Surya Grahan: साल का पहला सूर्य ग्रहण आज लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना करीब 4 घंटे 30 मिनट तक चलने का अनुमान है। जैसे ही ग्रहण की खबर सामने आती है, लोगों के मन में उत्सुकता के साथ कई सवाल भी उठने लगते हैं- क्या यह भारत में दिखाई देगा? क्या सूतक काल मान्य होगा? और क्या आम जीवन पर इसका कोई प्रभाव पड़ेगा? आइए, इस Surya Grahan से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां विस्तार से समझते हैं।
क्या होता है Surya Grahan?
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य की रोशनी आंशिक या पूर्ण रूप से पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाती। यह एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जिसे विज्ञान सामान्य प्रक्रिया मानता है।
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हालांकि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से Surya Grahan को विशेष महत्व दिया जाता है। कई परंपराओं में इसे आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन का समय माना गया है।
ग्रहण का समय और चरण
आज का Surya Grahan लगभग साढ़े चार घंटे तक रहेगा। यह दोपहर में शुरू होकर शाम तक समाप्त होने की संभावना है। हालांकि सटीक समय अलग-अलग देशों और समय क्षेत्रों के अनुसार बदल सकता है।
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सूर्य ग्रहण आमतौर पर तीन चरणों में होता है—
- पहला स्पर्श – जब चंद्रमा सूर्य को ढंकना शुरू करता है।
- मध्यकाल – जब ग्रहण अपने अधिकतम प्रभाव पर होता है।
- अंतिम स्पर्श – जब चंद्रमा सूर्य से हटने लगता है और ग्रहण समाप्त होता है।
ग्रहण का वास्तविक अनुभव उसी स्थान पर निर्भर करता है जहां से इसे देखा जा रहा है।
क्या भारत में दिखाई देगा Surya Grahan ?
इस बार का Surya Grahan भारत के अधिकांश हिस्सों में दिखाई नहीं देगा। खगोलीय गणनाओं के अनुसार, यह ग्रहण मुख्य रूप से कुछ विदेशी देशों, समुद्री क्षेत्रों और तटीय इलाकों में ही देखा जा सकेगा।
जब कोई ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होता, तो परंपरागत मान्यताओं के अनुसार उसका सूतक काल भी लागू नहीं माना जाता। यानी मंदिरों के कपाट बंद करने या विशेष धार्मिक प्रतिबंध लागू करने की आवश्यकता नहीं होगी।
सूतक काल क्या होता है?
सनातन परंपरा में ग्रहण से पहले के समय को ‘सूतक काल’ कहा जाता है। Surya Grahan के लिए सूतक काल आमतौर पर 12 घंटे पहले शुरू माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, भोजन और अन्य कार्यों को लेकर कुछ नियमों का पालन किया जाता है।
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लेकिन धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, यदि Surya Grahan किसी क्षेत्र में दिखाई नहीं देता है, तो उस स्थान पर सूतक लागू नहीं होता। इसलिए भारत में इस बार आम दिनचर्या जारी रखी जा सकती है।
धार्मिक मान्यताएं और परंपराएं
धार्मिक दृष्टि से ग्रहण का समय जप, तप और ध्यान के लिए विशेष माना गया है। पौराणिक कथाओं में राहु और केतु को ग्रहण का कारण बताया गया है।
परंपरागत रूप से, ग्रहण के दौरान इन बातों का पालन करने की सलाह दी जाती है—
• भोजन से परहेज (यदि ग्रहण दृश्य हो)
• मंत्र जाप और ध्यान
• दान-पुण्य
• गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी
हालांकि, ये नियम उसी स्थान पर लागू होते हैं जहां Surya Grahan प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण क्या कहता है?
वैज्ञानिकों के अनुसार, Surya Grahan पूरी तरह प्राकृतिक खगोलीय प्रक्रिया है और इसका पृथ्वी पर सामान्य जीवन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। हालांकि एक महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। यदि आपके क्षेत्र में ग्रहण दिखाई दे रहा है, तो केवल प्रमाणित सोलर फिल्टर या विशेष ग्रहण चश्मे का उपयोग करना चाहिए। बिना सुरक्षा उपकरण के सूर्य को देखना आंखों के लिए हानिकारक हो सकता है।
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दुनिया के किन हिस्सों में दिखेगा ग्रहण?
यह Surya Grahan मुख्य रूप से कुछ विदेशी देशों और समुद्री क्षेत्रों में दिखाई देगा। वहां के लोग इसे प्रत्यक्ष रूप से देख पाएंगे। चूंकि भारत में यह दृश्य नहीं होगा, इसलिए यहां के जनजीवन पर इसका कोई व्यावहारिक असर नहीं पड़ेगा।
क्या करें और क्या न करें?
यदि आपके स्थान पर ग्रहण दिखाई दे रहा हो, तो—
• सूर्य को सुरक्षित चश्मे से देखें
• ग्रहण के बाद स्नान करें
• घर की सफाई करें
• दान और मंत्र जाप करें
अगर Surya Grahan आपके क्षेत्र में नहीं दिख रहा है, तो सामान्य दिनचर्या अपनाई जा सकती है।
आध्यात्मिक और मानसिक दृष्टि से महत्व
Surya Grahan को कई लोग आत्मचिंतन और आध्यात्मिक अभ्यास का अवसर मानते हैं। मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप और ध्यान का विशेष फल मिलता है। चाहे कोई इसे वैज्ञानिक घटना माने या धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण समय, यह निश्चित है कि सूर्य ग्रहण प्रकृति की एक अद्भुत घटना है, जो लोगों को आकाश की ओर देखने और ब्रह्मांड की विशालता को समझने का अवसर देती है।
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