ATF VAT Cut: दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार ने एविएशन सेक्टर को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर लगने वाले वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) को 25 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। माना जा रहा है कि ATF VAT Cut का सीधा असर एयरलाइन कंपनियों की लागत पर पड़ेगा और आने वाले समय में हवाई यात्रा कुछ हद तक सस्ती हो सकती है।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और विमान ईंधन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ईंधन की ऊंची लागत से एयरलाइंस पर दबाव बढ़ गया था और टिकट कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही थी।
एयरलाइन कंपनियों को मिलेगा सीधा फायदा
विशेषज्ञों के मुताबिक एयरलाइन कंपनियों के कुल संचालन खर्च में एविएशन टर्बाइन फ्यूल की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा होती है। कई मामलों में यह कुल खर्च का 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। ऐसे में ATF VAT Cut से एयरलाइंस की लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।
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एयरलाइन कंपनियां लंबे समय से मांग कर रही थीं कि राज्यों द्वारा ATF पर लगाए जा रहे भारी टैक्स को कम किया जाए। दिल्ली में 25 प्रतिशत VAT देश के सबसे ऊंचे टैक्स में शामिल था। अब इसे घटाकर 7 प्रतिशत किए जाने से इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
एविएशन सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि इससे घरेलू उड़ानों का संचालन ज्यादा लाभकारी होगा और एयरलाइंस नई उड़ानें शुरू करने के लिए भी प्रोत्साहित होंगी।
यात्रियों को भी मिल सकती है राहत
ATF VAT Cut का असर केवल एयरलाइन कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका फायदा यात्रियों को भी मिल सकता है। यदि एयरलाइंस की लागत घटती है तो भविष्य में किराए में होने वाली तेज बढ़ोतरी को नियंत्रित किया जा सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि टिकट कीमतों में तत्काल बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी, लेकिन बढ़ती लागत के दबाव को कम करने में यह फैसला अहम साबित होगा। खासतौर पर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान बढ़ने वाले हवाई किराए पर इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है। दिल्ली एयरपोर्ट से यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में भी इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
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पश्चिम एशिया संकट के बीच अहम फैसला
पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल और जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला।
इसका सीधा असर भारत के एविएशन सेक्टर पर पड़ा क्योंकि भारत अपनी ईंधन जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ATF VAT Cut को इसी आर्थिक दबाव को कम करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
सरकार का मानना है कि यदि एयरलाइंस पर टैक्स का बोझ कम होगा तो संकट के दौर में भी घरेलू एविएशन नेटवर्क को स्थिर रखा जा सकेगा।
छह महीने के लिए लागू होगी नई व्यवस्था
दिल्ली सरकार की ओर से लागू की गई नई VAT दर फिलहाल शुरुआती तौर पर छह महीने के लिए लागू की गई है। इस अवधि के दौरान सरकार इसके प्रभाव का आकलन करेगी।
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सूत्रों के अनुसार यदि ATF VAT Cut से एयरलाइन कंपनियों और यात्रियों को अपेक्षित राहत मिलती है तो इसे आगे भी जारी रखा जा सकता है। सरकार इस फैसले के जरिए दिल्ली को देश के प्रमुख एविएशन हब के रूप में मजबूत करना चाहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कम टैक्स की वजह से एयरलाइंस दिल्ली एयरपोर्ट को अधिक प्राथमिकता दे सकती हैं।
महाराष्ट्र मॉडल से मिली प्रेरणा
इससे पहले महाराष्ट्र सरकार भी ATF पर टैक्स में कटौती कर चुकी है। वहां इस फैसले के बाद एयरलाइंस के संचालन खर्च में कमी आई थी और कई नई उड़ानें शुरू हुई थीं।
दिल्ली सरकार ने भी इसी मॉडल को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। माना जा रहा है कि ATF VAT Cut से राजधानी में एविएशन सेक्टर को नई गति मिलेगी और निवेश बढ़ सकता है। एयरलाइन कंपनियों के प्रतिनिधियों ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे उद्योग के लिए सकारात्मक कदम बताया है।
केंद्र सरकार भी लगातार कर रही थी अपील
केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय लंबे समय से राज्यों से अपील कर रहा था कि वे ATF पर VAT कम करें। मंत्रालय का मानना था कि वैश्विक संकट के दौर में एयरलाइंस पर अतिरिक्त टैक्स का बोझ नहीं होना चाहिए।
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केंद्र सरकार पहले ही एयरलाइन कंपनियों को कई तरह की राहत दे चुकी है। इसमें एयरपोर्ट शुल्क में कमी, आपातकालीन क्रेडिट योजना और ATF कीमतों को स्थिर रखने जैसे कदम शामिल हैं।
इसके बावजूद राज्य स्तर पर लगने वाला VAT एयरलाइंस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। अब दिल्ली सरकार के फैसले के बाद अन्य राज्यों पर भी टैक्स घटाने का दबाव बढ़ सकता है।
दिल्ली एविएशन हब बनने की दिशा में आगे
विशेषज्ञों का मानना है कि ATF VAT Cut से दिल्ली की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी। कम संचालन लागत की वजह से एयरलाइंस दिल्ली को ज्यादा प्राथमिकता दे सकती हैं।
इसके अलावा यात्रियों के लिए भी हवाई यात्रा अधिक सुविधाजनक और किफायती बनने की संभावना है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।
एविएशन इंडस्ट्री के लिए यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच एयरलाइंस अपने खर्चों को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं। ऐसे में ATF VAT Cut को इंडस्ट्री के लिए राहत भरे कदम के रूप में देखा जा रहा है।
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