Old Parliament Fire Incident: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में स्थित पुराने संसद भवन, जिसे अब ‘संविधान सदन’ के नाम से जाना जाता है, वहां रविवार शाम अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। यह घटना करीब शाम 5:40 बजे की बताई जा रही है, जब भवन की छत पर मरम्मत कार्य चल रहा था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, वेल्डिंग के दौरान निकली चिंगारी से यह हादसा हुआ।
हालांकि राहत की बात यह रही कि Old Parliament Fire Incident में आग को कुछ ही मिनटों में नियंत्रित कर लिया गया और किसी तरह के बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।
वेल्डिंग के दौरान लगी आग, तुरंत पाया गया काबू
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, छत पर मरम्मत का काम जारी था और इसी दौरान अचानक आग की लपटें उठने लगीं। वेल्डिंग के दौरान निकली चिंगारी ने आसपास मौजूद सामग्री को पकड़ लिया, जिससे आग फैलने लगी।
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Old Parliament Fire Incident की सूचना मिलते ही CISF की फायर टीम मौके पर पहुंची और तेजी से कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया। अधिकारियों के अनुसार, समय रहते की गई कार्रवाई के कारण आग ज्यादा नहीं फैल पाई।
कोई बड़ा नुकसान नहीं, जांच जारी
प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस Old Parliament Fire Incident में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि यह एक आकस्मिक घटना थी, जो वेल्डिंग कार्य के दौरान हुई।
हालांकि, घटना के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी सुनिश्चित कर रही हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
‘संविधान सदन’ के रूप में नई पहचान
पुराना संसद भवन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। लगभग 96 वर्षों तक यह देश की संसद का मुख्य केंद्र रहा।
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सितंबर 2023 में इसका नाम बदलकर ‘संविधान सदन’ कर दिया गया। Old Parliament Fire Incident के बाद एक बार फिर इस ऐतिहासिक भवन की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
यही वह भवन है जहां भारतीय संविधान का निर्माण और अंगीकरण हुआ था, इसलिए इसकी ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व बहुत अधिक है।
अब म्यूजियम और कार्यक्रमों के लिए होगा उपयोग
नए संसद भवन के उद्घाटन के बाद पुराने भवन का उपयोग अब संसदीय आयोजनों और म्यूजियम के रूप में करने की योजना है।
Old Parliament Fire Incident के बाद अधिकारियों ने कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके रखरखाव में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जाएगी।
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CISF के जिम्मे है सुरक्षा
वर्तमान में पुराने और नए दोनों संसद भवनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी CISF के पास है। 2023 में संसद की सुरक्षा में हुई चूक के बाद सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया था।
पहले यह जिम्मेदारी CRPF की ‘पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप’ के पास थी, लेकिन मई 2024 से CISF ने दोनों परिसरों की सुरक्षा संभाल ली है।
Old Parliament Fire Incident में भी CISF की तत्परता के कारण आग को तुरंत नियंत्रित किया जा सका, जिससे किसी बड़े हादसे को टाला जा सका।
नए संसद भवन का निर्माण और आधुनिक सुविधाएं
पुराने संसद भवन के पास ही नए संसद भवन का निर्माण किया गया है, जो सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है। इसका उद्घाटन 28 मई 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया था।
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नए भवन में आधुनिक तकनीक और सुविधाएं शामिल की गई हैं। लोकसभा में 888 और राज्यसभा में 384 सदस्यों के बैठने की क्षमता है।
हालांकि Old Parliament Fire Incident ने यह याद दिलाया है कि पुराने ऐतिहासिक भवनों की सुरक्षा और संरक्षण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा पर बढ़ा फोकस
इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां और प्रशासन दोनों ही सतर्क हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं से सबक लेकर सुरक्षा और रखरखाव के मानकों को और मजबूत किया जाना चाहिए।
Old Parliament Fire Incident भले ही बड़ा हादसा नहीं बना, लेकिन इसने यह जरूर दिखा दिया कि ऐतिहासिक इमारतों में किसी भी तरह के कार्य के दौरान विशेष सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हुई हैं।
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