JICA Forest Project Uttarakhand उत्तराखंड में वन संरक्षण, जैव विविधता और ग्रामीण आजीविका को संतुलित करने वाला एक सफल मॉडल बनकर उभरा है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) द्वारा वित्त पोषित इस परियोजना ने राज्य के वन क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।
पहले चरण की सफलता के बाद अब इसके दूसरे चरण की तैयारी तेज कर दी गई है। इसी सिलसिले में जायका इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने उत्तराखंड के वन मंत्री Subodh Uniyal से मुलाकात कर परियोजना की प्रगति और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की।
13 वन प्रभागों में सफल संचालन
वर्तमान में JICA Forest Project Uttarakhand राज्य के 13 वन प्रभागों के अंतर्गत 36 रेंजों और 839 वन पंचायतों में संचालित हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के अधिकांश लक्ष्यों को लगभग शत-प्रतिशत हासिल कर लिया गया है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि परियोजना न केवल योजनाबद्ध तरीके से लागू हुई है, बल्कि इसका प्रभाव भी जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है।
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ईको-रेस्टोरेशन में बड़ी उपलब्धि
इस परियोजना के तहत ईको-रेस्टोरेशन यानी पर्यावरणीय पुनर्स्थापना के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है। निर्धारित 38,000 हेक्टेयर क्षेत्र के मुकाबले 38,393 हेक्टेयर में पुनर्स्थापना कार्य पूरा किया जा चुका है। JICA Forest Project Uttarakhand के इस प्रयास से न केवल जंगलों का पुनर्जीवन हुआ है, बल्कि जल संरक्षण और जैव विविधता को भी मजबूती मिली है।
वित्तीय अनुशासन और प्रगति
परियोजना की वित्तीय प्रगति भी काफी प्रभावशाली रही है। कुल 807 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 95 प्रतिशत से अधिक राशि खर्च की जा चुकी है। साथ ही 93 प्रतिशत से अधिक प्रतिपूर्ति दावे भी प्राप्त हो चुके हैं। यह दर्शाता है कि JICA Forest Project Uttarakhand समयबद्ध और वित्तीय अनुशासन के साथ आगे बढ़ रही है।
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स्थानीय समुदायों को मिला लाभ
परियोजना के सामाजिक पहलुओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। 839 वन पंचायतों में 1503 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है, जबकि 20 क्लस्टर फेडरेशन भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।
इनके अलावा राज्य स्तर पर एक शीर्ष फेडरेशन का गठन किया गया है, जो इन समूहों के समन्वय और सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। JICA Forest Project Uttarakhand ने ग्रामीण समुदायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भी अहम योगदान दिया है।
आजीविका संवर्धन में नई पहल
इस परियोजना के तहत 18 वैल्यू चेन पर काम किया गया है, जिसमें सेब उत्पादन, मधुमक्खी पालन और अखरोट रोपण जैसी गतिविधियां शामिल हैं। इन पहलों ने स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं और उनकी आय में वृद्धि की है।
JICA Forest Project Uttarakhand का यह पहलू इसे केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास का भी मजबूत माध्यम बनाता है।
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भू-कटाव रोकने के लिए जापानी तकनीक
पहाड़ी क्षेत्रों में भू-कटाव और भूस्खलन की समस्या को देखते हुए परियोजना के तहत विशेष उपाय किए जा रहे हैं। तीन मॉडल साइट्स और चार कैंडिडेट साइट्स पर जापानी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
इन कार्यों को इस महीने के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे भविष्य में भूस्खलन की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है। JICA Forest Project Uttarakhand इस तरह प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में भी सहायक साबित हो रही है।
फेज-2 में 1500 करोड़ की बड़ी योजना
अब इस परियोजना के दूसरे चरण यानी फेज-2 की रूपरेखा तैयार की जा चुकी है। वर्ष 2026 से 2035 तक चलने वाली इस योजना की कुल लागत करीब 1500 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें 85 प्रतिशत वित्तीय सहायता JICA द्वारा और 15 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा दी जाएगी। फेज-2 में 47 वन रेंजों को शामिल करने का प्रस्ताव है।
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फेज-2 में क्या होगा खास?
फेज-2 के तहत JICA Forest Project Uttarakhand को और व्यापक बनाया जाएगा। इसमें ईको-रेस्टोरेशन, जड़ी-बूटी रोपण, कृषि वानिकी, प्रशिक्षण और आजीविका विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके अलावा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने और जैव विविधता संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जाएगी।
JICA Forest Project Uttarakhand राज्य में पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आया है। पहले चरण की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सही योजना और सामुदायिक भागीदारी के साथ सतत विकास संभव है। अब फेज-2 के जरिए इस मॉडल को और मजबूत बनाने की तैयारी है, जो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के लिए एक स्थायी और प्रभावी वन प्रबंधन प्रणाली साबित हो सकती है।
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