Rajasthan CM Bhajan Lal Sharma announcing the renaming of Mount Abu to Aburaj during a public event in Sirohi district.
Mount Abu Renamed: राजस्थान की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा एक बड़ा फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने घोषणा की है कि राज्य के एकमात्र हिल स्टेशन माउंट आबू का नाम अब ‘अबूराज’ रखा जाएगा। इस फैसले को राज्य सरकार ने स्थानीय जनभावनाओं, संत समाज की मांग और क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत से जोड़कर देखा है। Mount Abu Renamed का यह निर्णय न केवल प्रशासनिक बदलाव माना जा रहा है, बल्कि इसे सांस्कृतिक गौरव को पुनर्स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी बताया जा रहा है।
संत सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने की घोषणा
सिरोही जिले में आयोजित संत सम्मेलन और आभार सभा के दौरान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी स्थान का नाम बदलने का मामला नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की परंपराओं, लोक आस्था और आध्यात्मिक धरोहर को सम्मान देने का प्रयास है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘अबूराज’ नाम सदियों पुरानी मान्यताओं और स्थानीय इतिहास से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से संत समाज और क्षेत्र के लोगों की यह मांग थी कि माउंट आबू को उसकी मूल सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप नया नाम दिया जाए। Mount Abu Renamed के इस फैसले से स्थानीय लोगों में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।
स्थानीय भावनाओं और परंपराओं का सम्मान
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ विरासत संरक्षण की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि “अबू पर्वत केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का केंद्र है। ऐसे में ‘अबूराज’ नाम क्षेत्र की वास्तविक पहचान को सामने लाने का माध्यम बनेगा।”
उन्होंने कहा कि सरकार की सोच “विरासत भी, विकास भी” के सिद्धांत पर आधारित है और Mount Abu Renamed का निर्णय इसी सोच का हिस्सा है।
भारतीय पहचान को मजबूत करने की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में चल रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश में कई ऐसे फैसले लिए गए हैं, जिनका उद्देश्य भारतीय पहचान और राष्ट्रीय गौरव को मजबूत करना है।
उन्होंने नई दिल्ली में राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ किए जाने और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कई द्वीपों के नामों में बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे कदम औपनिवेशिक सोच से बाहर निकलकर भारतीय मूल्यों को स्थापित करने का प्रयास हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि Mount Abu Renamed का फैसला भी इसी व्यापक सोच का हिस्सा माना जा सकता है।
सिरोही जिले को मिली विकास परियोजनाओं की सौगात
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सिरोही जिले को विकास की बड़ी सौगात भी मिली। उन्होंने करीब 74 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 41 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।
इन परियोजनाओं में सड़क निर्माण, पुलिस प्रशासनिक भवन, उप स्वास्थ्य केंद्र, छात्रावास और जनसुविधाओं से जुड़े कई विकास कार्य शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं से क्षेत्र के लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और विकास की गति तेज होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि Mount Abu Renamed के साथ-साथ इन विकास योजनाओं से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
पर्यटन और निवेश का नया केंद्र बनेगा अबूराज
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सरकार अबूराज को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में काम करेगी। इसके लिए आधारभूत ढांचे को मजबूत करने, आधुनिक सुविधाओं का विस्तार करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अबूराज पर्यटन, निवेश और रोजगार का नया केंद्र बन सकता है। सरकार का उद्देश्य है कि यहां आने वाले पर्यटकों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। Mount Abu Renamed के बाद पर्यटन क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा होने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विशेष कार्यक्रम का ऐलान
मुख्यमंत्री ने योग को भारत की प्राचीन धरोहर बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है। उन्होंने घोषणा की कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अबूराज में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र के आध्यात्मिक और पर्यटन महत्व को और बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि योग और आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देकर अबूराज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सकती है।
संत समाज ने जताया आभार
कार्यक्रम में मौजूद संत-महात्माओं और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ‘अबूराज’ नाम इस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
संत समाज का कहना है कि Mount Abu Renamed का फैसला आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं और विरासत से जोड़ने में मदद करेगा। कार्यक्रम में राज्य सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे।
सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जा रहा फैसला
विशेषज्ञों के अनुसार, Mount Abu Renamed केवल नाम परिवर्तन का मामला नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक पहचान, क्षेत्रीय भावनाओं और राजनीतिक संदेश से भी जुड़ा हुआ है। इससे एक ओर स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने विरासत संरक्षण के अपने संकल्प को भी स्पष्ट किया है। आने वाले समय में यह फैसला राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और पर्यटन विकास दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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