Sasaram Burning Train: बिहार के सासाराम रेलवे स्टेशन पर सोमवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सासाराम-पटना फास्ट पैसेंजर ट्रेन के एक कोच में अचानक आग लग गई. देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और एक पूरी बोगी धू-धू कर जलने लगी. Sasaram Burning Train के बाद स्टेशन परिसर में मौजूद यात्रियों के बीच दहशत फैल गई. हालांकि रेलवे कर्मचारियों, सुरक्षा बलों और दमकल विभाग की त्वरित कार्रवाई से सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया. शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी मानी जा रही है. इस घटना के बाद एक बार फिर Indian Railway Safety को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं.
प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेन में अचानक उठने लगा धुआं
जानकारी के अनुसार, सासाराम-पटना फास्ट पैसेंजर ट्रेन संख्या 53212 सोमवार सुबह प्लेटफार्म संख्या 6 पर खड़ी थी और पटना रवाना होने की तैयारी चल रही थी. सुबह करीब पौने छह बजे अचानक ट्रेन की बी-3 बोगी के शौचालय की ओर से धुआं निकलता दिखाई दिया. शुरुआत में लोगों को लगा कि शायद कोई सामान्य तकनीकी दिक्कत होगी, लेकिन कुछ ही मिनटों में धुआं तेज लपटों में बदल गया.
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स्टेशन के पास मौजूद स्थानीय लोगों और मॉर्निंग वॉक कर रहे नागरिकों ने सबसे पहले आग की सूचना रेलवे कर्मचारियों को दी. आग की खबर फैलते ही स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई और यात्री अपनी जान बचाने के लिए तेजी से प्लेटफार्म से बाहर निकलने लगे.
कुछ ही मिनटों में आग ने लिया विकराल रूप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग इतनी तेजी से फैली कि ट्रेन की पांचवीं बोगी पूरी तरह आग की चपेट में आ गई. लपटें इतनी ऊंची थीं कि आसपास मौजूद लोग घबरा गए. आग की गर्मी के कारण पास की चौथी बोगी का पिछला हिस्सा भी प्रभावित हुआ. रेलवे कर्मचारियों ने तत्काल प्रभावित कोच को अलग करने की प्रक्रिया शुरू की ताकि आग अन्य डिब्बों तक न पहुंचे.
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उस समय ट्रेन में ज्यादा भीड़ नहीं थी, क्योंकि ट्रेन सुबह 6:45 बजे पटना के लिए रवाना होने वाली थी. यही वजह रही कि किसी भी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं मिली. रेलवे प्रशासन की तत्परता और यात्रियों की सतर्कता से स्थिति को समय रहते नियंत्रित कर लिया गया.
दमकल विभाग और रेलवे स्टाफ ने संभाला मोर्चा
Sasaram Burning Train की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. रेलवे सुरक्षा बल, स्थानीय कर्मचारी और मजदूरों ने मिलकर आग बुझाने का अभियान शुरू किया. काफी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया गया. स्टेशन पर मौजूद लोगों ने बताया कि अगर कुछ और देर हो जाती तो आग पूरी ट्रेन में फैल सकती थी.
रेलवे अधिकारियों ने सुरक्षा के मद्देनजर पूरे प्लेटफार्म को खाली कराया और यात्रियों को दूसरे सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया. आग बुझने के बाद क्षतिग्रस्त बोगी को ट्रेन से अलग कर दिया गया.
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Indian Railway Safety पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद Indian Railway Safety को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. यात्रियों का कहना है कि ट्रेन में आग बुझाने वाले उपकरण मौजूद थे, लेकिन शुरुआती समय में उनका सही तरीके से उपयोग नहीं हो सका. कई यात्रियों ने आरोप लगाया कि यदि समय रहते अग्निशमन यंत्रों और पानी का इस्तेमाल किया जाता, तो बोगी को पूरी तरह जलने से बचाया जा सकता था.
रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि गर्मी के मौसम में ट्रेनों की तकनीकी जांच और वायरिंग निरीक्षण को और अधिक सख्त बनाने की जरूरत है. लगातार बढ़ती ऐसी घटनाएं रेलवे प्रशासन के लिए चुनौती बनती जा रही हैं.
जांच के लिए पहुंचे वरिष्ठ अधिकारी
घटना के बाद डीडीयू रेल डिवीजन के वरिष्ठ अधिकारी सासाराम स्टेशन के लिए रवाना हो गए. रेलवे प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं. शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, हालांकि तकनीकी टीम सभी पहलुओं की जांच कर रही है.
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ट्रेन के इलेक्ट्रिकल सिस्टम, वायरिंग और कोच के अंदर मौजूद उपकरणों की बारीकी से जांच की जाएगी. इसके अलावा यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या सुरक्षा मानकों में कहीं लापरवाही हुई थी.
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यात्रियों में डर, लेकिन बड़ा हादसा टला
घटना के बाद यात्रियों में डर और नाराजगी दोनों दिखाई दी. कई यात्रियों ने कहा कि रेलवे को सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत करनी चाहिए. वहीं कुछ लोगों ने रेलवे कर्मचारियों और दमकल विभाग की तेजी से कार्रवाई की सराहना भी की.
विशेषज्ञों का मानना है कि Indian Railway Safety को मजबूत करने के लिए नियमित ऑडिट, कोच में आधुनिक फायर अलार्म सिस्टम और इमरजेंसी रिस्पॉन्स को बेहतर बनाना बेहद जरूरी है. फिलहाल इस घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन इसने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की चुनौतियों को एक बार फिर सामने ला दिया है.
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