Reliance Iran oil deal 2026: भारत की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा कदम उठाया है। Reliance Iran oil deal 2026 के तहत कंपनी ने ईरान से 50 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है, जो 2019 के बाद भारत की पहली ऐसी खरीद मानी जा रही है।
यह सौदा ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
अमेरिकी छूट के बाद संभव हुई डील
सूत्रों के मुताबिक, Reliance Iran oil deal 2026 अमेरिका द्वारा दी गई अस्थायी छूट के बाद संभव हो पाई है। इस छूट के तहत समुद्र में पहले से मौजूद ईरानी तेल को सीमित समय के लिए आयात करने की अनुमति दी गई है।
बताया जा रहा है कि यह छूट 30 दिनों के लिए दी गई है और केवल उन टैंकरों पर लागू होती है जिनमें 20 मार्च तक तेल लोड किया जा चुका था।
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नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी से खरीद
इस डील से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रिलायंस ने यह कच्चा तेल ईरान की नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (NIOC) से खरीदा है। Reliance Iran oil deal 2026 में तेल की कीमत ICE ब्रेंट फ्यूचर्स के मुकाबले करीब 7 डॉलर प्रति बैरल ज्यादा तय की गई है, जो इस डील को और महत्वपूर्ण बनाता है।
हालांकि, इस सौदे की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है और डिलीवरी की सटीक तारीख भी स्पष्ट नहीं है।
2019 के बाद पहली खरीद
भारत ने मई 2019 में ईरान से तेल आयात पूरी तरह बंद कर दिया था, जब अमेरिका ने तेहरान पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे।
अब Reliance Iran oil deal 2026 के जरिए भारत की ऊर्जा रणनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। यह कदम संकेत देता है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत अपने विकल्पों को फिर से तलाश रहा है।
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वैश्विक बाजार पर असर
ईरानी तेल का बड़ा हिस्सा पिछले कुछ वर्षों में चीन की स्वतंत्र रिफाइनरियों द्वारा खरीदा जाता रहा है। लेकिन Reliance Iran oil deal 2026 के बाद एशिया के अन्य रिफाइनर भी इस दिशा में कदम बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं।
हालांकि, एशिया की बड़ी कंपनी सिनोपेक ने साफ कर दिया है कि फिलहाल उसका ईरानी तेल खरीदने का कोई इरादा नहीं है।
रूस के बाद अब ईरान पर नजर
हाल के महीनों में भारत ने रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा है। ऐसे में Reliance Iran oil deal 2026 यह दिखाता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों पर ध्यान दे रहा है।
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यह रणनीति न केवल सप्लाई को स्थिर रखने में मदद करती है, बल्कि बेहतर कीमतों पर तेल खरीदने का मौका भी देती है।
भविष्य में और बढ़ सकती हैं ऐसी डील्स
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिकी प्रतिबंधों में आगे भी ढील मिलती है, तो Reliance Iran oil deal 2026 जैसे और सौदे देखने को मिल सकते हैं।
इसके साथ ही एशिया की अन्य रिफाइनिंग कंपनियां भी इस अवसर का फायदा उठाने की कोशिश कर सकती हैं।
कुल मिलाकर, Reliance Iran oil deal 2026 केवल एक व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा राजनीति और बाजार के बदलते समीकरणों का संकेत है।
यह डील आने वाले समय में भारत की ऊर्जा नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी असर डाल सकती है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे इस तरह की डील्स किस दिशा में बढ़ती हैं।
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