Property Registry Rule: उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति से जुड़े विवादों को कम करने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में करीब 30 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे महत्वपूर्ण फैसला Property Registry Rule से जुड़ा है, जिसके तहत अब किसी भी संपत्ति की बिक्री या रजिस्ट्री से पहले विक्रेता के नाम का मिलान खतौनी और अन्य राजस्व अभिलेखों से अनिवार्य रूप से किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से Property Registry Rule को मजबूत किया जा सकेगा और जमीन की खरीद-फरोख्त में होने वाले फर्जीवाड़े, गलत दस्तावेजों और धोखाधड़ी के मामलों में बड़ी कमी आएगी। लंबे समय से जमीन से जुड़े विवाद और नकली दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्री होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।
अब रजिस्ट्री से पहले होगा दस्तावेजों का मिलान
नई व्यवस्था के तहत जब कोई व्यक्ति अपनी जमीन या संपत्ति बेचने के लिए रजिस्ट्री कराएगा, तब संबंधित विभाग विक्रेता के नाम का मिलान खतौनी, राजस्व रिकॉर्ड और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों से करेगा।
READ MORE: नेवी का जवान निकला जासूस, ISI को भेज रहा था युद्धपोतों की तस्वीरें, यूपी ATS ने किया गिरफ्तार
अगर इन दस्तावेजों में नाम या विवरण में किसी प्रकार का अंतर पाया जाता है तो रजिस्ट्री प्रक्रिया को तुरंत रोक दिया जाएगा। इसके बाद मामले की जांच कराई जाएगी और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का कहना है कि Property Registry Rule लागू होने के बाद जमीन से जुड़े रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी बनेंगे और फर्जी दस्तावेजों के जरिए होने वाली रजिस्ट्री पर रोक लगेगी।
फर्जी जमीन सौदों पर लगेगी रोक
राज्य के कई जिलों में ऐसे मामले सामने आते रहे हैं जहां एक ही जमीन को अलग-अलग नामों से बेच दिया जाता है या फिर फर्जी पहचान के आधार पर रजिस्ट्री करा दी जाती है। इससे असली मालिक को वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि Property Registry Rule के लागू होने से ऐसे मामलों में काफी कमी आएगी। जब तक विक्रेता के दस्तावेज पूरी तरह से सत्यापित नहीं होंगे, तब तक रजिस्ट्री की अनुमति नहीं दी जाएगी। इससे जमीन खरीदने वाले लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।

डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ेगी प्रक्रिया
राज्य सरकार राजस्व रिकॉर्ड को डिजिटल बनाने की दिशा में पहले से काम कर रही है। नई व्यवस्था को भी डिजिटल सिस्टम से जोड़ने की योजना है, ताकि दस्तावेजों का सत्यापन तेजी से और पारदर्शी तरीके से किया जा सके।
अधिकारियों के मुताबिक आने वाले समय में Property Registry Rule को ऑनलाइन रिकॉर्ड सिस्टम के साथ जोड़ा जाएगा। इससे खरीदार और विक्रेता दोनों को सही जानकारी उपलब्ध होगी और रजिस्ट्री की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित हो जाएगी।
कैबिनेट बैठक में 30 प्रस्तावों को मंजूरी
मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में Property Registry Rule के अलावा भी कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इन प्रस्तावों का संबंध प्रशासनिक सुधार, विकास योजनाओं और जनहित से जुड़े फैसलों से बताया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य प्रशासनिक प्रक्रिया को सरल बनाना और आम लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।
जनता को मिलेगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार जमीन और संपत्ति से जुड़े विवाद देश के कई राज्यों में बड़ी समस्या बने हुए हैं। अक्सर खरीदार को बाद में पता चलता है कि जिस जमीन को उसने खरीदा है उस पर पहले से विवाद चल रहा है या दस्तावेजों में गड़बड़ी है।
ऐसे मामलों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने Property Registry Rule को सख्त बनाने का फैसला लिया है। इससे न केवल धोखाधड़ी पर रोक लगेगी बल्कि आम नागरिकों को भी सुरक्षित तरीके से संपत्ति खरीदने का भरोसा मिलेगा।
पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
सरकार का मानना है कि यह नया नियम राजस्व और रजिस्ट्री प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। इससे प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और जमीन से जुड़े मामलों में कानूनी विवाद कम होंगे।
आने वाले समय में यदि यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश में Property Registry Rule भूमि लेन-देन की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बना सकता है। यही कारण है कि इस फैसले को राज्य में संपत्ति प्रबंधन सुधार की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।
Follow Us: TV TODAY BHARAT LIVE | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram
