Foreign Portfolio Investors: भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) मार्च 2026 में भारी उतार-चढ़ाव और दबाव के दौर से गुजर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह Foreign Portfolio Investors यानी एफपीआई (Foreign Portfolio Investors) की लगातार बिकवाली है। बीते तीन हफ्तों में ही Foreign Portfolio Investors ने भारतीय बाजार से करीब 88,180 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं, जिससे निवेशकों के बीच चिंता बढ़ गई है।
यह आंकड़ा पिछले 17 महीनों की सबसे बड़ी मासिक निकासी के बेहद करीब पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो अक्टूबर 2024 में दर्ज 94,017 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिकवाली भी टूट सकती है।
मार्च में लगातार बिकवाली, निवेशकों में घबराहट
नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में अब तक हर ट्रेडिंग सेशन में Foreign Portfolio Investors Selling शुद्ध विक्रेता रहे हैं। इसका मतलब है कि विदेशी निवेशक लगातार भारतीय इक्विटी से पैसा निकाल रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि फरवरी 2026 में Foreign Portfolio Investors ने 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 महीनों का सबसे बड़ा निवेश था। लेकिन मार्च में अचानक बदले इस रुख ने बाजार को झटका दिया है और निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
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Foreign Portfolio Investors बिकवाली के पीछे प्रमुख कारण
1. पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा कर दी है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में संभावित व्यवधान की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाते का घाटा बढ़ सकता है।
3. रुपये में कमजोरी
भारतीय रुपया (Indian Rupee) डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 92 के स्तर के करीब पहुंच गया है। इससे Foreign Portfolio Investors का भरोसा कम होता है और वे अपना निवेश निकालना बेहतर समझते हैं।
4. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury Yield) में बढ़ोतरी के कारण डॉलर आधारित निवेश ज्यादा आकर्षक हो रहे हैं। ऐसे में निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं।
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किन सेक्टरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?
Foreign Portfolio Investors की इस भारी बिकवाली का सबसे ज्यादा असर फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर पर देखने को मिला है। मार्च के मध्य तक इस सेक्टर में विदेशी निवेशकों ने 31,000 करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली की है।
इसके अलावा आईटी (IT Sector), मेटल (Metal Sector) और ऑटो (Auto Sector) में भी दबाव बना हुआ है। बाजार की इस स्थिति के कारण सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty 50) दोनों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
क्या टूटेगा अक्टूबर 2024 का रिकॉर्ड?
अक्टूबर 2024 में Foreign Portfolio Investors ने 94,017 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड निकासी की थी। मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए मार्च 2026 इस रिकॉर्ड के बेहद करीब पहुंच चुका है।
महीने के कुछ दिन अभी बाकी हैं। अगर Foreign Portfolio Investors की बिकवाली का सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो नया रिकॉर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है।
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आगे बाजार की दिशा क्या होगी?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है या कच्चे तेल की कीमतों में और उछाल आता है, तो बाजार में और गिरावट देखी जा सकती है।
हालांकि कुछ सकारात्मक संकेत भी बाजार को सहारा दे सकते हैं:
- घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की मजबूत खरीदारी
- कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजे
- वैश्विक तनाव में कमी
- रुपये में स्थिरता
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
मौजूदा समय में बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे जल्दबाजी में कोई बड़ा निर्णय न लें।
लंबी अवधि (Long Term Investment) के निवेशकों के लिए यह गिरावट एक अवसर हो सकती है, लेकिन शॉर्ट टर्म में जोखिम बना हुआ है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रहते हुए संतुलित रणनीति अपनानी चाहिए।
मार्च 2026 भारतीय शेयर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बनता नजर आ रहा है। Foreign Portfolio Investors की लगातार बिकवाली ने बाजार की दिशा बदल दी है और निवेशकों के बीच चिंता बढ़ा दी है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह ट्रेंड जारी रहेगा या बाजार में जल्द सुधार देखने को मिलेगा। फिलहाल निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है सावधानी, धैर्य और सही रणनीति।
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