Sensex Nifty Market Update Today: शुक्रवार को इंडियन इक्विटी मार्केट ने इन्वेस्टर्स को एक और झटका दिया। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही लगातार चौथे सेशन में लाल निशान पर बंद हुए। ग्लोबल संकेत कमजोर रहे, FIIs की सेलिंग जारी रही और इन्वेस्टर्स ने रिस्क लेने से बचा। निफ्टी का 25,700 के नीचे फंसलकर बंद होना मार्केट सेंटिमेंट के लिए एक साइकोलॉजिकल झटका माना जा रहा है। मिनी सब-हेडिंग: सेंसेक्स निफ्टी की आज की तस्वीर
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सेंसेक्स 604.72 पॉइंट्स गिरकर 83,576.24 पर क्लोज हुआ, जबकी निफ्टी 193.55 पॉइंट्स टूटकर 25,683.30 पर सेटल हुआ। परसेंटेज टर्म्स में देखें तो सेंसेक्स लगभग 0.72% और निफ्टी 0.75% नीचे रहा। ये नंबर्स सिर्फ डेली फॉल नहीं दिखाते, बस ये बताते हैं कि मार्केट एक कंसोलिडेशन और हल्के करेक्शन फेज में चल रहा है।
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कौन से सेक्टर्स टिके, कौन से फिसले
सेक्टोरल परफॉर्मेंस मिक्स्ड। PSU बैंक्स, ऑयल एंड गैस, IT, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज और मेटल स्टॉक्स में रिलेटिव स्ट्रेंथ दिखी। मतलब ये सेक्टर्स इन्वेस्टर्स को थोड़ा डिफेंसिव कम्फर्ट दे रहे हैं। वहीं रियल्टी, प्राइवेट बैंक, फाइनेंशियल सर्विसेज़, FMCG और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स पर सेलिंग प्रेशर ज़्यादा रहा। ये इस बात का सिग्नल है कि इन्वेस्टर्स अब ग्रोथ और कंजम्प्शन बेस्ड थीम्स पर सावधान हो गए हैं। सिर्फ इक्विटी ही नहीं, करेंसी मार्केट ने भी प्रेशर महसूस किया। इंडियन रुपया डॉलर के 14 पैसे कम होकर 90.16 पर बंद हुआ, जब पिछला क्लोज 90.02 था। कमजोर रुपया का मतलब है इंपोर्टेड इन्फ्लेशन का रिस्क और FIIs के लिए सावधान रहने का एक्स्ट्रा कारण।
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ग्लोबल सिग्नल्स ने बिगाड़ा खेल
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर के मुताबिक, मार्केट अभी कंसोलिडेशन फेज में है। कमजोर ग्लोबल सिग्नल, बढ़ती ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की लगातार सेलिंग ने सेंटिमेंट को दबाया हुआ है। इसके साथ ही इंडिया-US टैरिफ नेगोशिएशन पर अनिश्चितता और जियोपॉलिटिकल टेंशन ने भी इन्वेस्टर्स का कॉन्फिडेंस कम किया है।
Q3 अर्निंग्स से उम्मीद की किरण
विनोद नायर का कहना है कि डोमेस्टिक GDP ग्रोथ रेसिलिएंट रहने की उम्मीद है और Q3 अर्निंग्स में रिकवरी दिख सकती है, स्पेशल मिडकैप स्टॉक्स के ज़रिए। अगर रिजल्ट्स की उम्मीदों के म्यूटेबल रहें, तो ये मार्केट सेंटिमेंट को आने वाले हफ्तों में थोड़ा स्टेबल कर सकता है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने बताया कि पूरे हफ्ते इंडियन इक्विटीज पर प्रेशर बना रहा है, जिसका बड़ा कारण ग्लोबल ट्रेड अनिश्चितता है। US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ से जुड़े बयानों के बाद उभरते मार्केट में रिस्क लेने की क्षमता कम हो गई। ज़्यादा इंपोर्ट ड्यूटी की चिंता ने इंडिया जैसे मार्केट को भी हिट किया।
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रिस्क-ऑफ मोड में इन्वेस्टर्स
पोनमुडी आर के हिसाब से इन्वेस्टर्स ने क्लियर रिस्क-ऑफ अप्रोच अपनाया। डिफेंसिव सेक्टर्स से भी ज़्यादा सपोर्ट नहीं मिला, क्योंकि मार्केट पार्टिसिपेंट्स ग्लोबल पॉलिसी डेवलपमेंट्स पर क्लैरिटी का इंतज़ार कर रहे हैं। जब तक ग्लोबल ट्रेड और टैरिफ पर क्लियर सिग्नल नहीं आता, तब तक वोलैटिलिटी रहने के ज़्यादा चांस हैं। LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे के म्यूटैबिक निफ्टी अपनी 50-डे एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के नीचे चला गया है, जो बढ़ती कमजोरी का सिग्नल है। टेक्निकल टर्म्स में देखें तो निफ्टी के लिए अगला डाउनसाइड टारगेट 25,550–25,500 का ज़ोन हो सकता है, जबकी अपसाइड रेजिस्टेंस 25,850 के आस-पास है। मतलब शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स को सावधान रहना चाहिए।
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डेटा और पॉलिसी पर निगाह
आशिका इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के नोट के मुताबिक इन्वेस्टर्स दिसंबर के डोमेस्टिक इन्फ्लेशन डेटा का इंतज़ार कर रहे हैं, जो मंडे को रिलीज़ होगा। ग्लोबली भी सेंटिमेंट दबा हुआ है, क्योंकि US सुप्रीम कोर्ट के एक संभावित फैसले पर अनिश्चितता बनी हुई है जो अमेरिकन टैरिफ की वैलिडिटी से जुड़ी है। इसके अलावा US कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक के कमेंट्स, जिसमें इंडिया-US ट्रेड एग्रीमेंट के डिले का हिंट दिया गया, ने भी मूड को ठंडा किया। मिनी सब-हेडिंग: मार्केट ब्रेड्थ ने क्या बताया डेरिवेटिव्स फ्रंट पर मार्केट ब्रेड्थ साफ तौर पर नेगेटिव है। सिर्फ 36 स्टॉक्स आगे बढ़े, जबकी 176 स्टॉक्स में गिरावट रही। यह नंबर दिखाता है कि सेलिंग प्रेशर ब्रॉड-बेस्ड था, सिर्फ कुछ हैवीवेट्स तक लिमिटेड नहीं।
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आगे का रोडमैप क्या हो सकता है
ओवरऑल पिक्चर यह कह रही है कि इंडियन स्टॉक मार्केट अभी एक सेंसिटिव फेज में है। ग्लोबल संकेत, बॉन्ड यील्ड, FIIs फ्लो, ट्रेड बातचीत और महंगाई के डेटा सब मिलकर नियर-टर्म डायरेक्शन तय करेंगे। लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स के लिए इंडिया ग्रोथ स्टोरी इंटेंट है, लेकिन शॉर्ट-टर्म में वोलैटिलिटी और करेक्शन के चांस को इग्नोर नहीं किया जा सकता। स्मार्ट स्ट्रैटेजी यह होगी कि इन्वेस्टर्स सब्र रखें, क्वालिटी स्टॉक्स पर फोकस करें और ग्लोबल हेडलाइंस पर नज़र बनाएं, क्योंकि मार्केट का अगला बड़ा मूव वहीं से ट्रिगर हो सकता है।
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