Eco Tourism: Tourists enjoying nature and wildlife experiences at Dehradun Zoo and Lachhiwala Nature Park.
Eco Tourism: देवभूमि उत्तराखंड लंबे समय से चारधाम यात्रा, धार्मिक पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए देश-दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। लेकिन अब राज्य की पहचान केवल तीर्थ पर्यटन तक सीमित नहीं रह गई है। पिछले कुछ वर्षों में Eco Tourism के क्षेत्र में हुए विकास और नई योजनाओं ने उत्तराखंड को प्रकृति आधारित पर्यटन का बड़ा केंद्र बना दिया है। जंगलों, वन्यजीवों, नेचर पार्कों और प्राकृतिक स्थलों की ओर पर्यटकों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है, जिसका असर अब आंकड़ों में भी साफ दिखाई देने लगा है।
हाल ही में देहरादून जू और लच्छीवाला नेचर पार्क में दर्ज हुई रिकॉर्ड पर्यटक संख्या इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड में Eco Tourism लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। वन विभाग की ओर से विकसित की गई सुविधाओं और बेहतर प्रबंधन ने पर्यटकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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चारधाम यात्रा के साथ Eco Tourism स्थलों की भी बढ़ी लोकप्रियता
इस वर्ष चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचे। लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि बड़ी संख्या में पर्यटकों ने धार्मिक स्थलों के साथ-साथ Eco Tourism डेस्टिनेशन का भी रुख किया। राज्य सरकार और वन विभाग द्वारा पिछले कुछ वर्षों में प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई थीं।
वन क्षेत्रों में नेचर ट्रेल्स, जंगल सफारी, बर्ड वॉचिंग, वन विश्राम गृहों का आधुनिकीकरण और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन गतिविधियों ने लोगों को आकर्षित किया। यही वजह है कि अब उत्तराखंड केवल धार्मिक यात्रा का केंद्र नहीं बल्कि Eco Tourism हब के रूप में भी तेजी से उभर रहा है।
देहरादून जू ने बनाया नया इतिहास
उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय Eco Tourism स्थलों में शामिल देहरादून जू ने इस वर्ष पर्यटक संख्या और राजस्व दोनों मामलों में नए रिकॉर्ड बनाए हैं।
वर्ष 2023 में 18 जून को एक दिन में 8,065 पर्यटक चिड़ियाघर पहुंचे थे और उस दिन 5.21 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था। उस समय इसे ऐतिहासिक उपलब्धि माना गया था।
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इसके बाद 8 जून 2025 को 7,789 पर्यटक पहुंचे और राजस्व 6.03 लाख रुपये तक पहुंच गया। हालांकि संख्या कम थी, लेकिन आय के मामले में यह नया रिकॉर्ड बन गया था।
4 जनवरी 2026 को देहरादून जू में 8,662 पर्यटकों की एंट्री दर्ज की गई और 5.44 लाख रुपये की आय हुई। इसके बाद 22 मार्च 2026 को पहली बार पर्यटकों की संख्या 10 हजार के आंकड़े को पार कर गई। उस दिन कुल 10,148 पर्यटक पहुंचे और 6.76 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
लेकिन 14 जून 2026 को सभी पुराने रिकॉर्ड टूट गए। रविवार को देहरादून जू में कुल 10,621 पर्यटक पहुंचे और एक ही दिन में 7.09 लाख रुपये की रिकॉर्ड आय दर्ज की गई। यह अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है।
लच्छीवाला नेचर पार्क भी बना पर्यटकों की पहली पसंद
देहरादून स्थित लच्छीवाला नेचर पार्क भी Eco Tourism की सफलता की एक बड़ी मिसाल बनकर सामने आया है। प्राकृतिक वातावरण, जंगलों के बीच बने वॉटर पूल और शांत माहौल के कारण यह स्थान स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहरी पर्यटकों की भी पसंद बन चुका है।
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14 जून 2026 को लच्छीवाला नेचर पार्क में भी रिकॉर्ड संख्या में लोग पहुंचे। एक ही दिन में 7,322 पर्यटकों ने यहां भ्रमण किया। इससे वन विभाग को लगभग 5.90 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ।
इससे पहले यहां एक दिन में लगभग 5,500 पर्यटकों के पहुंचने का रिकॉर्ड था, लेकिन इस बार पर्यटकों की संख्या ने पुराने सभी आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया। यह स्पष्ट संकेत है कि उत्तराखंड में Eco Tourism का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिल रहा बड़ा फायदा
विशेषज्ञों का मानना है कि Eco Tourism केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रहा है। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से होटल व्यवसाय, होमस्टे, स्थानीय परिवहन, हस्तशिल्प और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिल रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित पर्यटन स्थलों के आसपास रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। स्थानीय युवाओं को गाइड, प्रकृति व्याख्याकार, रिसॉर्ट कर्मचारी और पर्यटन सेवाओं से जुड़े अन्य कार्यों में रोजगार मिल रहा है। वन विभाग का मानना है कि आने वाले वर्षों में Eco Tourism राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
बढ़ती भीड़ के साथ बढ़ रही चुनौतियां
हालांकि पर्यटकों की बढ़ती संख्या उत्साहजनक है, लेकिन इसके साथ कई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। वन विभाग के मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) पीके पात्रो के अनुसार बड़ी संख्या में आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।
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साफ-सफाई, पार्किंग, पेयजल, शौचालय, सुरक्षा और यातायात जैसी व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाने की जरूरत है। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि बढ़ते Eco Tourism का पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रकृति संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
उत्तराखंड में Eco Tourism की अपार संभावनाएं
उत्तराखंड के जंगल, वन्यजीव, हिमालयी परिदृश्य, नदियां और जैव विविधता इसे Eco Tourism के लिए आदर्श राज्य बनाते हैं। यही कारण है कि वन विभाग नए इको टूरिज्म डेस्टिनेशन विकसित करने पर लगातार काम कर रहा है।
देहरादून के अलावा नैनीताल, पौड़ी, टिहरी, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी जैसे जिलों में भी Eco Tourism गतिविधियों को विस्तार दिया जा रहा है। कई वन विश्राम गृहों को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है ताकि पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिल सके।
भविष्य में और बढ़ेगा Eco Tourism का दायरा
राज्य सरकार और वन विभाग की योजनाओं को देखते हुए माना जा रहा है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड देश के प्रमुख Eco Tourism राज्यों में शामिल हो सकता है। बढ़ती पर्यटक संख्या इस दिशा में सकारात्मक संकेत दे रही है।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ यदि पर्यटन विकास का संतुलन कायम रखा गया, तो उत्तराखंड न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक विकास का माध्यम भी साबित होगा। वर्तमान आंकड़े यही संकेत दे रहे हैं कि राज्य में Eco Tourism अब एक नई पर्यटन क्रांति का रूप ले रहा है।
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