Phoolon Ki Holi: ब्रजभूमि में होली का उत्सव केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था और आनंद का जीवंत अनुभव है। सोमवार को छटीकरा रोड स्थित श्री प्रियाकान्तजू मंदिर में मनाई गई फूलों की होली ने एक बार फिर इस परंपरा की भव्यता को साकार कर दिया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। देश के विभिन्न राज्यों से आए भक्तों ने राधा-कृष्ण के जयकारों के बीच इस अद्भुत उत्सव का आनंद लिया।
Phoolon Ki Holi के साथ हुई शुरुआत
होली उत्सव की शुरुआत ठाकुरजी के समक्ष Phoolon Ki Holi से हुई। मंदिर के संस्थापक और कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में जैसे ही भजन आज ब्रज में होली रे रसिया गूंजा, पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया।
गुलाब, गेंदे और विभिन्न रंगों के Phoolon Ki Holi के बीच भक्त झूम उठे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो द्वापर युग का ब्रज पुनः जीवंत हो गया हो। श्रद्धालु एक-दूसरे पर फूल उछालते हुए ‘राधे-राधे’ का उद्घोष कर रहे थे।
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लड्डू और जलेबी होली बनी आकर्षण का केंद्र
इस विशेष आयोजन का मुख्य आकर्षण लड्डू और जलेबी होली रही। प्रसाद के रूप में वितरित की गई मिठाइयों ने उत्सव का उल्लास और बढ़ा दिया। भक्तों में प्रसाद पाने की उत्सुकता स्पष्ट दिखाई दे रही थी, लेकिन इस उमंग में भी अनुशासन और श्रद्धा का भाव बना रहा।
लोग एक-दूसरे पर प्रेमपूर्वक लड्डू उछालते हुए ठाकुरजी का आशीर्वाद प्राप्त कर रहे थे। यह दृश्य भक्ति और आनंद का अनोखा संगम प्रस्तुत कर रहा था।
भजन संध्या ने बढ़ाया उत्सव का रंग
मंदिर परिसर में आयोजित भजन संध्या ने होली के जश्न को नई ऊंचाई दी। ढोलक, मंजीरा और हारमोनियम की मधुर धुनों पर गाए गए पारंपरिक ब्रज होली गीतों ने हर किसी को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
श्रद्धालु रंग और फूलों की बौछार के बीच नाचते-गाते नजर आए। पूरा परिसर रंग, सुगंध और भक्ति के वातावरण से सराबोर हो गया। यह आयोजन केवल आंखों के लिए ही नहीं, बल्कि आत्मा के लिए भी एक विशेष अनुभव बन गया।
लट्ठमार होली की झलक
ब्रज की प्रसिद्ध लट्ठमार होली की प्रतीकात्मक झलक ने कार्यक्रम को और भी खास बना दिया। महिलाओं ने परंपरागत अंदाज में लाठियों के साथ होली खेली, जिसे देखकर उपस्थित श्रद्धालु रोमांचित हो उठे।
हंसी, ठिठोली और रंगों के बीच यह परंपरा ब्रज संस्कृति की विशिष्ट पहचान को दर्शाती है। इस झलक ने कार्यक्रम में ऊर्जा और उत्साह का नया संचार किया।
प्रेम और एकता का संदेश
इस अवसर पर देवकीनंदन ठाकुर ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रज की होली केवल रंगों का खेल नहीं है, बल्कि यह प्रेम, एकता और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब जीवन में राधा और कृष्ण के प्रेम का रंग घुल जाता है, तब ही सच्चा आनंद प्राप्त होता है।
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उनके प्रवचन ने उपस्थित भक्तों के हृदय को स्पर्श किया। उन्होंने सभी को आपसी प्रेम और सद्भाव के साथ जीवन जीने का संदेश दिया।
क्यों खास है प्रियाकान्तजू मंदिर की होली?
वृंदावन में अनेक मंदिरों में Phoolon Ki Holi मनाई जाती है, लेकिन श्री प्रियाकान्तजू मंदिर की होली अपनी विशिष्टता के कारण अलग पहचान रखती है। यहां केवल गुलाल ही नहीं, बल्कि फूलों, मिठाइयों और भक्ति के माध्यम से उत्सव मनाया जाता है।
यही कारण है कि हर वर्ष हजारों श्रद्धालु यहां पहुंचकर इस दिव्य अनुभव का हिस्सा बनते हैं। आयोजन की सुव्यवस्थित व्यवस्था और आध्यात्मिक वातावरण इसे विशेष बनाते हैं।
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आध्यात्मिक अनुभव में बदली होली
ब्रज में होली का अर्थ केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आत्मिक आनंद का अवसर है। जब श्रद्धालु ठाकुरजी का प्रसाद माथे से लगाते हैं, तो वे केवल मिठाई नहीं, बल्कि आशीर्वाद ग्रहण करते हैं।
इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि वृंदावन की होली विश्वभर में क्यों प्रसिद्ध है। यहां रंगों के साथ भक्ति का ऐसा संगम देखने को मिलता है, जो हर हृदय को स्पर्श कर जाता है।
फूलों की महक, भजनों की गूंज और श्रद्धालुओं के उल्लास के बीच यह Phoolon Ki Holi लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में बस गया।
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