LUCC Scam Case: उत्तराखंड के बहुचर्चित LUCC Scam Case में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। हजारों निवेशकों को प्रभावित करने वाले लोनि अर्बन मल्टी क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (LUCC) घोटाले के मुख्य आरोपियों में शामिल शबाब हुसैन की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। मुंबई की गिरगांव अदालत ने शबाब हुसैन समेत मायफ्लेज प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों बिश्वजीत बादल घोष और पियाली श्यामलेन्दु चटर्जी को 4.44 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में नया समन जारी किया है।
अदालत ने सभी आरोपियों को 4 फरवरी 2026 को पेश होने का निर्देश दिया है। यह मामला केवल चेक बाउंस तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और निवेशकों को गुमराह करने जैसे गंभीर आरोप भी जुड़े हुए हैं। इस नए मामले ने पहले से चर्चा में चल रहे LUCC Scam Case को और ज्यादा गंभीर बना दिया है।
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कंपनी पर निवेशकों को गुमराह करने के आरोप
यह नया विवाद मायफ्लेज प्राइवेट लिमिटेड नाम की एविएशन ट्रेनिंग कंपनी से जुड़ा हुआ है। कंपनी खुद को देशभर में फैले बड़े शिक्षा नेटवर्क के रूप में पेश करती थी। आरोप है कि कंपनी ने निवेशकों और छात्रों को बड़े-बड़े वादे करके करोड़ों रुपये जुटाए, लेकिन बाद में अधिकांश सुविधाएं और ट्रेनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर केवल कागजों तक ही सीमित निकले।
मामले की शिकायत अभिनेता Aayush Shah ने दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कंपनी ने करीब 4 करोड़ 44 लाख 48 हजार रुपये की धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा किया। शिकायत के अनुसार छात्रों को आधुनिक एविएशन ट्रेनिंग, प्रमाणपत्र और रोजगार के अवसर देने का दावा किया गया था, लेकिन उन्हें वादे के अनुरूप सुविधाएं नहीं मिलीं।
कई शहरों में चल रहा था नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि मायफ्लेज का नेटवर्क उत्तराखंड के देहरादून समेत कई शहरों तक फैला हुआ था। कंपनी ने अपने संस्थानों को प्रतिष्ठित एविएशन ट्रेनिंग सेंटर के रूप में प्रचारित किया था। कई छात्रों और अभिभावकों ने लाखों रुपये जमा कराए, लेकिन बाद में उन्हें न तो पूरी ट्रेनिंग मिली और न ही प्रमाणपत्र।
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कुछ छात्रों का आरोप है कि संस्थान में जरूरी तकनीकी संसाधनों और प्रशिक्षकों की भारी कमी थी। इसके बावजूद कंपनी बड़े स्तर पर एडमिशन लेती रही। यही वजह है कि अब इस मामले को केवल आर्थिक विवाद नहीं बल्कि संगठित वित्तीय धोखाधड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
अभिनेता आयुष शाह ने लगाए गंभीर आरोप
अभिनेता आयुष शाह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने जिस संस्थान पर भरोसा किया था, वह एक सुनियोजित धोखाधड़ी निकला। उन्होंने कहा कि निवेशकों और छात्रों दोनों को कंपनी की वास्तविक स्थिति के बारे में गलत जानकारी दी गई।
उनका कहना है कि कंपनी ने अपने संसाधनों, संपत्तियों और नेटवर्क को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। इससे लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि संस्थान पूरी तरह वैध और भरोसेमंद है। लेकिन बाद में जब वादे पूरे नहीं हुए तो कई लोग आर्थिक और मानसिक संकट में आ गए।
Oshiwara Police और CBI भी कर रही जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरगांव कोर्ट ने ओशिवारा पुलिस स्टेशन को पहले से दर्ज एफआईआर की जानकारी अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं। इस एफआईआर में शबाब हुसैन, बिश्वजीत घोष, पियाली चटर्जी और उनके परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।
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इसके साथ ही उत्तराखंड में सामने आए मूल LUCC Scam Case की जांच पहले से ही CBI के दायरे में है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद केंद्रीय जांच एजेंसी पूरे मामले की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि अब मायफ्लेज मामले और LUCC घोटाले के बीच संभावित आर्थिक कनेक्शन की भी जांच की जा सकती है।
1500 करोड़ रुपये से ज्यादा का बताया जा रहा घोटाला
LUCC घोटाले को उत्तराखंड के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है। शुरुआती जांच में अनुमान लगाया गया था कि इस घोटाले में करीब 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम फंसी हुई है।
साल 2019 के बाद से कंपनी ने उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में आक्रामक तरीके से निवेश योजनाओं का प्रचार किया था। लोगों को ज्यादा ब्याज और सुरक्षित निवेश का भरोसा देकर बड़ी संख्या में जमा राशि जुटाई गई। लेकिन अचानक कंपनी के संचालन पर सवाल उठने लगे और निवेशकों का पैसा फंस गया।
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कानूनी दबाव बढ़ने से बढ़ी आरोपियों की मुश्किलें
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि नए चेक बाउंस और धोखाधड़ी मामले के बाद शबाब हुसैन और अन्य आरोपियों की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। शिकायतकर्ताओं के वकील एडवोकेट के.पी. दुबे ने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय विवाद नहीं, बल्कि जालसाजी और धोखे के जरिए लोगों का पैसा हड़पने का गंभीर मामला है।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां आरोपियों के दूसरे आर्थिक लेनदेन और नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं। आने वाले समय में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
उत्तराखंड के हजारों निवेशक अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि जांच एजेंसियां कब तक उनकी फंसी रकम वापस दिलाने की दिशा में ठोस कार्रवाई करती हैं। वहीं, मुंबई में सामने आया यह नया मामला LUCC Scam Case की परतों को और गहराई से उजागर करता नजर आ रहा है।
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