Dehradun Arjun Murder Case: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सामने आया Dehradun Arjun Murder Case पूरे प्रदेश को झकझोर देने वाला साबित हुआ है। शहीद कर्नल के बेटे अर्जुन शर्मा की हत्या ने न केवल एक परिवार को तोड़ा, बल्कि संपत्ति विवाद और आर्थिक तनाव की गहरी परतों को भी उजागर कर दिया। पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्होंने इस मामले को और भी सनसनीखेज बना दिया है।
25 दिन पहले रची गई थी हत्या की साजिश
पुलिस के अनुसार, अर्जुन की हत्या की योजना वारदात से लगभग 25 दिन पहले बनाई गई थी। आरोप है कि उसकी मां बीना शर्मा, करीबी सहयोगी विनोद उनियाल और प्रॉपर्टी कारोबारी अजय खन्ना ने मिलकर जनवरी में ही अर्जुन को रास्ते से हटाने का फैसला कर लिया था। जांच में खुलासा हुआ है कि हत्या को अंजाम देने के लिए सुपारी किलर को हायर किया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने Dehradun Arjun Murder Case को एक सुनियोजित साजिश का रूप दे दिया है।
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12 लाख में दी गई सुपारी, पुराने अपराधी शामिल
पुलिस जांच के मुताबिक, पंकज राणा ने 12 लाख रुपये में हत्या की सुपारी ली थी। उसने अपने भाई राजीव को भी इस योजना में शामिल किया। राजीव का आपराधिक इतिहास रहा है और वह पूर्व में हत्या के एक मामले में जेल भी जा चुका है।
दोनों भाइयों ने देहरादून में अर्जुन की रेकी की और सही मौके का इंतजार किया। पुलिस का कहना है कि अर्जुन की दिनचर्या की जानकारी भी आरोपियों तक पहुंचाई गई थी, जिससे वारदात को अंजाम देना आसान हो सके। यह पहलू Dehradun Arjun Murder Case को और गंभीर बनाता है।
मां-बेटे के रिश्तों में वर्षों से थी खटास
जांच में सामने आया है कि अर्जुन और उसकी मां के बीच मतभेद कोई नया नहीं था। करीब 15 साल पहले जब अर्जुन ने गैस एजेंसी का संचालन संभाला, तभी से आर्थिक मामलों को लेकर विवाद शुरू हो गया था।
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अर्जुन कथित तौर पर व्यवसाय से जुड़े पैसों के उपयोग पर सख्त रुख अपनाता था, जबकि बीना शर्मा स्वतंत्र आर्थिक फैसले ले रही थीं। समय के साथ यह मतभेद संपत्ति और बैंक लोन के मुद्दों तक पहुंच गया। यही विवाद आगे चलकर Dehradun Arjun Murder Case की पृष्ठभूमि बना।

गैस एजेंसी और करोड़ों का लोन बना विवाद की जड़
परिवार को शहीद कर्नल रमेश चंद शर्मा के नाम पर गैस एजेंसी मिली थी। बताया जा रहा है कि इस एजेंसी के संचालन के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा से करीब 8 करोड़ रुपये का लोन लिया गया था। इसी बीच जीएमएस रोड स्थित पैतृक संपत्ति का सौदा 14 करोड़ रुपये में किया गया। पुलिस के अनुसार, इस रकम में से 4 करोड़ रुपये लोन चुकाने में लगाए गए, जबकि शेष राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर की गई। इन लेनदेन ने परिवार के भीतर अविश्वास और तनाव को और गहरा कर दिया।
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संपत्ति विवाद से बढ़ा तनाव
अर्जुन इस लेनदेन से नाराज था और उसने पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा मांगा। उसने अदालत में संपत्ति सौदे के खिलाफ स्टे भी हासिल किया था, जिससे खरीदार पक्ष पर रकम लौटाने का दबाव बना।
पुलिस का मानना है कि आर्थिक दबाव और कानूनी जटिलताओं ने आरोपियों को चरम कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। इसी बिंदु से Dehradun Arjun Murder Case में हत्या की साजिश आकार लेने लगी।
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वारदात का दिन और पुलिस जांच
घटना वाले दिन अर्जुन को तिब्बती मार्केट के पास गोली मारी गई। घटनास्थल के पास उसकी लाल रंग की कार खड़ी मिली, जो कथित तौर पर बीना शर्मा के नाम पर पंजीकृत थी।
पुलिस ने बैंक खातों की जांच में बड़े पैमाने पर धन हस्तांतरण के प्रमाण जुटाए हैं। वित्तीय लेनदेन की गहराई से पड़ताल की जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हत्या की साजिश में किसकी क्या भूमिका थी। जांच एजेंसियां डिजिटल साक्ष्यों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की भी समीक्षा कर रही हैं।
आगे क्या?
फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश करने की तैयारी में है। Dehradun Arjun Murder Case ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संपत्ति और पैसों के विवाद किस तरह रिश्तों को तोड़ सकते हैं।
Dehradun Arjun Murder Case केवल एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि आर्थिक स्वार्थ, पारिवारिक तनाव और आपराधिक साजिश की जटिल गाथा बन चुका है। आने वाले दिनों में अदालत की सुनवाई इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेगी।
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