Ayodhya Makar Sankranti: मकर संक्रांति के पावन मौके पर अयोध्या एक बार फिर श्रद्धा, भक्ति और सनातन परंपरा की जीती-जागती मिसाल बनकर सामने आई। जैसे ही सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया, रामनगरी में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही लाखों भक्त सरयू घाटों और राम जन्मभूमि की ओर बढ़ते दिखे। चारों ओर ‘जय श्री राम’ के नारे गूंज उठे और पूरा माहौल राममय हो गया।

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सरयू स्नान का विशेष पुण्य और आध्यात्मिक महत्व
मकर संक्रांति पर सरयू नदी में स्नान करना खास तौर पर शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सरयू में डुबकी लगाने से पाप नष्ट होते हैं और जीवन में पॉजिटिव एनर्जी आती है। भक्त सूर्योदय से पहले ही घाटों पर पहुंच गए। भक्तों को मंत्र बोलते, शंख बजाते और सूर्य को अर्घ्य देते देखना बहुत इमोशनल था। कई भक्तों ने इसे अपने जीवन का कभी न भूलने वाला आध्यात्मिक अनुभव बताया।
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राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें
सरयू स्नान के बाद भक्त राम जन्मभूमि मंदिर की ओर बढ़े। मंदिर परिसर में दर्शन का इंतज़ाम पूरी तरह से किया गया था। प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स, वॉलंटियर्स की मदद और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के बीच भक्तों ने अनुशासित तरीके से रामलला के दर्शन किए। भक्तों के चेहरों पर अपार आस्था, शांति और संतोष साफ दिख रहा था। कई भक्तों का कहना था कि राम मंदिर में दर्शन करने के बाद मन अपने आप शांति से भर जाता है।

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मकर संक्रांति और अयोध्या का ऐतिहासिक व धार्मिक संबंध
सरयू स्नान के बाद भक्त राम जन्मभूमि मंदिर की ओर बढ़े। मंदिर परिसर में दर्शन का इंतज़ाम पूरी तरह से किया गया था। प्रशासन द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स, वॉलंटियर्स की मदद और सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के बीच भक्तों ने अनुशासित तरीके से रामलला के दर्शन किए। भक्तों के चेहरों पर अपार आस्था, शांति और संतोष साफ दिख रहा था। कई भक्तों का कहना था कि राम मंदिर में दर्शन करने के बाद मन अपने आप शांति से भर जाता है।
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देश-विदेश से पहुंचे राम भक्त
इस वर्ष की मकर संक्रांति पर अयोध्या में केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने और विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचे। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश सहित दक्षिण भारत के राज्यों से भी बड़ी संख्या में भक्त रामलला के दर्शन के लिए आए। विदेशी श्रद्धालुओं ने भी भारतीय सनातन परंपरा और अयोध्या की आध्यात्मिक ऊर्जा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या का वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर स्थान और अधिक मजबूत हुआ है।
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प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह मुस्तैद
भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए, जिला प्रशासन ने कड़े इंतज़ाम किए थे। सरयू घाटों पर गोताखोरों, टेम्पररी मेडिकल कैंप, पीने के पानी, सफ़ाई और ट्रैफ़िक कंट्रोल के लिए खास इंतज़ाम किए गए थे। राम मंदिर परिसर और मुख्य सड़कों पर CCTV कैमरों से नज़र रखी गई। पुलिस, होमगार्ड और स्वयंसेवी संस्थाओं के तालमेल से भक्तों को कोई परेशानी नहीं होने दी गई।
धार्मिक पर्यटन को मिल रहा नया आयाम
मकर संक्रांति जैसे बड़े त्योहारों की वजह से अयोध्या में धार्मिक टूरिज्म को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। होटल, धर्मशाला, लोकल ट्रांसपोर्ट, फूल-माला, प्रसाद और हैंडीक्राफ्ट से जुड़े व्यापारियों को भी इससे आर्थिक फायदा हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि राम मंदिर बनने के बाद अयोध्या की इकॉनमी फिर से पटरी पर आ गई है और यह शहर अब ग्लोबल स्पिरिचुअल टूरिज्म हब के तौर पर उभर रहा है।
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श्रद्धालुओं की भावनाएं, आस्था, शांति और संतोष
भक्तों ने कहा कि सरयू स्नान और रामलला के दर्शन के बाद उन्हें गहरी शांति और आध्यात्मिक संतोष महसूस हुआ। कई बुज़ुर्ग भक्तों ने कहा कि सालों के इंतज़ार के बाद राम मंदिर के दर्शन करना उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है। युवा भक्तों ने इसे अपनी आध्यात्मिक यात्रा का एक अहम पड़ाव बताया। मकर संक्रांति ने इस अनुभव को और भी खास बना दिया।
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राममय अयोध्या और सनातन संस्कृति की जीवंत तस्वीर
मकर संक्रांति के मौके पर अयोध्या में उमड़ा भक्ति का सैलाब दिखाता है कि पुरानी परंपरा आज भी उतनी ही ज़िंदा और काम की है। सरयू स्नान, रामलला के दर्शन और ‘जय श्री राम’ के नारे के बीच अयोध्या ने एक बार फिर पूरी दुनिया को भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति की ताकत और भव्यता का एहसास कराया। यह त्योहार न सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का संदेश भी दिया।
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