Bihar Cabinet Expansion: बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 6 मई को महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक बुलाकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर और तेज कर दिया है। माना जा रहा है कि लंबे समय से अटके Bihar Cabinet Expansion को अब अंतिम रूप दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री सचिवालय में शाम 5 बजे होने वाली इस बैठक को आगामी राजनीतिक रणनीति और सत्ता संतुलन के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली दौरे के बाद Bihar Cabinet Expansion को लेकर तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इन बैठकों में बिहार सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। माना जा रहा है कि सहयोगी दलों के बीच सीट और विभागों के बंटवारे को लेकर सहमति बन चुकी है।
BJP और JDU के बीच 15-15 का फॉर्मूला
सूत्रों की मानें तो Bihar Cabinet Expansion में बीजेपी और जेडीयू के बीच 15-15 मंत्रियों का फॉर्मूला तय किया गया है। बीजेपी कोटे से 13 नए चेहरों को मंत्री बनाया जा सकता है, जबकि जेडीयू के हिस्से में 12 मंत्री पद आने की संभावना है। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिए जाने की तैयारी है।
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इस राजनीतिक संतुलन के जरिए एनडीए बिहार में आगामी चुनावों से पहले सामाजिक समीकरणों को मजबूत करना चाहती है। Bihar Cabinet Expansion के जरिए पिछड़े, अति पिछड़े, दलित और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की जा रही है।
नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद बढ़ी अटकलें
दिल्ली रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की थी। इस मुलाकात को Bihar Cabinet Expansion से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बिहार में एनडीए के भीतर समन्वय बनाए रखने के लिए नीतीश कुमार की राय भी अहम मानी जा रही है।
हालांकि आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को सामान्य राजनीतिक चर्चा बताया गया, लेकिन जिस तरह लगातार बैठकों का दौर चला, उससे यह साफ संकेत मिला कि मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम रणनीति तैयार की जा चुकी है।
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पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम के बाद बदली रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों के बाद बीजेपी अब बिहार में संगठन और सरकार दोनों को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी वजह से Bihar Cabinet Expansion को लेकर तेजी दिखाई जा रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सरकार का नया चेहरा जनता के सामने आए।
कैबिनेट विस्तार के जरिए क्षेत्रीय असंतोष को कम करने और नए नेताओं को मौका देने की तैयारी भी की जा रही है। बिहार में कई विधायक लंबे समय से मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में 6 मई की बैठक कई नेताओं के राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक मानी जा रही है।
जीतन राम मांझी ने दिए बड़े संकेत
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री और हम प्रमुख जीतन राम मांझी से भी मुलाकात की। मुलाकात के बाद मांझी ने मीडिया से बातचीत में कई अहम संकेत दिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें अभिभावक और उनके बेटे संतोष सुमन को भाई जैसा बताया है। मांझी के इस बयान को राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि Bihar Cabinet Expansion में सभी समाज और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। मांझी ने यह भी कहा कि सरकार को समन्वय और संतुलन बनाकर फैसला लेना चाहिए ताकि प्रदेश के विकास को गति मिल सके।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि संतोष कुमार सुमन को फिर से अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
बिहार की राजनीति हमेशा जातीय और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती रही है। ऐसे में Bihar Cabinet Expansion केवल मंत्री पदों का बंटवारा नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है। बीजेपी और जेडीयू दोनों ही दल चाहते हैं कि हर वर्ग को सरकार में प्रतिनिधित्व मिले।
सूत्रों का कहना है कि युवा चेहरों, महिला नेताओं और क्षेत्रीय संतुलन पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। कई नए विधायकों को मौका देकर पार्टी संगठन को भी मजबूत करने की तैयारी है।
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6 मई की बैठक क्यों है अहम?
6 मई को होने वाली बैठक में केवल कैबिनेट विस्तार ही नहीं, बल्कि कई प्रशासनिक और विकास योजनाओं पर भी चर्चा होगी। लेकिन राजनीतिक नजरिया से सबसे ज्यादा फोकस Bihar Cabinet Expansion पर ही रहेगा।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बैठक के बाद बिहार की राजनीति में नई तस्वीर देखने को मिल सकती है। कई नेताओं की किस्मत बदल सकती है और सत्ता समीकरणों में भी बड़ा बदलाव संभव है।
फिलहाल पूरे बिहार की नजर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई में होने वाली इस बैठक पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि बिहार सरकार का नया मंत्रिमंडल किस रूप में सामने आता है और कौन-कौन नेता इसमें जगह बनाने में सफल रहते हैं।
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