Meerut Lathi Charge protesters outside Meerut Collectorate as former IPS Amitabh Thakur seeks a Human Rights Commission investigation.
Meerut Lathi Charge को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में बहस तेज हो गई है। मेरठ कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिस द्वारा किए गए कथित लाठीचार्ज और बल प्रयोग के मामले में अब मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया गया है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हो रहा था प्रदर्शन
बताया जा रहा है कि मेरठ कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन एक चर्चित हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने पहले से ही भारी पुलिस बल की तैनाती की थी। प्रदर्शन स्थल के चारों ओर सुरक्षा घेरा बनाया गया था ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।
इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ने की खबर सामने आई। आरोप है कि स्थिति संभालने के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया और लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई की गई। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद पूरे मामले ने व्यापक चर्चा का रूप ले लिया।
पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने उठाए गंभीर सवाल
पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने मानवाधिकार आयोग को भेजी गई शिकायत में कहा है कि जब प्रदर्शन स्थल पहले से ही पुलिस के नियंत्रण में था और पर्याप्त संख्या में सुरक्षाकर्मी मौजूद थे, तब प्रदर्शनकारियों के साथ कथित हाथापाई और बल प्रयोग की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हुई कार्रवाई कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रदर्शन पूरी तरह पुलिस की निगरानी में था, तो ऐसी स्थिति में बल प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता। शिकायत में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की भूमिका की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष समीक्षा हो सके।
मानवाधिकार उल्लंघन और पुलिस अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि यदि किसी व्यक्ति के साथ हिरासत जैसी स्थिति में या पुलिस कार्रवाई के दौरान अनुचित बल प्रयोग हुआ है, तो यह मानवाधिकारों के संरक्षण से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित की जानी चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि पुलिस की कार्रवाई कानून के दायरे में थी या नहीं।
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उन्होंने आयोग से यह भी आग्रह किया कि पूरे मामले में तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला जाए और यदि किसी स्तर पर अधिकारों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग
Meerut Lathi Charge मामले में पूर्व आईपीएस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया है। उनका कहना है कि घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल वीडियो, पुलिस कैमरों की रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्य तुरंत सुरक्षित किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की छेड़छाड़ या साक्ष्य नष्ट होने की आशंका समाप्त हो सके।
उन्होंने आयोग से अनुरोध किया कि संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर सभी वीडियो रिकॉर्डिंग, डिजिटल डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए। उनका मानना है कि निष्पक्ष जांच के लिए इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकते हैं।
रवि गौतम को पुलिस के साथ ले जाने पर भी उठे सवाल
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में रवि गौतम से जुड़े घटनाक्रम का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि कथित मारपीट का विरोध करने और आंदोलन की घोषणा के बाद पुलिस द्वारा उन्हें अपने साथ ले जाने की परिस्थितियों की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने आयोग से मांग की है कि यह स्पष्ट किया जाए कि पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत थी या उसमें किसी प्रकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की आशंका मौजूद है। साथ ही रवि गौतम की हिरासत से जुड़े सभी रिकॉर्ड, समय-सीमा और आधिकारिक दस्तावेजों की भी समीक्षा की जानी चाहिए।
निष्पक्ष जांच की मांग से बढ़ी मामले की गंभीरता
मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज होने के बाद Meerut Lathi Charge का मामला अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि मानवाधिकार संरक्षण और पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता का विषय भी बन गया है। आने वाले दिनों में आयोग इस शिकायत पर क्या रुख अपनाता है और प्रशासन की ओर से क्या जवाब प्रस्तुत किया जाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की प्रक्रिया जारी है। यदि आयोग इस प्रकरण में विस्तृत जांच के आदेश देता है, तो घटना से जुड़े सभी तथ्यों, पुलिस कार्रवाई, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन समीक्षा की जा सकती है। इस पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
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