Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त गिरावट देखने को मिली और पूरे दिन बाजार में बिकवाली का माहौल बना रहा। सुबह फ्लैट शुरुआत के बाद अचानक Stock Market Crash जैसी स्थिति बन गई, जिससे प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट के कारण निवेशकों की संपत्ति में करीब 2.50 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई।
दिन के कारोबार के दौरान बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1,000 अंकों से अधिक गिरकर 77 हजार के आसपास पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी करीब 24,000 के स्तर के आसपास आ गया। विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के कारण बाजार में यह Stock Market Crash जैसी स्थिति पैदा हुई।
बाजार खुला सपाट, लेकिन जल्द ही बढ़ा दबाव
बुधवार सुबह Market ने सपाट शुरुआत की थी, जिससे निवेशकों को उम्मीद थी कि पिछले दिन की तेजी जारी रह सकती है। हालांकि कुछ ही समय में बिकवाली का दबाव बढ़ गया और बाजार तेजी से नीचे आने लगा। दोपहर के आसपास सेंसेक्स करीब 965 अंक गिरकर 77,230 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया, जबकि निफ्टी करीब 275 अंक गिरकर 23,985 के आसपास पहुंच गया।
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इस तेज गिरावट के कारण बाजार में घबराहट का माहौल बन गया और कई बड़े शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के चलते निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए मुनाफावसूली शुरू कर दी।
इन शेयरों में आई सबसे ज्यादा गिरावट
Market में आई इस Stock Market Crash के दौरान कई बड़े कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स पर एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, बजाज फाइनेंस, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और बजाज फिनसर्व जैसे शेयर टॉप लूज़र्स में शामिल रहे। इन कंपनियों के शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट देखने को मिली।
हालांकि कुछ शेयरों ने बाजार की कमजोरी के बीच भी मजबूती दिखाई। अडानी पोर्ट्स, एनटीपीसी, सन फार्मा और टेक महिंद्रा जैसे शेयर सीमित बढ़त के साथ टॉप गेनर्स में शामिल रहे।
सेक्टोरल इंडेक्स पर भी पड़ा असर
Market में आई गिरावट का असर अलग-अलग सेक्टरों पर भी साफ दिखाई दिया। निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 2 प्रतिशत तक गिर गया और यह सबसे ज्यादा गिरने वाले सेक्टरों में शामिल रहा। इसके अलावा निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में भी करीब 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
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हालांकि फार्मा सेक्टर में थोड़ी मजबूती देखने को मिली। निफ्टी फार्मा इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह बाजार की गिरावट के बीच बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर बन गया।
मिडिल ईस्ट तनाव बना बड़ी वजह
Market विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा Stock Market Crash की सबसे बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
हाल ही में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद स्थिति और संवेदनशील हो गई है। इसके अलावा ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो वह खाड़ी क्षेत्र से तेल सप्लाई रोक सकता है। इससे वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है और निवेशकों ने सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।
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रुपये की कमजोरी ने भी बढ़ाई चिंता
भारतीय रुपये में गिरावट भी Market की कमजोरी की एक बड़ी वजह बन रही है। बुधवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 0.14 प्रतिशत गिरकर 91.93 के स्तर पर खुला। इससे पहले रुपया हाल ही में डॉलर के मुकाबले 92.35 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच चुका है।
करेंसी मार्केट के विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर इंडेक्स की दिशा आने वाले दिनों में रुपये की चाल तय करेगी। रुपये में कमजोरी के कारण विदेशी निवेशकों का भरोसा भी कमजोर होता दिख रहा है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
भारतीय बाजार में लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी इस Stock Market Crash की बड़ी वजह मानी जा रही है। बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने मंगलवार को ही करीब 4,672 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए थे।
इसके अलावा मार्च के पहले हफ्ते में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 21,800 करोड़ रुपये की निकासी की है। लगातार हो रही इस बिकवाली ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है।
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आगे कैसा रहेगा बाजार का रुख?
Market एक्सपर्ट्स का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24,150 के आसपास था, जो टूट चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बाजार इस स्तर से नीचे बना रहता है तो निफ्टी 23,800 तक भी फिसल सकता है। हालांकि अगर वैश्विक परिस्थितियां सुधरती हैं और विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है तो बाजार में दोबारा तेजी भी देखने को मिल सकती है।
फिलहाल निवेशकों के लिए सलाह यही है कि वे बाजार में जल्दबाजी में बड़े फैसले लेने से बचें और वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए रखें।
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