Skip to content
By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
TV Today BharatTV Today BharatTV Today Bharat
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • राज्य-शहर
    • उत्तर प्रदेश
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • झारखंड
    • मध्य प्रदेश
    • बिहार
    • जम्मू-कश्मीर
    • दिल्ली
  • ताजा खबर
  • क्राइम
  • राष्ट्रीय
  • खेल
  • इंटरनेशनल न्यूज़
  • बिज़नेस
  • आस्था
  • हेल्थ
  • टेक्नोलॉजी
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • मनोरंजन
Reading: Atal Bihari Vajpayee: वाजपेयी की कविता ‘मौत से ठन गई’ के पीछे छुपी दर्दभरी दास्तान, राजनीति के सबसे संवेदनशील क्षण
Share
Font ResizerAa
TV Today BharatTV Today Bharat
Search
  • होम
  • राज्य-शहर
    • उत्तर प्रदेश
    • हरियाणा
    • पंजाब
    • राजस्थान
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • छत्तीसगढ़
    • हिमाचल प्रदेश
    • झारखंड
    • मध्य प्रदेश
    • बिहार
    • जम्मू-कश्मीर
    • दिल्ली
  • ताजा खबर
  • क्राइम
  • राष्ट्रीय
  • खेल
  • इंटरनेशनल न्यूज़
  • बिज़नेस
  • आस्था
  • हेल्थ
  • टेक्नोलॉजी
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
  • मनोरंजन
Follow US

Home - Atal Bihari Vajpayee: वाजपेयी की कविता ‘मौत से ठन गई’ के पीछे छुपी दर्दभरी दास्तान, राजनीति के सबसे संवेदनशील क्षण

GOOD NEWSNationalPoliticsविश्लेषण ब्लॉग

Atal Bihari Vajpayee: वाजपेयी की कविता ‘मौत से ठन गई’ के पीछे छुपी दर्दभरी दास्तान, राजनीति के सबसे संवेदनशील क्षण

"राजीव गांधी की करुणा, अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी"

Last updated: अक्टूबर 3, 2025 1:54 अपराह्न
KARTIK SHARMA - Sub Editor Published अक्टूबर 3, 2025
Share
“किडनी ट्रांसप्लांट ने जोड़ा सत्ता और विपक्ष को एक धागे में”
1988 की दौड़ - किडनी ट्रांसप्लांट और दो राजनीतिक महापुरुषों का अनमोल रिश्ता।स्रोत: विश्लेषण टीम द्वारा लिखा गया
SHARE
Highlights
  • राजनीति से ऊपर उठी इंसानियत की हस्ती"
  • जब विरोधिता बनी एक-दूसरे की जान की वजह
  • राजीव गांधी की करुणा, अटल बिहारी वाजपेयी की जिंदगी
  • राजनीति से परे, मानवता का राज
  • एक प्रधानमंत्री, एक विपक्षी और जीवन बचाने वाला रिश्ता


Rajiv Gandhi: भारतीय राजनीति के इतिहास में जब-जब झांकी देखते हैं, तो अक्सर हमारे सामने टकराव, कड़वाहट और कटु बयानबाजी वाले दृश्य ही आते हैं। सत्ता और विपक्ष के बीच तल्खी हमेशा दिखाई देती है। लेकिन इसी राजनीति के इतिहास में कुछ ऐसे पल भी दर्ज हैं, जो यह दिखाते हैं कि इंसानियत राजनीति के आगे खड़ी होती है। यह कहानी है, 1980 के दशक के अंत की—राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के बीच की।

Contents
पृष्ठभूमि और दौरबीमारी की घड़ीराजीव गांधी का फैसलान्यूयॉर्क का इलाज और “मौत से ठन गई”प्रचार नहीं, संबंधों की मिसालवाजपेयी की स्वीकारोक्तिचुनावी मंच पर जोखिमभरी तारीफरिश्ता नेहरू-गांधी परिवार के साथआज के लिए सबक

READ MORE: वृन्दावन में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का भव्य स्वागत, श्रद्धा और उत्साह का संगम

पृष्ठभूमि और दौर

राजीव गांधी उस वक्त देश के प्रधानमंत्री थे। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वे अचानक सत्ता में आए थे और देश को एक नई दिशा देने की कोशिश कर रहे थे। दूसरी तरफ अटल बिहारी वाजपेयी—उस दौर में भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े चेहरे, लेकिन संसद में उनका कद उस वक्त इतना बड़ा नहीं था, जितना बाद में हुआ।
1984 में जब कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और भाजपा मात्र दो सीटों पर सिमट गई, तो वाजपेयी ग्वालियर से भी चुनाव हार गए। ऐसे में संसदीय राजनीति तो उनके पास राज्यसभा के जरिये थी, लेकिन निजी जीवन में वे आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य से जूझ रहे थे।

READ MORE: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा, पीएम मोदी ने जारी किया 100 का सिक्का

बीमारी की घड़ी

वाजपेयी को किडनी की गंभीर बीमारी हो गई। इलाज आसान नहीं था। भारत में उस दौर में न डायलिसिस की सुविधा व्यापक रूप से उपलब्ध थी और न ही किडनी ट्रांसप्लांट का आधुनिक विकल्प। डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि अमेरिका जाकर ही बेहतर इलाज हो सकता है। मगर सवाल था—जाएंगे कैसे? विदेशी इलाज खर्च का बोझ उठाना किसी एक इंसान के बस की बात नहीं थी, खासकर तब जब वाजपेयी खुद आर्थिक संकट से गुजर रहे थे।

राजीव गांधी का फैसला

यहीं से इस कहानी का असली मोड़ शुरू होता है। प्रधानमंत्री राजीव गांधी को जब इस मसले की जानकारी दी गई, तो उन्होंने एक पल के लिए भी राजनीति और विपक्षी पहचान को आड़े नहीं आने दिया। राजीव गांधी ने तत्काल फैसला किया कि वाजपेयी को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनाया जाए। यह आधिकारिक अमेरिकी यात्रा होती, और सारा खर्च सरकार उठाती।
कहने को यह महज एक सरकारी प्रक्रिया थी, मगर भीतर यह कदम इंसानियत का था। राजनीति में अपने सबसे बड़े आलोचक और प्रतिद्वंद्वी को जीवनदान देने जैसा था।

READ MORE: पवन सिंह और बीजेपी का झगड़ा, चुनाव से पहले कैसे दूर हुई नाराजगी ?

न्यूयॉर्क का इलाज और “मौत से ठन गई”

सरकारी दौरे के बहाने वाजपेयी अमेरिका पहुंचे। न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में उनका इलाज हुआ। किडनी ऑपरेशन हुआ और सफल भी रहा। वाजपेयी का जीवन बच गया।
वहीं अस्पताल के बिस्तर पर लेटे-लेटे, मौत से आंख मिलाते हुए उन्होंने वह प्रसिद्ध कविता लिखी—”मौत से ठन गई”। यह कविता एक नेता के ही नहीं, बल्कि एक आम इंसान के जीवन से संघर्ष की गवाही बन गई।

प्रचार नहीं, संबंधों की मिसाल

दिलचस्प बात यह थी कि राजीव गांधी ने अपनी इस मदद को कभी सार्वजनिक नहीं किया। न मंच से कहा, न अखबारों में इसकी सुर्खियां बनवाईं। यह उस दौर का राजनीतिक संस्कार था—जहां मानवीय संवेदना को दिखावा नहीं, बल्कि निजी रिश्तों की तरह निभाया जाता था।
दूसरी तरफ वाजपेयी ने इसे अपने दिल में हमेशा संजो कर रखा। उन्होंने कई दफा अपनी कविताओं और भाषणों में इशारों में इसका जिक्र किया। लेकिन खुलकर अपने दिल की बात तब कही, जब 1991 में राजीव गांधी की हत्या हो गई।

वाजपेयी की स्वीकारोक्ति

राजीव गांधी की हत्या के बाद पूरा देश स्तब्ध था। एक ऐसा नेता जिसने आधुनिक भारत को कंप्यूटर और संचार तकनीक की दिशा दी, असमय दुनिया छोड़ गया। उस समय अटल बिहारी वाजपेयी बेहद भावुक हुए।
करण थापर के कार्यक्रम ‘Eyewitness’ में उन्होंने पहली बार राज खोला। उनका वाक्य आज भी गूंजता है—”अगर आज मैं जिंदा हूं, तो राजीव गांधी की वजह से।”
यह वाक्य न केवल कृतज्ञता दिखाता है, बल्कि यह कहता है कि राजनीति से ऊपर इंसानियत की एक डोर होती है, जो सबसे मजबूत होती है।

READ MORE: यूनाइटेड नेशंस में कश्मीर की आवाज बनीं तस्लीमा अख्तर

चुनावी मंच पर जोखिमभरी तारीफ

1991 के आम चुनाव के दौरान भी वाजपेयी ने राजीव गांधी की उदारता का उल्लेख किया। यह करना उस दौर में आसान नहीं था, क्योंकि राजनीति में विपक्षी नेता की तारीफ करना अक्सर अपने ही दल के भीतर सवाल खड़े कर देता है। मगर वाजपेयी ने यह जोखिम लिया। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी ने उन्हें “छोटे भाई” की तरह माना और जीवन बचाने में मदद की।

रिश्ता नेहरू-गांधी परिवार के साथ

यहां यह भी याद करना जरूरी है कि अटल बिहारी वाजपेयी का नेहरू-गांधी परिवार के साथ रिश्ता केवल विरोध का नहीं था। इंदिरा गांधी के बारे में 1971 के युद्ध के बाद उन्होंने कहा था कि उन्होंने “दुर्गा” का रूप धारण किया है।
इसी कड़ी में राजीव गांधी के प्रति उनका यह स्वीकारोक्ति भरा सम्मान सिर्फ एक इंसानी रिश्ते का नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति के उस दौर की झलक थी, जहां विरोधी दलों में भी व्यक्तिगत स्तर पर गहरा सम्मान दिखता था।

आज के लिए सबक

आज जब भारतीय राजनीति का मिजाज देखिए—तो यह घटना किसी लोककथा जैसी लगती है। आज के दिन सत्ता और विपक्ष के नेताओं का संवाद सोशल मीडिया की कटु राजनीति तक सिमट गया है। आरोप-प्रत्यारोप और नफ़रत का बोलबाला है।
ऐसे में 1980 के दशक की यह घटना हमें याद कराती है कि राजनीति केवल कुर्सी की लड़ाई नहीं है। राजनीति के भीतर भी इंसानियत जिंदा रहती है। राजीव गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी का यह प्रसंग भारतीय राजनीति का स्वर्णिम पन्ना है, जो यह बताता है कि विरोधाभासों के बावजूद सहयोग और उदारता हमेशा सम्मानित होती है।

READ MORE: “डेंटिंग-पेंटिंग की राजनीति, बरेली से निकला सबक” मौलाना भूल गये हैं किसकी सरकार है

एक प्रधानमंत्री, जिसने अपने सबसे बड़े विपक्षी की जान बचाने के लिए व्यवस्था की। एक विपक्षी नेता, जिसने अपनी पूरी जिंदगी उस उपकार को नहीं भूला। यही है भारतीय राजनीति का वह मानवीय पहलू, जिसे आज दोहराने की जरूरत है।
राजनीति में विचारधारा और सत्ता बदलती रहती है, लेकिन इंसानियत और रिश्ते—वही स्थायी मूल्य हैं। अटल बिहारी वाजपेयी और राजीव गांधी की यह कहानी हमें यही सिखाती है कि राजनीति से ऊपर उठकर भी “इंसान” बने रहना ही असली नेतृत्व की पहचान है।

Follow Us: YouTube| Tv today Bharat Live | Breaking Hindi News Live | Website: Tv Today Bharat|  X  | FaceBook | Quora| Linkedin | tumblr | whatsapp Channel | Telegram

You Might Also Like

West Bengal SIR Voter List: 61 लाख ‘अंडर एडजुडिकेशन’ वोटर, न्यायिक मंजूरी के बाद ही मिलेगा मतदान अधिकार

Middle East Conflict: भारत के एयरपोर्ट हाई अलर्ट पर, ईरान में फंसे छात्रों की सुरक्षित वापसी प्राथमिकता

Narendra Modi Israel Visit: नेसेट में गूंजा भारत का संदेश, पक्ष-विपक्ष ने एक साथ किया स्वागत

NCERT Book Controversy: किताब विवाद पर NCERT की बिना शर्त माफी, सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत स्वीकार करने से किया इनकार

PM Modi Israel Visit: पीएम मोदी के इजराइल दौरे से पहले सियासी घमासान, नेसेट संबोधन पर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने

Quick Link

  • Contact Us
  • Blog Index
TAGGED:1980s Indian politicsAtal Bihari Vajpayeehuman values in politicsIndia politicsIndia-US medical treatmentIndian Prime Ministerkidney transplantkidney treatmentMount Sinai hospitalpolitical compassionpolitical kindnessRajiv GandhiRajiv Gandhi generosityVajpayee kidney ailment
Share This Article
Facebook Twitter Email Print
Leave a comment

प्रातिक्रिया दे जवाब रद्द करें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Char Dham Yatra 2026
Uttarakhand

Char Dham Yatra 2026: यात्रा से पहले GMVN को 2.5 करोड़ की एडवांस बुकिंग, सीजन को लेकर बढ़ी उम्मीदें

मार्च 1, 2026
Sovereign AI
Technology

Sovereign AI: ‘सॉवरेन एआई’ के जरिए तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता भारत

मार्च 1, 2026
Iran US Israel War
International

Iran-US-Israel War: हमलों के बाद मुस्लिम देशों की चुप्पी, क्यों बढ़ी Iran की कूटनीतिक तन्हाई?

मार्च 1, 2026
Karachi Violence
International

Karachi Violence: Ali Khamenei की मौत के बाद पाकिस्तान में उबाल, Karachi में हिंसक प्रदर्शन, राजनयिक क्षेत्र के पास तनाव

मार्च 1, 2026
CENTCOM
International

CENTCOM: US-Iran War के बीच चर्चा में CENTCOM, किसने बनाई यह फोर्स, कहां है तैनाती और कैसे करती है काम?

मार्च 1, 2026
Ali Khamenei Death
International

Ali Khamenei Death: मौत की आधिकारिक पुष्टि, ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक, तेहरान से कर्बला तक उमड़ा जनसैलाब

मार्च 1, 2026

TVTodayBharat एक डिजिटल-फर्स्ट हिंदी समाचार मंच है, जहाँ हम ताज़ा खबरें, राष्ट्रीय व राज्यीय अपडेट, खेल, मनोरंजन, टेक, हेल्थ, एजुकेशन और लाइफ़स्टाइल जैसी श्रेणियों में तेज़, सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग पेश करते हैं। हमारा उद्देश्य सरल भाषा में भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना, हर खबर के संदर्भ और तथ्य स्पष्ट करना, और ज़रूरत पड़ने पर समय पर सुधार प्रकाशित करना है। हम सनसनी से दूर रहते हुए प्रमाणित स्रोतों, डेटा और ग्राउंड इनपुट पर आधारित पत्रकारिता करते हैं, ताकि आप एक ही जगह पर विश्वसनीय समाचार, विश्लेषण, फोटो-वीडियो और वेब स्टोरीज़ पा सकें।

  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Editorial Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions

TVTodayBharat एक डिजिटल-फर्स्ट हिंदी समाचार मंच है, जहाँ हम ताज़ा खबरें, राष्ट्रीय व राज्यीय अपडेट, खेल, मनोरंजन, टेक, हेल्थ, एजुकेशन और लाइफ़स्टाइल जैसी श्रेणियों में तेज़, सटीक और संतुलित रिपोर्टिंग पेश करते हैं। हमारा उद्देश्य सरल भाषा में भरोसेमंद जानकारी पहुँचाना, हर खबर के संदर्भ और तथ्य स्पष्ट करना, और ज़रूरत पड़ने पर समय पर सुधार प्रकाशित करना है। हम सनसनी से दूर रहते हुए प्रमाणित स्रोतों, डेटा और ग्राउंड इनपुट पर आधारित पत्रकारिता करते हैं, ताकि आप एक ही जगह पर विश्वसनीय समाचार, विश्लेषण, फोटो-वीडियो और वेब स्टोरीज़ पा सकें।

  • Contact Us
  • Privacy Policy
  • Editorial Policy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
© TVTodayBharat | Design by Vivek
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?