Rohini Building Collapse: Rescue teams clearing debris after the Rohini Building Collapse in Delhi, where an under-construction four-storey building collapsed, leaving multiple casualties and triggering a large-scale rescue operation.
Rohini Building Collapse: दिल्ली के रोहिणी इलाके में बुधवार शाम हुआ Rohini Building Collapse राजधानी के लिए एक बड़ा हादसा बनकर सामने आया। निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत के अचानक गिर जाने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहत एवं बचाव कार्य के लिए कई सरकारी एजेंसियों को एक साथ मैदान में उतरना पड़ा।
शाम के समय हुई इस दुर्घटना ने एक बार फिर निर्माणाधीन इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था, निर्माण मानकों और प्रशासनिक निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मलबे में कुछ और लोगों के फंसे होने की आशंका को देखते हुए देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रखा गया।
अचानक भरभराकर गिरी चार मंजिला इमारत
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, निर्माणाधीन इमारत में काम चल रहा था, तभी अचानक पूरी संरचना हिलने लगी और कुछ ही सेकंड में भवन धराशायी हो गया। आसपास मौजूद लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
Rohini Building Collapse की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच गए। क्षेत्र को तत्काल घेराबंदी कर सुरक्षित किया गया ताकि बचाव कार्य में किसी तरह की परेशानी न हो।
घटना के बाद आसपास रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई। कई परिवारों को एहतियात के तौर पर पास की इमारतों से बाहर निकाला गया ताकि किसी संभावित खतरे से बचा जा सके।
Also Read: दिल्ली को मिली 300 नई इलेक्ट्रिक बसें, नरेला में बनेगी हाई-टेक हाई सिक्योरिटी जेल
कई एजेंसियां एक साथ जुटीं
हादसे की गंभीरता को देखते हुए राहत कार्य के लिए कई एजेंसियों को लगाया गया। दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली अग्निशमन सेवा, नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और अन्य आपातकालीन सेवाओं की टीमें मौके पर पहुंचीं।
Rohini Building Collapse के बाद राहत कार्य को युद्धस्तर पर संचालित किया गया। भारी मलबे को हटाने के लिए आधुनिक उपकरणों के साथ जेसीबी मशीनें और हाइड्रा क्रेन भी तैनात की गईं। अधिकारियों के अनुसार प्राथमिक उद्देश्य मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना था।
मलबे से निकाले गए कई लोग
बचाव दल ने घंटों की मशक्कत के बाद कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल लोगों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कुछ की हालत चिंताजनक बताई गई।
Rohini Building Collapse में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। मृतकों में एक व्यक्ति को गंभीर अवस्था में अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन उपचार के दौरान डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। घायलों में कुछ निर्माण मजदूर भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो हादसे के समय भवन के भीतर काम कर रहे थे।
Read: दिल्ली समेत कई राज्यों में मानसून का प्रचंड असर, 10 जुलाई तक लगातार बारिश के संकेत
कैसे चला रातभर रेस्क्यू ऑपरेशन?
राहत कार्य में शामिल अधिकारियों ने बताया कि मलबे के भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई। बचावकर्मियों ने पहले उन स्थानों की पहचान की जहां लोगों के फंसे होने की संभावना अधिक थी।
Rohini Building Collapse के दौरान एक व्यक्ति तक पहुंचने में काफी समय लगा। बचाव दल ने मलबे के बीच रास्ता बनाकर उसे पानी और ऑक्सीजन उपलब्ध कराई। इसके बाद सावधानीपूर्वक उसे बाहर निकाला गया।
रात में अंधेरा होने के बावजूद अभियान को नहीं रोका गया। अतिरिक्त रोशनी, जनरेटर और विशेष उपकरणों की मदद से बचाव कार्य पूरी रात जारी रखा गया।
इमारत के मालिक कौन हैं?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल निर्माणाधीन भवन की स्वामित्व व्यवस्था और निर्माण प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जिस भवन में Rohini Building Collapse हुआ, उसका स्वामित्व दो परिवारों से जुड़ा बताया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि निर्माण कार्य किसकी देखरेख में हो रहा था और क्या सभी आवश्यक अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था।
अधिकारियों का कहना है कि निर्माण से जुड़े दस्तावेजों और स्वीकृतियों की जांच की जाएगी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
Read: DISCOMs के खातों की होगी जांच, बिजली क्षेत्र में जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी
निर्माण मानकों पर फिर उठे सवाल
राजधानी दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई निर्माणाधीन और पुरानी इमारतों के गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे में Rohini Building Collapse ने एक बार फिर भवन सुरक्षा मानकों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शहरी विकास विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों के बीच कई बार सुरक्षा मानकों और तकनीकी निरीक्षणों की अनदेखी की जाती है। इससे मजदूरों और स्थानीय निवासियों की जान जोखिम में पड़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक निर्माणाधीन भवन का नियमित निरीक्षण और संरचनात्मक ऑडिट आवश्यक होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख
दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत एवं बचाव कार्य में किसी प्रकार की कमी न रहे और घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी ताकि Rohini Building Collapse के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके।
Also Read: देश की सबसे चौड़ी 8-लेन टनल जुलाई में होगी शुरू, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर सफर बनेगा और तेज
जांच रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान राहत कार्य और प्रभावित लोगों की सहायता पर केंद्रित है। हालांकि आने वाले दिनों में तकनीकी विशेषज्ञों की टीम इमारत गिरने के कारणों की जांच करेगी।
यह पता लगाया जाएगा कि क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, डिजाइन संबंधी खामी, तकनीकी लापरवाही या किसी अन्य कारण से Rohini Building Collapse हुआ। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
इस हादसे ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि तेजी से बढ़ते शहरी विकास के बीच सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, तकनीकी निगरानी और नियमों का कड़ाई से पालन ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय है।
Follow Us: TV TODAY BHARAT Live | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat| X | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram | YOUTUBE
