Gold Import Bill: भारत में सोना सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि भरोसे, परंपरा और आर्थिक सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। शादी-ब्याह से लेकर निवेश तक, भारतीय परिवारों में Gold की खास अहमियत है। लेकिन अब यही Gold देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा दबाव भी बना रहा है। बढ़ते Gold Import Bill को लेकर वित्तीय विशेषज्ञ लगातार चिंता जता रहे हैं। इसी बीच आनंद राठी वेल्थ के CEO फिरोज अज़ीज़ ने लोगों से अपील की है कि वे अपने घरों में रखा थोड़ा-सा निष्क्रिय सोना बेचकर देश की अर्थव्यवस्था को सहारा दें।
उनका कहना है कि अगर भारतीय परिवार अपने कुल Gold Holdings का सिर्फ 2 से 4 फीसदी हिस्सा भी बाजार में वापस लाएं, तो इससे भारत का Import Bill कम हो सकता है, रुपये को मजबूती मिल सकती है और विदेशी मुद्रा पर दबाव घट सकता है। यह विचार अब आर्थिक और निवेश जगत में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
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Gold Import Bill क्यों बना चिंता का कारण?
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। हर साल बड़ी मात्रा में Gold Import किया जाता है। इसका सीधा असर देश के Current Account Deficit और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
फिरोज अज़ीज़ के मुताबिक कुछ साल पहले तक भारत का Gold Import Bill करीब 35 अरब डॉलर के आसपास था, लेकिन अब यह बढ़कर लगभग 75 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। इसका मतलब यह है कि भारत को विदेशों से सोना खरीदने के लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ रहे हैं।
जब किसी देश का Import लगातार बढ़ता है और Export उस अनुपात में नहीं बढ़ पाता, तो स्थानीय मुद्रा पर दबाव आता है। यही वजह है कि बढ़ते Gold Import को रुपये की कमजोरी और आर्थिक असंतुलन से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
घरों में पड़ा है अरबों डॉलर का सोना
विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारतीय परिवारों के पास लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का Gold मौजूद है। इसका बड़ा हिस्सा लॉकरों, तिजोरियों और घरों में निष्क्रिय पड़ा रहता है।
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यानी यह Gold अर्थव्यवस्था में सक्रिय रूप से इस्तेमाल नहीं हो रहा। अगर इसी Gold का थोड़ा हिस्सा भी बाजार में वापस आता है, तो नए आयात की जरूरत कम हो सकती है।
फिरोज अज़ीज़ का मानना है कि लोगों को पूरा Gold बेचने की जरूरत नहीं है। सिर्फ छोटा-सा हिस्सा बेचकर भी बड़ा आर्थिक असर पैदा किया जा सकता है।
100 Gram Gold बेचने का पूरा कैलकुलेशन
फिरोज अज़ीज़ ने अपनी बात को आसान तरीके से समझाने के लिए एक उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी Anand Rathi Wealth के पास लगभग 13,800 परिवार ग्राहक हैं। अगर हर परिवार केवल 100 Gram Gold बेचता है, तो कुल Gold की मात्रा लगभग 13.8 लाख ग्राम यानी 1,380 किलो हो जाएगी।
अगर मौजूदा बाजार कीमत के हिसाब से Gold की कीमत लगभग 9,000 से 10,000 रुपये प्रति ग्राम मानी जाए, तो यह रकम करीब 2,500 करोड़ से 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।
यानी सिर्फ सीमित संख्या में परिवारों द्वारा थोड़ा-सा Gold बेचने से हजारों करोड़ रुपये की Liquidity बाजार में आ सकती है। यदि यह मॉडल बड़े स्तर पर अपनाया जाए, तो देश के Import Bill में भी उल्लेखनीय कमी संभव है।
क्या सोना बेचना सही फैसला हो सकता है?
कई निवेशकों के मन में यह सवाल उठ सकता है कि क्या Gold बेच देना समझदारी होगी? विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह निवेश रणनीति पर निर्भर करता है।
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पिछले कुछ वर्षों में Gold Prices रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचे हैं। ऐसे में जिन्होंने लंबे समय पहले Gold खरीदा था, उन्हें अच्छा Profit मिल सकता है। निवेश विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस तरह शेयर बाजार में सही समय पर Profit Booking की जाती है, उसी तरह Gold में भी समय-समय पर मुनाफावसूली जरूरी होती है।
फिरोज अज़ीज़ का कहना है कि यह त्याग नहीं, बल्कि Financial Planning का हिस्सा होना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति अपने कुल Gold Investment का छोटा हिस्सा बेचता है, तो इससे उसके Portfolio Diversification में भी मदद मिल सकती है।
Mutual Funds और Financial Assets की ओर बढ़ रहा रुझान
भारत में अब निवेशकों की सोच तेजी से बदल रही है। पहले लोग बचत के लिए मुख्य रूप से Gold, जमीन और Bank FD पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब Mutual Funds, SIP और Stock Market जैसे Financial Assets लोकप्रिय हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर रिटर्न, आसान Liquidity और डिजिटल निवेश सुविधाओं ने लोगों को Financial Markets की ओर आकर्षित किया है। यही वजह है कि कई निवेशक अब Gold Holdings कम करके अपने पैसे को Equity और Mutual Funds में Diversify कर रहे हैं।
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सरकार से Tax Relief की मांग
फिरोज अज़ीज़ ने सरकार से यह मांग भी की है कि Gold Transactions पर कुछ समय के लिए Capital Gains Tax में राहत दी जाए।
उनका मानना है कि अगर टैक्स बोझ कम होगा, तो लोग आसानी से अपना पुराना Gold बेचने के लिए तैयार होंगे। इससे बाजार में Gold Supply बढ़ सकती है और Import की जरूरत घट सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर सरकार Gold Monetisation और Tax Benefits जैसी योजनाओं को और आकर्षक बनाती है, तो निष्क्रिय सोना अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी संपत्ति बन सकता है।
अर्थव्यवस्था को मिल सकता है बड़ा सहारा
भारत जैसे देश में जहां लाखों करोड़ रुपये मूल्य का Gold घरों में रखा हुआ है, वहां उसका सीमित उपयोग भी अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
अगर Gold Import कम होता है, तो Current Account Deficit नियंत्रित रहेगा, रुपये पर दबाव कम होगा और विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में Gold Investment को लेकर लोगों की सोच और रणनीति दोनों बदल सकती हैं। अब केवल सोना खरीदना ही नहीं, बल्कि सही समय पर उसका उपयोग और प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाएगा।
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