France no-confidence vote Mercosur deal: यूरोप की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में फ़्रांस एक बार फिर से राजनीतिक उथल-पुथल में शामिल हो गया है। रविवार को फ्रांस की संसद में सरकार के खिलाफ दो अविश्वास प्रस्ताव (नो-कॉन्फिडेंस मोशन) पेश किए जा रहे हैं। ये प्रस्ताव नेशनल रैली (आरएन) और फ्रांस अनबोएड (एलएफआई) की ओर से लटके हुए हैं। हालाँकि राजनीतिक गणित को देखते हुए इन निहित होने की संभावना बेहद कम हो रही है। इन अविश्वास का एकजुटता का कारण यूरोपीय संघ और मर्कोसुर देशों के बीच हुआ व्यापार समझौता है, जिसे लेकर फ्रांस में एकजुटता देखने को मिल रही है।
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Mercosur समझौता विरोध क्यों?
मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का एक बड़ा व्यापारिक समूह है, जिसमें अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और उरुग्वे शामिल हैं। यूरोपीय संघ ने लंबे समय से इस व्यापार समझौते को हाल ही में मंजूरी दे दी है। फ्रांस के कई राजनीतिक दलों का समर्थन है कि यह समझौता फ्रांसीसी किसानों, स्थानीय उद्योगों और खाद्य सुरक्षा मानकों के लिए हानिकारक हो सकता है। RN और LFI दोनों का आरोप है कि फ्रांस सरकार ने इस समझौते को रोकने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए। LFI ने तीखा बयान देते हुए कहा,
‘फ्रांस के कार्यकारी नेतृत्व ने इस समझौते को रोकने के लिए कभी गंभीर इच्छाशक्ति नहीं दिखाई।’
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संसद में दोपहर बाद होगा फैसला
इन दोनों अविश्वास समझौतों पर नेशनल असेंबली (निचला सदन) में दोपहर बाद चर्चा और वोटिंग होगी। हालांकि सोशलिस्ट पार्टी पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि वह इन समझौतों का समर्थन नहीं करेगी। वहीं रिपब्लिकन पार्टी ने भी मर्कोसुर मुद्दे पर सरकार को गिराने से इनकार कर दिया है। पार्टी नेता ब्रूनो रिटेल्यू ने साफ कहा कि,
‘फ्रांस में अविश्वास प्रस्ताव से कुछ हासिल नहीं होता। असली लड़ाई अब यूरोपीय संसद में लड़ी जाएगी।’
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अविश्वास के बाद अगला मोर्चा, 2026 का बजट
यदि अविश्वास प्रस्ताव विफल रहते हैं, तो सरकार का अगला बड़ा इम्तिहान होगा 2026 का बजट। फ्रांस इस समय भारी वित्तीय दबाव में है और बजट घाटा करीब 5% के आसपास बना हुआ है। सरकार के निष्पक्ष सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू सभी पक्षों से बातचीत के बाद बजट को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। लेकिन यदि सहमति नहीं बनी, तो सरकार अनुच्छेद 49.3 का सहारा ले सकती है।
Article 49.3 लोकतंत्र या मजबूरी?
अनुच्छेद 49.3 फ्रांस के संविधान का प्रावधान है, जिसके तहत सरकार के तहत संसद में वोट के बिना भी बजट या कानून पारित किया जा सकता है। हालांकि इसका इस्तेमाल से नामांकन को सरकार के खिलाफ फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाने का मौका मिल जाता है। सरकारी अधिकारियों का दावा है कि आरएन और एलएफआई को एग्रीमेंट के साथ एग्रीमेंट कर बजट पास के लिए आराम दिया जा सकता है, लेकिन यह राजनीतिक रूप से बेहद जोखिम भरा होगा।
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राष्ट्रपति मैक्रों की प्राथमिकता, स्थिरता
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों चाहते हैं कि किसी भी हाल में जनवरी तक बजट पास हो जाए। राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार मैक्रों इस बात को लेकर तत्स्थ हैं कि बजट किस रास्ते से पारित किया जाए, बस नतीजा निकलना चाहिए। सरकार की प्रवक्ता मौद ब्रेज़ों ने भी कहा है कि,
‘बजट पास करने के लिए कोई विकल्प खारिज नहीं किया गया है।’
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फ्रांस की सबसे बड़ी समस्या 2022 के चुनावों में बहुमत खोने के बाद से ही फ्रांस की राजनीति अस्थिर बनी हुई है। स्थिति तब और जटिल हो गई जब 2024 में अचानक कराए गए चुनावों के बाद संसद हंग पार्लियामेंट में बदल गई। आज फ्रांस की संसद तीन बड़े खेमों में बंटी हुई है,
- मैक्रों का सेंटर-राइट गठबंधन
- वामपंथी दल
- दक्षिणपंथी नेशनल रैली
इस बिखरी हुई राजनीति में हर कानून और हर बजट सरकार के लिए एक नई लड़ाई बन चुका है।
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संकट टला नहीं, सिर्फ टला हुआ है
रविवार को अविश्वास प्रस्ताव भले ही सरकार को गिरा न दिया जाए, लेकिन फ्रांस का राजनीतिक समझौता खत्म होने वाली नहीं है। मर्कोसुर एक्सेप्ट से लेकर 2026 के बजट तक, आने वाले दिन में कंपनी सरकार के लिए बेहद कठिन साबित हो सकती है। एक तरफ सरकार स्थिरता की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ सरकार दबाव की राजनीति को तेज कर रही है। सवाल यही है कि फ्रांस का राजनीतिक संतुलन क्या है, या आने वाले ग्रामीण में संकट और गहरा होगा?
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