Ram Rahim Parole News: हरियाणा सरकार द्वारा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख Gurmeet Ram Rahim Singh को एक बार फिर पैरोल दिए जाने के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। रेप और हत्या जैसे गंभीर मामलों में सजा काट रहे राम रहीम को 30 दिनों की पैरोल मिलने के बाद विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने सरकार और न्याय व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं।
Ram Rahim Parole News एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह लगातार 16वीं बार है जब डेरा प्रमुख को जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है। आलोचकों का कहना है कि एक आम कैदी को इतनी बार राहत मिलना लगभग असंभव होता है, जबकि समर्थक इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं।
भारी सुरक्षा के बीच जेल से निकला राम रहीम
मंगलवार को रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आते ही राम रहीम को पंजाब और हरियाणा पुलिस के कड़े सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। सुरक्षा व्यवस्था इतनी सख्त थी कि पूरे इलाके में पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई।
इसके बाद उसे सीधे सिरसा स्थित Dera Sacha Sauda मुख्यालय ले जाया गया। प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए यह कदम उठाया गया। Ram Rahim Parole News के सामने आते ही सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर एक दोषी कैदी को इतनी बार पैरोल क्यों दी जा रही है।
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किन मामलों में सजा काट रहा है राम रहीम?
गुरमीत राम रहीम सिंह साल 2017 से जेल में बंद है। उसे दो साध्वियों से दुष्कर्म के मामलों में 10-10 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में भी उसे उम्रकैद की सजा मिली हुई है।
इन गंभीर मामलों में दोषी ठहराए जाने के बावजूद लगातार पैरोल मिलना हमेशा विवादों का कारण बना रहा है। Ram Rahim Parole News को लेकर हर बार यह सवाल उठता है कि क्या प्रभावशाली लोगों के लिए कानून का रवैया अलग होता है।
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2020 से अब तक कई बार मिली राहत
यदि पिछले कुछ वर्षों का रिकॉर्ड देखा जाए तो राम रहीम को लगातार पैरोल और फरलो का लाभ मिलता रहा है। अक्टूबर 2020 से लेकर मई 2026 तक उसे 16 बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिल चुकी है। जनवरी 2026 में भी उसे 40 दिनों की पैरोल दी गई थी। उस दौरान वह सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहा था। अब एक बार फिर 30 दिनों की पैरोल मिलने से विवाद गहरा गया है।
Ram Rahim Parole News को लेकर विपक्षी दलों का कहना है कि चुनावी और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यह फैसले लिए जाते हैं। हालांकि सरकार इन आरोपों को खारिज करती रही है।
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विपक्ष ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
हरियाणा सरकार पर लंबे समय से यह आरोप लगते रहे हैं कि वह डेरा प्रमुख के प्रति नरम रुख अपनाती है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि एक सामान्य कैदी को इतनी आसानी से पैरोल नहीं मिलती, लेकिन राम रहीम को बार-बार राहत देना कई सवाल खड़े करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी हैं। ऐसे में Ram Rahim Parole News को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। हालांकि सरकार का कहना है कि पैरोल देना पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत होता है और इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है।
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सामाजिक संगठनों ने जताई नाराजगी
महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि रेप और हत्या जैसे गंभीर अपराधों में दोषी व्यक्ति को बार-बार राहत देना पीड़ितों और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए गलत संदेश देता है।
कुछ संगठनों ने यह भी कहा कि Ram Rahim Parole News देश की न्याय प्रणाली पर लोगों के भरोसे को कमजोर करता है। उनका तर्क है कि यदि गंभीर अपराधों में दोषी लोगों को लगातार राहत मिलती रही तो इससे कानून के प्रति जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है।
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समर्थकों में खुशी का माहौल
दूसरी तरफ डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों में खुशी का माहौल देखने को मिला। सिरसा मुख्यालय के आसपास समर्थकों की हलचल बढ़ गई। हालांकि प्रशासन ने भीड़ जुटाने पर निगरानी रखी और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए।
समर्थकों का कहना है कि राम रहीम को कानूनी अधिकारों के तहत पैरोल मिली है और इसमें कोई गलत बात नहीं है। Ram Rahim Parole News के बाद डेरा समर्थकों ने सोशल मीडिया पर भी खुशी जाहिर की और इसे “मानवता के संदेश” से जोड़कर प्रचारित करना शुरू कर दिया।
कानूनी प्रक्रिया पर फिर शुरू हुई बहस
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि पैरोल और फरलो भारतीय जेल नियमों का हिस्सा हैं, लेकिन किसी दोषी को कितनी बार राहत मिलती है, यह हमेशा बहस का विषय रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार पैरोल का उद्देश्य कैदियों को सामाजिक और पारिवारिक जीवन से जोड़कर रखना होता है, लेकिन जब किसी हाई-प्रोफाइल दोषी को बार-बार यह सुविधा मिलती है तो सवाल उठना स्वाभाविक है। Ram Rahim Parole News ने एक बार फिर देश में जेल सुधार, पैरोल नीति और न्यायिक पारदर्शिता पर चर्चा को तेज कर दिया है।
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आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है विवाद
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गर्मा सकता है। विपक्ष इस मामले को जनता के बीच उठाने की तैयारी में है, जबकि सरकार इसे पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया बता रही है।
फिलहाल, Ram Rahim Parole News ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या देश में सभी कैदियों के लिए कानून समान रूप से लागू होता है या प्रभावशाली लोगों को विशेष सुविधाएं मिलती हैं।
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