Petrol Diesel Price Hike ने देशभर में एक बार फिर आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली समेत कई शहरों में पेट्रोल और डीजल के दामों में नई बढ़ोतरी की गई है। ताजा बदलाव के बाद पेट्रोल 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल 91 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया है। मई महीने में यह तीसरी बार है जब ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ है।
लगातार बढ़ती Fuel Prices का असर अब आम आदमी की जेब पर साफ दिखाई देने लगा है। वाहन चलाने की लागत बढ़ने के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
मई में तीसरी बार बढ़े ईंधन के दाम
देश में इस महीने लगातार तीसरी बार Petrol Diesel Price Hike देखने को मिली है। इससे पहले तेल कंपनियों ने कुछ दिन पहले 3 रुपये प्रति लीटर तक कीमतें बढ़ाई थीं। इसके बाद इसी सप्ताह करीब 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा किया गया था।
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अब नई बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले समय में और महंगाई देखने को मिल सकती है।
Crude Oil Prices बनी बड़ी वजह
Petrol Diesel Price Hike की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में Crude Oil Prices में तेजी को माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती अनिश्चितता का असर ग्लोबल ऑयल मार्केट पर साफ दिखाई दे रहा है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 104 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुकी है, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी लगभग 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार करता दिखा। विशेषज्ञों का कहना है कि जियो-पॉलिटिकल तनाव के कारण सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर घरेलू Fuel Prices पर पड़ता है।
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तेल कंपनियों पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन अब लगातार बढ़ते Crude Oil Prices के कारण कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है।
सरकार के अनुसार तेल कंपनियों को हर महीने करीब 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था। यही वजह है कि अब कंपनियों ने चरणबद्ध तरीके से कीमतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदकर काफी राहत हासिल की थी। हालांकि अब वैश्विक बाजार में बढ़ती कीमतों और सप्लाई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण वह फायदा भी सीमित होता नजर आ रहा है।
महंगाई पर पड़ सकता है बड़ा असर
Petrol Diesel Price Hike का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। जब ईंधन महंगा होता है तो ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट भी बढ़ जाती है। इसका सीधा असर फल-सब्जियों, राशन, दूध और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में महंगाई दर में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। खासकर मध्यम वर्ग और छोटे कारोबारियों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है।
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लंबी दूरी तक माल ढुलाई करने वाले ट्रक ऑपरेटरों और ट्रांसपोर्ट कंपनियों की लागत बढ़ने से बाजार में सामान महंगा होने की संभावना बढ़ गई है।
आम लोगों की बढ़ी चिंता
लगातार बढ़ती Fuel Prices ने आम लोगों का घरेलू बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। रोजाना ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, टैक्सी ड्राइवर, ऑटो चालक और छोटे व्यवसायी इस बढ़ोतरी से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
दिल्ली, मुंबई, देहरादून और अन्य बड़े शहरों में लोग पहले ही महंगी बिजली, गैस और खाद्य पदार्थों की कीमतों से परेशान हैं। अब पेट्रोल और डीजल के नए दामों ने अतिरिक्त बोझ बढ़ा दिया है। कई लोगों का कहना है कि अगर इसी तरह ईंधन महंगा होता रहा तो घरेलू खर्चों को संभालना और मुश्किल हो जाएगा।
सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
विशेषज्ञ मानते हैं कि केंद्र सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती Crude Oil Prices हैं, वहीं दूसरी तरफ घरेलू महंगाई को नियंत्रित रखने का दबाव भी बना हुआ है।
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अगर तेल की कीमतों में और तेजी आती है तो सरकार को टैक्स कटौती या अन्य राहत उपायों पर विचार करना पड़ सकता है। हालांकि इससे सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ सकता है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि आने वाले कुछ हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण होंगे। अगर वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ तो भारत में Fuel Prices में और इजाफा देखने को मिल सकता है।
लोगों को राहत मिलने की उम्मीद कब?
फिलहाल बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Crude Oil Prices स्थिर नहीं होतीं, तब तक Petrol Diesel Price Hike का दबाव बना रह सकता है।
हालांकि अगर वैश्विक हालात सुधरते हैं और कच्चे तेल की सप्लाई सामान्य होती है, तो भविष्य में कीमतों में राहत मिल सकती है। फिलहाल आम लोगों की नजरें सरकार और तेल कंपनियों के अगले फैसलों पर टिकी हुई हैं।
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