Ram Temple Donation Row: Champat Rai resigns as Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust General Secretary amid Ram Temple Donation Row in Ayodhya following SIT investigation.
Ram Temple Donation Row: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में कथित नकद दान गबन मामले ने नया मोड़ ले लिया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर अपने इस्तीफे सौंप दिए हैं। यह कदम उत्तर प्रदेश सरकार की विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट और कथित धन गबन के मामले में दर्ज एफआईआर के बाद सामने आया है। मामले ने धार्मिक, प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।
नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा
Ram Temple Donation Row के बीच ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आधिकारिक पुष्टि के अनुसार दोनों ने नैतिक आधार पर पद छोड़ा है। हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में उनके खिलाफ किसी आपराधिक आरोप या एफआईआर दर्ज होने की पुष्टि नहीं की गई है। इस्तीफा ऐसे समय आया है जब मंदिर में नकद दान के कथित गबन की जांच तेज हो चुकी है।
क्या है पूरा कथित दान गबन मामला?
Ram Temple Donation Row की जांच के दौरान सामने आए आरोपों के अनुसार लगभग 7 से 7.5 करोड़ रुपये की नकद राशि में कथित अनियमितता की आशंका जताई गई है। इस मामले में पुलिस ने चोरी, आपराधिक न्यासभंग (Criminal Breach of Trust), चोरी की संपत्ति प्राप्त करने और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज की है।
एफआईआर में आठ आरोपियों के नाम शामिल हैं। इनमें छह ऐसे कर्मचारी बताए गए हैं जो मंदिर में दान पेटियों से प्राप्त नकदी की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े थे। पुलिस के अनुसार आरोपियों को कथित रूप से सीसीटीवी फुटेज के आधार पर गिरफ्तार किया गया है। मामले की जांच जारी है और अदालत में आरोप अभी सिद्ध होना बाकी है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट संदेश
Ram Temple Donation Row पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया था कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई शुरू की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है और सरकार का उद्देश्य “सत्य और असत्य को अलग करना” है।
सरकार की ओर से गठित SIT में लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस तथा वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया था। प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपे जाने के बाद जांच आगे बढ़ाई गई।
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विपक्ष ने उठाए जवाबदेही के सवाल
Ram Temple Donation Row ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि एफआईआर में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है जबकि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की जवाबदेही पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दिखाई गई।
समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया कि यदि नैतिक जिम्मेदारी तय की जा रही है तो जवाबदेही सभी संबंधित स्तरों पर समान रूप से तय होनी चाहिए। दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
दान की गिनती कैसे होती है?
Ram Temple Donation Row के संदर्भ में सामने आई जानकारी के अनुसार मंदिर की नकद दान व्यवस्था भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की निगरानी में संचालित होती है। बैंक ने इस कार्य के लिए एक निजी एजेंसी को नियुक्त किया है।
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मंदिर परिसर में चार प्रमुख दान पेटियां स्थापित हैं। नकद राशि की गिनती 14 सदस्यीय टीम करती है, जिसमें 11 बैंक कर्मी और तीन मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यही प्रक्रिया अब जांच एजेंसियों के दायरे में है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कथित अनियमितता किस स्तर पर हुई।
राम मंदिर को कितना मिलता है दान?
Ram Temple Donation Row इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अयोध्या का राम मंदिर देश के सबसे अधिक दान प्राप्त करने वाले धार्मिक स्थलों में शामिल हो चुका है।
ट्रस्ट की उपलब्ध वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में लगभग 327 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई थी। इसमें लगभग 153 करोड़ रुपये दान तथा करीब 173 करोड़ रुपये ब्याज आय शामिल थी। मंदिर में प्रतिदिन औसतन 70,000 से 80,000 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि त्योहारों और विशेष अवसरों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है।
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जांच अभी जारी, अंतिम निष्कर्ष शेष
Ram Temple Donation Row में अब तक हुई कार्रवाई प्रारंभिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित है। पुलिस जांच जारी है तथा अदालत में दोष सिद्ध होना अभी बाकी है। चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को नैतिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है, जबकि उनके विरुद्ध किसी आपराधिक आरोप की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है। मामले की अंतिम स्थिति न्यायिक और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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