Devbhoomi Parivar Bill 2026: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा दिन मंगलवार को ग्रीष्मकालीन राजधानी Gairsain के भराड़ीसैंण स्थित विधानसभा भवन में महत्वपूर्ण रहा। इस दौरान सदन में कुल 11 विधेयक पेश किए गए, जिनमें सबसे ज्यादा चर्चा Devbhoomi Parivar Bill 2026 को लेकर रही। राज्य सरकार का मानना है कि यह विधेयक लागू होने के बाद प्रदेश में सरकारी योजनाओं का लाभ नागरिकों तक अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से पहुंच सकेगा।
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि Devbhoomi Parivar Bill 2026 सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके माध्यम से राज्य में एक ऐसा डिजिटल और सत्यापित परिवार-आधारित डेटाबेस तैयार किया जाएगा, जिससे सरकार को योजनाओं के संचालन और लाभार्थियों की पहचान करने में काफी सुविधा मिलेगी।
एकीकृत परिवार डेटाबेस की दिशा में बड़ा कदम
सरकार के अनुसार Devbhoomi Parivar Bill 2026 का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी परिवारों का एकीकृत डेटा तैयार करना है। वर्तमान में अलग-अलग सरकारी विभाग अपनी योजनाओं के लिए अलग-अलग लाभार्थी सूचियां और डेटाबेस तैयार करते हैं।
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इस व्यवस्था के कारण कई बार लाभार्थियों के आंकड़ों में दोहराव, सत्यापन में देरी और विभागों के बीच समन्वय की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं। यही कारण है कि सरकार अब Devbhoomi Parivar Bill 2026 के माध्यम से एक केंद्रीकृत और विश्वसनीय डेटा प्रणाली तैयार करना चाहती है।
सरकार का कहना है कि इस नई प्रणाली से योजनाओं का बेहतर प्रबंधन होगा और जरूरतमंद परिवारों तक सरकारी सहायता सही समय पर पहुंच सकेगी।
महिला सदस्य होगी परिवार की मुखिया
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत Devbhoomi Parivar Bill 2026 में एक विशेष प्रावधान भी शामिल किया गया है। इसके अनुसार देवभूमि परिवार आईडी में परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की वरिष्ठतम महिला सदस्य को परिवार की मुखिया के रूप में दर्ज किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि यह कदम महिलाओं को सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। इसके साथ ही परिवार से जुड़ी योजनाओं का संचालन भी अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।
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विभागों के बीच डेटा साझा करने की व्यवस्था
Devbhoomi Parivar Bill 2026 लागू होने के बाद राज्य में एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जहां विभिन्न विभागों और एजेंसियों के बीच लाभार्थी संबंधी सूचनाओं का सुरक्षित आदान-प्रदान संभव होगा।
यह डेटा भंडार एक तरह से “सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ” के रूप में काम करेगा, जिससे किसी भी योजना के लिए लाभार्थियों की जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध रहेगी। इससे योजनाओं के लक्षित क्रियान्वयन में काफी सुधार आने की उम्मीद है।
सरकार का कहना है कि इस प्रणाली के जरिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।
डेटा सुरक्षा पर भी रहेगा विशेष ध्यान
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि Devbhoomi Parivar Bill 2026 के तहत तैयार होने वाली डेटा प्रणाली पूरी तरह से सुरक्षा मानकों के अनुरूप होगी।
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इस व्यवस्था को Digital Personal Data Protection Act 2023 के प्रावधानों के अनुसार संचालित किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग पारदर्शिता, सहमति और सुरक्षा के साथ ही किया जाए।
सरकार का कहना है कि डेटा सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का पालन किया जाएगा, ताकि किसी भी नागरिक की निजी जानकारी का दुरुपयोग न हो सके।
बजट सत्र में पेश हुए 11 महत्वपूर्ण विधेयक
बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में कुल 11 विधेयक प्रस्तुत किए गए। इनमें Devbhoomi Parivar Bill 2026 के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक भी शामिल हैं, जो प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्थाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से लाए गए हैं।
सदन में पेश किए गए प्रमुख विधेयकों में उत्तराखंड दुकान और स्थापना (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026, समान नागरिक संहिता उत्तराखंड (संशोधन) विधेयक 2026, उत्तराखंड कारागार और सुधारात्मक सेवाएं (संशोधन) विधेयक 2026 और उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं।
इसके अलावा उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग, उत्तराखंड भाषा संस्थान और सार्वजनिक द्यूत रोकथाम से जुड़े विधेयक भी सदन में रखे गए।
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सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि Devbhoomi Parivar Bill 2026 राज्य में सुशासन को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
उनका कहना है कि इस नई व्यवस्था से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी, सरकारी योजनाओं का बेहतर मूल्यांकन संभव होगा और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ तेजी से पहुंचेगा।
सरकार को उम्मीद है कि Devbhoomi Parivar Bill 2026 लागू होने के बाद राज्य में पारदर्शी और समन्वित शासन व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में उन परिवारों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है।
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