Epstein Sex Scandal Files: अमेरिका में एक बार फिर वही नाम, वही फाइलें और वही सवाल—लेकिन इस बार पैमाना इतना बड़ा है कि पूरी दुनिया की निगाहें वॉशिंगटन पर टिकी हैं। जेफ्री एपस्टीन सेक्स स्कैंडल से जुड़े खुलासों का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और इस बार यह सिर्फ अटकलों या लीक हुई जानकारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी न्याय विभाग खुद आधिकारिक तौर पर लाखों दस्तावेज सार्वजनिक करने जा रहा है। डिप्टी अटॉर्नी जनरल Todd Blanche के बयान के बाद यह लगभग तय माना जा रहा है कि जिन नामों को अब तक “अफवाह” कहा जाता था, वे कागजों पर दर्ज होकर इतिहास का हिस्सा बनने वाले हैं। सवाल बस इतना है—क्या सच पूरी तरह सामने आएगा, या फिर ताकतवरों के लिए एक बार फिर काली स्याही तैयार है?

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अमेरिकी न्याय विभाग यानी Department of Justice के मुताबिक जिन फाइलों को जारी किया जाना है, उनमें हजारों पन्नों के दस्तावेज, करीब 95 हजार तस्वीरें, बैंक रिकॉर्ड्स, ट्रैवल लॉग्स और कई ऐसे सबूत शामिल हैं, जिनका जिक्र पिछले दो दशकों से अदालतों, मीडिया रिपोर्ट्स और पीड़ितों के बयानों में होता रहा है। लेकिन फर्क यह है कि इस बार सरकार को सिर्फ दस्तावेज जारी नहीं करने हैं, बल्कि यह भी बताना है कि क्या छुपाया गया, क्यों छुपाया गया और किसके कहने पर छुपाया गया। यानी पहली बार सिस्टम खुद कटघरे में खड़ा दिख रहा है—कम से कम कागजों में।
इससे ठीक पहले गुरुवार देर रात स्कैंडल से जुड़ी 68 नई तस्वीरें सामने आईं। इन्हें अमेरिकी संसद की House Oversight Committee के डेमोक्रेट सांसदों ने रिलीज किया। इन तस्वीरों ने फिर वही पुराना सवाल जिंदा कर दिया—क्या ताकतवर लोग सिर्फ पहचान के लिए इन तस्वीरों में थे या कहानी इससे कहीं ज्यादा गहरी है? तस्वीरों में जिन चेहरों ने दुनिया भर का ध्यान खींचा, उनमें माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक Bill Gates, गूगल के को-फाउंडर Sergey Brin, मशहूर फिल्ममेकर Woody Allen, दार्शनिक और विचारक Noam Chomsky और ट्रम्प के पूर्व सलाहकार Steve Bannon शामिल बताए गए। नाम बड़े हैं, पद ऊंचे हैं और प्रभाव इतना कि हर नाम अपने साथ दर्जनों सवाल लेकर आता है।
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सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह जनता को साफ-साफ बताए इन फाइलों में कौन से हिस्से ब्लैक आउट किए गए हैं और क्यों। क्या यह गोपनीयता की आड़ है, या फिर वही पुराना तर्क कि राष्ट्रीय सुरक्षा और “निजता” के नाम पर कुछ नामों को बचा लिया जाए? इसके अलावा सरकार को 15 दिनों के भीतर उन सभी सरकारी अधिकारियों और राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों की पूरी सूची भी देनी होगी, जिनका नाम या जिक्र किसी भी रूप में इन फाइलों में आता है। यही वह बिंदु है, जहां से यह मामला सिर्फ अपराध का नहीं, बल्कि सत्ता और सिस्टम का बन जाता है।

हालांकि यह भी सच है कि एपस्टीन केस से जुड़े हजारों दस्तावेज पहले ही सार्वजनिक हो चुके हैं। पिछले करीब 20 सालों में दीवानी मुकदमों, कोर्ट रिकॉर्ड्स और सूचना के अधिकार से जुड़े प्रयासों के जरिए बहुत कुछ सामने आया है। एपस्टीन की सहयोगी गिस्लीन मैक्सवेल का 2021 का आपराधिक ट्रायल, जस्टिस डिपार्टमेंट की रिपोर्टें, और कई पीड़ितों द्वारा दायर मुकदमे—इन सबने मिलकर इस कहानी का एक डरावना खाका पहले ही तैयार कर दिया था। लेकिन अब सवाल यह है कि क्या इस बार कोई नया नाम, कोई नया लिंक या कोई ऐसा सबूत सामने आएगा, जिसे अब तक दबाया गया?
इस साल की शुरुआत में जस्टिस डिपार्टमेंट और Federal Bureau of Investigation में ट्रम्प द्वारा नियुक्त अधिकारियों ने एपस्टीन से जुड़ी कुछ “सीक्रेट” फाइलें जारी की थीं। लेकिन आलोचकों का कहना था कि उनमें से ज्यादातर जानकारी पहले से ही सार्वजनिक थी। उस वक्त इसे पारदर्शिता नहीं, बल्कि दिखावा कहा गया। ट्रम्प प्रशासन पर आरोप लगे कि असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अधूरी सच्चाई परोसी गई।
इसी क्रम में जस्टिस डिपार्टमेंट ने गिस्लीन मैक्सवेल के साथ हुए अपने विवादित इंटरव्यू के सैकड़ों पन्ने भी जारी किए। मैक्सवेल—जिसे एपस्टीन का सबसे करीबी सहयोगी माना जाता है ने इन इंटरव्यू में खुद को पीड़ित बताने की कोशिश की और कई पीड़िताओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। लेकिन सवाल यह है कि क्या एक अपराधी की सफाई को उतनी ही गंभीरता से सुना जाना चाहिए, जितनी उन महिलाओं की गवाही को, जिन्होंने सालों तक डर और शर्म के साये में जिंदगी गुजारी?
दिसंबर के महीने में हाउस ओवरसाइट कमेटी के डेमोक्रेट सदस्यों ने 12 और 18 तारीख को एपस्टीन की संपत्ति से जुड़े कई दस्तावेज और तस्वीरें जारी की थीं। इन तस्वीरों में फिर से वही नाम उभरे और फिर से वही तर्क सुनाई दिया कि “सिर्फ तस्वीर में होना अपराध नहीं है।” यह दलील शायद कानूनी तौर पर सही हो सकती है, लेकिन नैतिक तौर पर यह सवाल छोड़ जाती है कि आखिर इतने ताकतवर लोग एक ऐसे शख्स के करीब क्यों थे, जिसकी जिंदगी ही अपराधों के इर्द-गिर्द घूमती थी?
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अगर हम इस कहानी की शुरुआत पर लौटें, तो साल 2005 का वह मामला आज भी रोंगटे खड़े कर देता है। फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उसकी बेटी को एपस्टीन के आलीशान घर में “मसाज” के बहाने बुलाया गया और वहां सेक्स के लिए मजबूर किया गया। यही वह बिंदु था, जहां से पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। जांच आगे बढ़ी तो यह साफ हो गया कि यह कोई अकेला मामला नहीं था। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने इसी तरह के आरोप लगाए।
पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने महीनों तक जांच की और क्रिमिनल केस तैयार किया। लेकिन यहां से कहानी ने एक अजीब मोड़ लिया। एपस्टीन का रसूख, उसका पैसा और उसके संपर्क इन सबने मिलकर कानून को बौना बना दिया। 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, वह भी ऐसी कि जेल से बाहर जाकर काम करने की छूट थी। सवाल उठता है अगर यही अपराध कोई आम आदमी करता, तो क्या उसे भी यही टरियायत” मिलती?
एपस्टीन की जिंदगी सिर्फ उसके घरों तक सीमित नहीं थी। मैनहट्टन और पाम बीच के आलीशान विला, निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’, और हाई-प्रोफाइल पार्टियां यह सब एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा था, जहां ताकत, पैसा और शोषण एक-दूसरे में घुल-मिल चुके थे। आरोप है कि एपस्टीन कम उम्र की लड़कियों को पैसों, गहनों और धमकियों के जरिए मजबूर करता था, और इसमें उसकी पार्टनर Ghislaine Maxwell उसका साथ देती थी। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं थी, बल्कि असलियत थी जिसे सालों तक नजरअंदाज किया गया।
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2009 में जेल से बाहर आने के बाद एपस्टीन ने लो प्रोफाइल रहने की कोशिश की। लेकिन किस्मत or कहें समाज का गुस्सा ने उसे ज्यादा वक्त नहीं दिया। 2017 में अमेरिका में मी टू मूवमेंट की लहर उठी। New York Times ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर Harvey Weinstein के खिलाफ रिपोर्ट्स छापीं और देखते ही देखते दुनिया भर में #MeToo ट्रेंड करने लगा। एंजेलीना जोली से लेकर सलमा हायेक तक, दर्जनों महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए।

इसी लहर में वर्जीनिया गिफ्रे Virginia Giuffre का नाम सामने आया। उसने दावा किया कि उसके साथ तीन साल तक यौन शोषण हुआ और वह अकेली नहीं थी। करीब 80 महिलाओं ने एपस्टीन के खिलाफ शिकायतें दर्ज कराईं। यह वह पल था, जब सिस्टम पर दबाव बढ़ा और एपस्टीन एक बार फिर जांच के घेरे में आया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अब, जब 68 नई तस्वीरें सामने आई हैं और लाखों दस्तावेज जारी होने वाले हैं, तो सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कौन दोषी है? असली सवाल यह है कि किसे बचाया गया?” क्या यह सिर्फ एक अपराधी की कहानी है, या फिर एक ऐसे नेटवर्क की, जहां सत्ता, पैसा और चुप्पी ने मिलकर इंसाफ को सालों तक कैद रखा? और जब नामों की सूची सामने आएगी, तो क्या हम उन्हें सिर्फ खबर बनाकर आगे बढ़ जाएंगे, या फिर जवाबदेही की मांग करेंगे?
सच कहें तो यह मामला सिर्फ कानून की किताबों का नहीं है, यह समाज के आईने का है। यहां हर वह चेहरा जो इन फाइलों में दर्ज है, अपने साथ एक सवाल लेकर खड़ा है। सवाल यह नहीं कि वे दोषी साबित होंगे या नहीं सवाल यह है कि क्या दुनिया अब भी आंखें बंद रखेगी? क्योंकि हर बार जब कोई ताकतवर बच निकलता है, तो सिस्टम खुद पर एक और दाग लगा लेता है। और शायद यही एपस्टीन स्कैंडल का सबसे बड़ा सच है।
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