रहा है। संत समाज के भीतर भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
READ MORE: वर्ल्ड क्लास स्किल मॉडल से प्रभावित, 1 लाख करोड़ निवेश प्रस्ताव का दावा
माघ मेले से शुरू हुआ मतभेद
Shankaracharya Case की शुरुआत माघ मेले के दौरान स्नान व्यवस्था और प्रशासनिक हस्तक्षेप को लेकर हुई। शंकराचार्य पक्ष का आरोप था कि पारंपरिक अधिकारों और धार्मिक मर्यादाओं की अनदेखी की जा रही है। वहीं प्रशासन का तर्क था कि सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के मद्देनजर कुछ कदम आवश्यक थे।
यह मतभेद जल्द ही सार्वजनिक मंचों तक पहुंच गया। बयानबाजी का दौर शुरू हुआ और मामला धार्मिक असहमति से आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया। शंकराचार्य की ओर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath को लेकर दिए गए कुछ तीखे बयानों ने विवाद को और बढ़ा दिया।
समर्थकों का आरोप है कि इसके बाद से शंकराचार्य की गतिविधियों और कार्यक्रमों पर विशेष नजर रखी जाने लगी। हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों पर सीधे तौर पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
READ MORE: सिंगापुर में भारतीय समुदाय से आत्मीय संवाद, उत्तर प्रदेश आने का दिया आमंत्रण
आपराधिक आरोपों से बढ़ी संवेदनशीलता
हाल में Shankaracharya Case यौन शोषण के आरोपों ने पूरे विवाद को और गंभीर बना दिया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। दूसरी ओर, शंकराचार्य के समर्थक इन आरोपों को साजिश करार दे रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए तथ्यों और जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना उचित होगा। फिलहाल यह Shankaracharya Case धार्मिक प्रतिष्ठा और कानून व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है।
ज्योतिष्पीठ और उत्तराखंड से जुड़ाव
ज्योतिष्पीठ का मुख्यालय जोशीमठ में है और हरिद्वार में भी इसका प्रमुख आश्रम है। शंकराचार्य लंबे समय से इन दोनों स्थानों पर प्रवास करते रहे हैं। उत्तराखंड के संत समाज में उनका प्रभाव माना जाता है। ऐसे में उन पर लगे आरोपों ने संत समुदाय के एक बड़े वर्ग को चिंतित कर दिया है।
कुछ संतों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर भाषा की मर्यादा का पालन सभी को करना चाहिए। वहीं कई संत इसे शंकराचार्य की छवि धूमिल करने का प्रयास बता रहे हैं।
READ MORE: अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर यौन शोषण मामले में FIR के आदेश, प्रयागराज कोर्ट का बड़ा फैसला
अखाड़ा परिषद की प्रतिक्रिया
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष Ravindra Puri ने कहा कि इस तरह के आरोप किसी भी संत या शंकराचार्य के लिए अत्यंत पीड़ादायक होते हैं। उनके अनुसार, ऐसे मामलों से पूरे संत समाज की गरिमा प्रभावित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि संतों को अपने आचरण और शब्दों में संयम रखना चाहिए, क्योंकि सार्वजनिक जीवन में हर वक्त जिम्मेदारी बनी रहती है।
पुरी ने चिंता जताई कि इस तरह की घटनाओं से संत समाज में अविश्वास का माहौल बन सकता है और भविष्य में साधु-संत बच्चों या शिष्यों को अपने पास रखने से भी हिचकिचा सकते हैं।
जूना अखाड़ा की ओर से आरोप
Juna Akhara के महामंडलेश्वर प्रमोदानंद गिरि ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि माघ मेले के विवाद के बाद से ही शंकराचार्य को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वेष की भावना से कार्रवाई कर रहा है।
Read More: Prayagraj में सनसनीखेज मामला, Swami Avimukteshwaranand के खिलाफ दर्ज FIR पर जांच शुरू
प्रमोदानंद गिरि ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ताओं की पृष्ठभूमि और आरोपों की विश्वसनीयता की जांच होनी चाहिए। उनके मुताबिक, जहां घटना होने का दावा किया गया है, वहां निगरानी कैमरे मौजूद हैं और जांच से सच्चाई सामने आ सकती है।
धार्मिक और राजनीतिक असर
यह Shankaracharya Case केवल एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे धार्मिक संस्थाओं और सरकार के रिश्तों पर भी प्रश्न उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता, पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन अत्यंत आवश्यक है।
आने वाले दिनों में अदालत और जांच एजेंसियों की भूमिका निर्णायक होगी। संत समाज की प्रतिक्रियाएं और राजनीतिक बयानबाजी इस Shankaracharya Case को और पेचीदा बना सकती हैं। फिलहाल पूरा Shankaracharya Case देश के धार्मिक और राजनीतिक परिदृश्य में गंभीर बहस का विषय बना हुआ है।
Follow Us: YouTube| TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram
