Heatwave in India: देश इस समय भीषण गर्मी की गिरफ्त में है और हालात ऐसे बन चुके हैं कि मैदानों से लेकर पहाड़ों तक तापमान नए रिकॉर्ड तोड़ रहा है। राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों में Heatwave in India का असर लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बांदा में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जबकि पहाड़ी शहर श्रीनगर, मसूरी, नैनीताल और शिमला में भी सामान्य से कहीं ज्यादा गर्मी दर्ज की जा रही है। मौसम विभाग ने कई राज्यों में रेड और ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार Heatwave in India केवल एक सामान्य मौसमी बदलाव नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन, घटती हरियाली, कमजोर पश्चिमी विक्षोभ और अल नीनो जैसी वैश्विक परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव है। यही वजह है कि गर्मी का असर अब केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है।
दुनिया के सबसे गर्म शहरों में भारत का दबदबा
ग्लोबल तापमान मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म्स के आंकड़ों के अनुसार दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में इस समय अधिकांश शहर भारत के हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई शहरों में तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है। बांदा सबसे गर्म शहर के रूप में सामने आया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बुंदेलखंड क्षेत्र में तेजी से घटती हरियाली Heatwave in India को और खतरनाक बना रही है। बांदा, चित्रकूट, झांसी और ललितपुर जैसे जिलों में ग्रीन कवर लगातार कम हुआ है। जंगलों और पेड़ों की कमी के कारण धरती की सतह तेजी से गर्म हो रही है और दिन के साथ रात में भी तापमान कम नहीं हो पा रहा।
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खनन और सूखी नदियां बढ़ा रही हैं संकट
बुंदेलखंड और आसपास के इलाकों में अवैध और अत्यधिक खनन भी बढ़ती गर्मी की बड़ी वजह माना जा रहा है। पर्यावरण विशेषज्ञों के मुताबिक सूखी नदियों और खनन क्षेत्रों से सूर्य की किरणों का रिफ्लेक्शन अधिक हो रहा है। इससे बैक रेडिएशन बढ़ रहा है और आसपास का तापमान तेजी से ऊपर जा रहा है।
पहाड़ों के कटान और जंगलों की कमी की वजह से गर्म हवाएं सीधे मैदानी इलाकों में पहुंच रही हैं। यही कारण है कि Heatwave in India इस बार पहले की तुलना में ज्यादा आक्रामक दिखाई दे रही है।
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पहाड़ों में भी नहीं मिल रही राहत
आमतौर पर लोग गर्मियों में राहत पाने के लिए पहाड़ों की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस बार पहाड़ी राज्य भी गर्मी की चपेट में हैं। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि ऊना में पारा 41 डिग्री तक पहुंच गया।
उत्तराखंड के मसूरी और नैनीताल जैसे पर्यटन स्थलों में भी तापमान लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम का पैटर्न तेजी से बदला है और अब पहाड़ों में भी Heatwave in India का असर साफ दिखाई देने लगा है।
अल नीनो बना बड़ी वजह
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार Heatwave in India के पीछे सबसे बड़ी वजह अल नीनो है। अल नीनो ऐसी स्थिति होती है जब प्रशांत महासागर की सतह सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाती है। इससे दुनिया भर में हवा और बारिश का पैटर्न बदल जाता है।
भारत में इसका सीधा असर मानसून और तापमान पर पड़ता है। अल नीनो की वजह से इस बार गर्म हवाएं ज्यादा सक्रिय हैं और नमी वाली हवाओं का प्रभाव कम हो गया है। इसी कारण तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
कमजोर Western Disturbance से नहीं हो रही बारिश
मार्च से मई के बीच उत्तर भारत में Western Disturbance यानी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहता है। इसकी वजह से हल्की बारिश और आंधी आती है, जिससे तापमान में गिरावट होती है। लेकिन इस बार Western Disturbance काफी कमजोर रहा है।
बारिश नहीं होने की वजह से जमीन लगातार गर्म होती जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में भी बड़े स्तर पर बारिश की संभावना कम दिखाई दे रही है, जिससे Heatwave in India का असर और बढ़ सकता है।
Urban Heat Island बन रहा नई चुनौती
विशेषज्ञों ने शहरों में तेजी से बढ़ रहे Urban Heat Island Effect को भी गर्मी की बड़ी वजह बताया है। शहरों में कंक्रीट की इमारतें, चौड़ी सड़कें, वाहन और एयर कंडीशनर से निकलने वाली गर्म हवा तापमान को लगातार बढ़ा रही है।
दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, लखनऊ और जयपुर जैसे बड़े शहरों में यह असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक शहरों में तापमान ग्रामीण इलाकों की तुलना में 5 से 7 डिग्री ज्यादा दर्ज किया जा रहा है।
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बिजली की मांग और स्वास्थ्य संकट बढ़ा
Heatwave in India का असर लोगों की सेहत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रोक और ब्लड प्रेशर से जुड़े मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने और अधिक पानी पीने की सलाह दी है। वहीं बिजली की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। लगातार AC और कूलर चलने की वजह से कई राज्यों में बिजली खपत तेजी से बढ़ी है।
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मानसून से ही मिलेगी राहत
मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि Heatwave in India से वास्तविक राहत केवल मानसून के सक्रिय होने के बाद ही मिल पाएगी। हालांकि इस बार मानसून को लेकर भी चिंता बनी हुई है। कुछ निजी मौसम एजेंसियों ने संकेत दिए हैं कि मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है।
अगर मानसून कमजोर रहा तो गर्मी का असर लंबे समय तक बना रह सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ अब हरियाली बढ़ाने, जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत मान रहे हैं।
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