Crude Oil Prices Surge: अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ग्लोबल सप्लाई को लेकर गहराती चिंताओं के बीच Crude Oil Prices Surge ने भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। घरेलू वायदा बाजार मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। मंगलवार को जून डिलीवरी वाले क्रूड ऑयल का भाव 226 रुपये की तेज छलांग के साथ 10,150 रुपये प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है।
लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले दिनों में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। Crude Oil Prices Surge का सीधा असर आम आदमी की जेब, ट्रांसपोर्ट सेक्टर और महंगाई पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की बेचैनी
विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से आया है। पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ने से तेल सप्लाई बाधित होने का खतरा गहरा गया है। खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरों ने बाजार में डर पैदा कर दिया है।
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होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से में सप्लाई होने वाला तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ता है। यही वजह है कि Crude Oil Prices Surge को लेकर निवेशक और कारोबारी बेहद सतर्क नजर आ रहे हैं।
MCX में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा Crude Oil
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर कच्चे तेल के भाव में मंगलवार को 2.3 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली। जून डिलीवरी वाला क्रूड ऑयल 10,150 रुपये प्रति बैरल के नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। यह लगातार तीसरा दिन है जब घरेलू बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू वायदा बाजार में तेजी की सबसे बड़ी वजह ग्लोबल सप्लाई को लेकर चिंता और जियो पॉलिटिकल रिस्क है। Crude Oil Prices Surge के कारण ऊर्जा कंपनियों की लागत बढ़ने लगी है, जिसका असर आने वाले समय में उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है।
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इंटरनेशनल मार्केट में थोड़ी नरमी, लेकिन खतरा बरकरार
हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में मंगलवार को कुछ नरमी देखने को मिली। जुलाई डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड करीब 2 प्रतिशत गिरकर 110.32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI भी 1 प्रतिशत फिसलकर 103.45 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई टालने के बयान के बाद बाजार में थोड़ी राहत जरूर आई है। ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, कतर और UAE की अपील के बाद सैन्य हमले की योजना को फिलहाल रोक दिया गया है। इससे निवेशकों को उम्मीद जगी कि कूटनीतिक बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है।
इसके बावजूद बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि ईरान की ओर से किसी ठोस समझौते का संकेत नहीं मिला है। यही कारण है कि Crude Oil Prices Surge का दबाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
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क्या फिर महंगा होगा Petrol-Diesel?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि Crude Oil Prices Surge के कारण तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ रहा है। अगर सरकार टैक्स में राहत नहीं देती या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें कम नहीं होतीं, तो आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल महंगा होना लगभग तय माना जा रहा है।
इसका असर केवल ईंधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ट्रांसपोर्ट महंगा होने से खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भी तेजी आ सकती है। यानी Crude Oil Prices Surge महंगाई को और बढ़ा सकता है।
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रूसी तेल से मिल सकती है अस्थायी राहत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने पहले से लदे रूसी तेल के टैंकरों की बिक्री को अस्थायी मंजूरी दी है। इससे सप्लाई के मोर्चे पर कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिक सकती।
कोटक नियो जैसी ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि यदि होर्मुज स्ट्रेट में तनाव जारी रहता है और पश्चिम एशिया की स्थिति नहीं सुधरती, तो Crude Oil Prices Surge आगे भी बना रह सकता है। ऐसे में तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता लंबे समय तक देखने को मिल सकती है।
आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी का असर सीधे आम आदमी की जिंदगी पर पड़ सकता है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा, जिससे खाने-पीने की चीजों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक सब कुछ महंगा हो सकता है।
इसके अलावा एयरलाइन सेक्टर, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री पर भी इसका असर पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो Crude Oil Prices Surge आने वाले महीनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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