Global Warming: दुनियाभर में बढ़ती गर्मी अब केवल मौसमी बदलाव नहीं रह गई है, बल्कि यह एक गंभीर वैश्विक संकट का संकेत बनती जा रही है। वैज्ञानिकों की नई Report में चेतावनी दी गई है कि अगर मौजूदा रफ्तार से ही तापमान बढ़ता रहा तो साल 2030 तक पृथ्वी का औसत तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को स्थायी रूप से पार कर सकता है। यह वही सीमा है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Climate Change के खतरनाक प्रभावों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में पृथ्वी के तापमान में जिस तेजी से बढ़ोतरी हुई है, उसने वैज्ञानिकों को भी चिंतित कर दिया है। कई क्षेत्रों में जहां पहले सामान्य तापमान रहता था, वहां अब रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की जा रही है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि जलवायु परिवर्तन का असर अब हर महाद्वीप में दिखाई देने लगा है।
हर दशक में तेजी से बढ़ रहा तापमान
जर्मनी स्थित पॉट्सडैम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च (PIK) की हालिया स्टडी के मुताबिक पिछले दस वर्षों में पृथ्वी का तापमान हर दशक में लगभग 0.35 डिग्री सेल्सियस की दर से बढ़ा है। यह आंकड़ा पहले की तुलना में काफी ज्यादा है। 1970 से 2015 के बीच यह वृद्धि औसतन 0.2 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक से थोड़ी कम थी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि तापमान बढ़ने की यह रफ्तार बताती है कि Climate Change पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है। Report में करीब 98 प्रतिशत वैज्ञानिक भरोसे के साथ यह निष्कर्ष निकाला गया है कि Global Warming की गति अब पहले से अधिक तेज हो चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार 1880 के बाद से जब से वैश्विक तापमान का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से रखा जा रहा है, तब से अब तक का यह दशक सबसे तेजी से गर्म होने वाला समय माना जा रहा है।
हाल के साल सबसे ज्यादा गर्म
Report में यह भी सामने आया है कि हाल के वर्ष पृथ्वी के इतिहास में सबसे गर्म सालों में शामिल हो चुके हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2023 से 2025 के बीच दुनिया का औसत तापमान प्री-इंडस्ट्रियल यानी औद्योगिक क्रांति से पहले के समय की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया।
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यह पहली बार हुआ है जब लगातार तीन वर्षों तक वैश्विक औसत तापमान इस महत्वपूर्ण सीमा से ऊपर बना रहा। हालांकि वैज्ञानिक यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी एक या दो साल का औसत इस सीमा को पार करना स्थायी रूप से 1.5°C के पार जाने जैसा नहीं होता, लेकिन यह भविष्य के खतरे का मजबूत संकेत जरूर है।
क्यों बढ़ रही है Global Warming?
Climate वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी के तापमान में तेजी से बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं। इनमें एल नीनो जैसी प्राकृतिक जलवायु घटनाएं, ज्वालामुखी विस्फोट और सूर्य की गतिविधियों में बदलाव जैसे कारक शामिल हैं। हालांकि इन प्राकृतिक कारणों को अलग करके देखने पर भी यह साफ हो जाता है कि तापमान बढ़ने की सबसे बड़ी वजह मानव गतिविधियां ही हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि उद्योगों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें, खासकर कार्बन डाइऑक्साइड, वायुमंडल में गर्मी को रोककर रखती हैं। इसके अलावा बड़े पैमाने पर जंगलों की कटाई, तेजी से बढ़ते शहर और ऊर्जा के लिए कोयला, तेल और गैस जैसे फॉसिल फ्यूल का उपयोग भी तापमान बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।
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वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर यही स्थिति जारी रही तो आने वाले कुछ वर्षों में 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा स्थायी रूप से पार हो सकती है, जिसका असर दुनिया के मौसम, समुद्र के स्तर और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर रूप से पड़ेगा।
Global Warming को कैसे रोका जा सकता है?
Climate विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी स्थिति को पूरी तरह बिगड़ने से रोका जा सकता है, लेकिन इसके लिए तुरंत और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। सबसे महत्वपूर्ण कदम है कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को तेजी से कम करना।
इसके लिए कोयला, तेल और गैस जैसे फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करनी होगी और सौर, पवन और जल जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से बढ़ावा देना होगा। इसके साथ ही बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, ऊर्जा दक्ष तकनीकों का उपयोग और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि अगर दुनिया ने अभी कदम नहीं उठाए तो आने वाले वर्षों में जलवायु संकट और भी गंभीर हो सकता है। बढ़ती गर्मी से सूखा, बाढ़, समुद्र का बढ़ता स्तर और चरम मौसम जैसी समस्याएं और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकती हैं। ऐसे में Climate Change से निपटना अब पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी बन चुका है।
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