Gold Jewellery Stocks Fall: प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा देशवासियों से अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोना न खरीदने की अपील का असर अब शेयर बाजार में भी साफ दिखाई देने लगा है। सोमवार को देश की प्रमुख गोल्ड ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि यदि लोगों ने सोने की खरीद कम कर दी तो आने वाले महीनों में ज्वेलरी कंपनियों की बिक्री और मुनाफे पर बड़ा असर पड़ सकता है।
दरअसल, पीएम मोदी ने हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में लोगों से अपील की थी कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक संकट, बढ़ती महंगाई और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को देखते हुए अगले एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीद से बचें। उन्होंने लोगों से “मेड इन इंडिया” और स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने की भी बात कही थी। इसके बाद सोमवार को बाजार में Gold Jewellery Stocks Fall ट्रेंड देखने को मिला।
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क्यों की गई सोना न खरीदने की अपील?
PM Modi ने अपने संबोधन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय युद्ध, सप्लाई चेन संकट और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में शामिल है। बड़ी मात्रा में सोने का आयात होने से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और व्यापार घाटा भी प्रभावित होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार इस समय विदेशी मुद्रा की बचत और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर फोकस कर रही है। इसी वजह से लोगों से गैर-जरूरी सोने की खरीद टालने की अपील की गई है।
हालांकि बाजार ने इस बयान को ज्वेलरी सेक्टर के लिए नकारात्मक संकेत के रूप में लिया, जिसके चलते निवेशकों ने बड़े पैमाने पर ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी।
शेयर बाजार में क्यों आई बड़ी गिरावट?
सोमवार को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी National Stock Exchange of India में कई प्रमुख गोल्ड ज्वेलरी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
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Titan Company के शेयर दोपहर तक करीब 6 प्रतिशत गिरकर 4234 रुपये के आसपास कारोबार करते दिखाई दिए। कारोबार के दौरान शेयर 4150 रुपये के निचले स्तर तक पहुंच गया।
वहीं Kalyan Jewellers के शेयरों में 9 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। इसी तरह Senco Gold और Sky Gold and Diamonds के शेयरों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली।
Thangamayil Jewellery के शेयर भी बाजार में दबाव में दिखाई दिए। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को डर है कि यदि गोल्ड ज्वेलरी की मांग कम होती है तो इन कंपनियों की आय प्रभावित हो सकती है।
पहले से ही दबाव में था गोल्ड मार्केट
विशेषज्ञों के अनुसार भारत में सोने की कीमतें पहले से रिकॉर्ड स्तर पर बनी हुई हैं। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।
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महंगे सोने के कारण पहले ही ग्राहकों की खरीदारी प्रभावित हो रही थी। अब प्रधानमंत्री की अपील के बाद बाजार में मांग घटने की आशंका और बढ़ गई है। यही वजह है कि Gold Jewellery Stocks Fall की स्थिति और गहरी हो गई।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ महीनों में त्योहारी सीजन और शादी-विवाह के बाजार पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
राहुल गांधी ने साधा सरकार पर निशाना
इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा कि जनता से सोना न खरीदने, विदेश यात्रा कम करने, पेट्रोल का कम इस्तेमाल करने और वर्क फ्रॉम होम अपनाने जैसी अपीलें सरकार की आर्थिक विफलता को दिखाती हैं।
उन्होंने कहा कि देश की जनता पर लगातार बोझ डाला जा रहा है, जबकि सरकार अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रही है। हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री की अपील देशहित और आर्थिक स्थिरता को ध्यान में रखकर की गई है।
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अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ सकता है असर?
भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड उपभोक्ता देशों में शामिल है। यहां शादी-विवाह और त्योहारों में सोने की मांग बहुत ज्यादा रहती है। यदि अगले एक साल में सोने की खरीद में कमी आती है तो इसका असर केवल ज्वेलरी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे गोल्ड सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।
ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लाखों छोटे व्यापारियों, कारीगरों और रिटेल दुकानों की आय प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि सोने का आयात कम होता है तो इससे भारत का व्यापार घाटा कम हो सकता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घट सकता है।
निवेशकों की नजर आगे की रणनीति पर
फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले समय में सरकार की आर्थिक रणनीति क्या रहती है और क्या लोग वास्तव में सोने की खरीद कम करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक संकट और महंगाई का दबाव जारी रहता है तो ज्वेलरी सेक्टर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वहीं निवेशक अब कंपनियों की अगली तिमाही के नतीजों और उपभोक्ता मांग के आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं।
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