Bihar politics security threat news: बिहार की राजनीति एक बार फिर सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गरमा गई है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। इस गंभीर घटनाक्रम के बाद तेज प्रताप यादव ने बिहार सरकार में गृह विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर अपनी सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। यह मामला न सिर्फ एक राजनीतिक नेता की व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े करता है।
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तेज प्रताप यादव ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि उन्हें हाल के दिनों में लगातार धमकी भरे संदेश और कॉल मिल रहे हैं, जिनमें उनकी जान को खतरे की बात कही जा रही है। पत्र में उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस तरह की धमकियों से न केवल उनका व्यक्तिगत जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि उनके समर्थकों और परिवारजनों में भी भय का माहौल है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए।
राजनीतिक हलकों में यह घटना इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि तेज प्रताप यादव बिहार की सक्रिय राजनीति में लगातार मुखर रहे हैं। वे अक्सर सरकार की नीतियों, प्रशासनिक फैसलों और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बयान देते रहे हैं। ऐसे में उन्हें मिली धमकी को केवल व्यक्तिगत मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और राजनीतिक असहमति की सुरक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है।
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पत्र के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है। राजद नेताओं का कहना है कि अगर एक प्रमुख राजनीतिक नेता ही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन के नेताओं ने भरोसा दिलाया है कि मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और संबंधित एजेंसियों को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, तेज प्रताप यादव को मिली धमकियों की जांच के लिए साइबर सेल और स्थानीय पुलिस को अलर्ट किया गया है। कॉल और मैसेज के स्रोत का पता लगाने की कोशिश की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि धमकी देने वाला व्यक्ति या समूह कौन है और इसके पीछे क्या मंशा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में शुरुआती 48 घंटे बेहद अहम होते हैं, क्योंकि इसी दौरान तकनीकी साक्ष्य जुटाने की संभावना सबसे अधिक रहती है।
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इस पूरे प्रकरण में गृह विभाग की भूमिका भी केंद्र में है। सम्राट चौधरी को भेजे गए पत्र के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि तेज प्रताप यादव की सुरक्षा समीक्षा की जाएगी और जरूरत पड़ने पर उन्हें अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की जाएगी। पूर्व में भी बिहार में कई नेताओं की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव किए गए हैं, जो खतरे के आकलन पर आधारित होते हैं।
बिहार में राजनीतिक हिंसा और धमकी के मामले कोई नए नहीं हैं, लेकिन समय-समय पर ऐसे घटनाक्रम राज्य की छवि और प्रशासनिक दक्षता पर सवाल खड़े करते हैं। लोकतंत्र में असहमति और आलोचना का अधिकार सभी को है, लेकिन धमकी और हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती।
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फिलहाल, तेज प्रताप यादव को मिली धमकी का मामला जांच के अधीन है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि सुरक्षा एजेंसियां इस पर क्या कदम उठाती हैं और सरकार किस तरह से राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ आम जनता की सुरक्षा को लेकर ठोस संदेश देती है। यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बिहार में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक शिष्टाचार को मजबूत करना समय की मांग है।
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