Gold Silver Import Surge: भारत में सोने-चांदी के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ता जा रहा है और इसका सीधा असर देश के आयात आंकड़ों में देखने को मिल रहा है। Gold Silver Import Surge के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों में सोने और चांदी के आयात में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां सोने के आयात में करीब 29 फीसदी की वृद्धि हुई है, वहीं चांदी के आयात में 143 प्रतिशत का बड़ा उछाल देखा गया है।
सोने के आयात में 29% की बढ़ोतरी
Gold Silver Import Surge के तहत वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल से फरवरी 2025-26 के दौरान भारत का सोने का आयात बढ़कर लगभग 69.17 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा 53.52 अरब डॉलर था।
विशेषज्ञों के अनुसार, शादी-ब्याह के सीजन, अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसरों और घरेलू मांग में तेजी ने इस बढ़ोतरी को बढ़ावा दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में सोने की खरीदारी पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा।
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चांदी के आयात में 143% का उछाल
Gold Silver Import Surge की सबसे बड़ी खासियत चांदी के आयात में आई तेज वृद्धि है। इस अवधि में चांदी का आयात बढ़कर 11.43 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 142.87 प्रतिशत अधिक है।
चांदी का उपयोग केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और फार्मास्यूटिकल्स जैसे उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है। यही वजह है कि औद्योगिक मांग में वृद्धि भी इस उछाल का एक बड़ा कारण मानी जा रही है।
किन देशों से आ रहा सबसे ज्यादा सोना?
भारत में Gold Silver Import Surge के पीछे आयात स्रोत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, भारत सबसे ज्यादा सोना स्विट्जरलैंड से आयात करता है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है।
इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और दक्षिण अफ्रीका भी प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। फरवरी महीने में स्विट्जरलैंड से सोने का आयात सालाना आधार पर 700 प्रतिशत से अधिक बढ़ा, जो इस बढ़ती मांग का संकेत है।
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कीमतों में तेजी के बावजूद मांग बरकरार
दिलचस्प बात यह है कि Gold Silver Import Surge ऐसे समय में देखने को मिल रहा है जब सोने और चांदी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। राष्ट्रीय राजधानी में सोने की कीमत करीब 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बनी हुई है।
इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं की खरीदारी में कमी नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सोना केवल निवेश का साधन नहीं, बल्कि परंपरा और संस्कृति का अहम हिस्सा है।
ट्रेड डेफिसिट पर बढ़ा दबाव
सोने और चांदी के बढ़ते आयात का असर देश के व्यापार घाटे पर भी पड़ा है। Gold Silver Import Surge के चलते अप्रैल-फरवरी 2025-26 के दौरान भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 310.60 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।
यह पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, सरकार इस स्थिति को संतुलित करने के लिए विभिन्न उपायों पर काम कर रही है।
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सरकार के कदम और नई नीतियां
बढ़ते Gold Silver Import Surge को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने हाल ही में सोने, चांदी और प्लैटिनम से बनी कुछ वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम उठाए हैं।
इसका उद्देश्य आयात पर निर्भरता कम करना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इसके अलावा डिजिटल निगरानी और आयात नीति में बदलाव के जरिए भी संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है।
CAD पर भी असर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, चालू खाता घाटा (CAD) भी बढ़ते आयात के कारण प्रभावित हुआ है। दिसंबर तिमाही में CAD बढ़कर 13.2 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। हालांकि, पूरे वित्त वर्ष के दौरान स्थिति कुछ हद तक नियंत्रण में रही है, लेकिन Gold Silver Import Surge जैसे रुझान भविष्य में आर्थिक संतुलन के लिए चुनौती बन सकते हैं।
भारत में सोने-चांदी के प्रति लोगों का आकर्षण अभी भी बरकरार है और Gold Silver Import Surge इसके स्पष्ट संकेत दे रहा है। बढ़ती कीमतों के बावजूद मांग में कमी नहीं आई है, जो भारतीय बाजार की विशेषता को दर्शाता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और बाजार के प्रयास इस बढ़ते आयात को किस हद तक संतुलित कर पाते हैं।
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