FRCP London New Fellows Ceremony 2026: कभी कभी किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि पूरे समाज के आत्मविश्वास को नई ऊंचाई देती है। कभी कभी किसी डॉक्टर की मेहनत, सिर्फ चिकित्सा जगत की प्रगति का दस्तावेज़ नहीं बनती, बल्कि यह बताती है कि मानवता की सेवा करने वालों का रास्ता भले कठिन हो, लेकिन उनकी मंज़िल जगमगाती है। डॉक्टर अनिल प्रसाद भट्ट को रॉयल कॉलेज ऑफ फिज़िशियंस, लंदन (FRCP–London) का फेलो चुना जाना एक ऐसी ही कहानी है।
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यह सम्मान केवल एक पदवी नहीं, बल्कि उस यात्रा का प्रमाण है जिसमें नेफ्रोलॉजी, डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट जैसे जटिल क्षेत्र में वर्षों की साधना, संघर्ष और संवेदना शामिल है। डॉक्टर भट्ट ने जब यह घोषणा की कि वे 9 जून 2026 को लंदन में होने वाले New Fellows Ceremony में हिस्सा लेने जा रहे हैं, तो यह सिर्फ उनका उत्साह नहीं था. यह उन हज़ारों मरीजों की मुस्कान का उत्सव था, जो उनकी वजह से ज़िंदगी की ओर लौटे।

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डॉ भट्ट कहते हैं,
‘यह सम्मान मेरे नेफ्रोलॉजी, डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट के काम की सराहना है। मैं अपने मरीजों, अपनी टीम, साथ काम करने वाले सभी डॉक्टरों और अपने परिवार का दिल से धन्यवाद करता हूं। मैं 9 जून 2026 को लंदन में होने वाले न्यू फेलोज़ समारोह में शामिल होने वाला हूं, जिसका मुझे बेसब्री से इंतज़ार है। मैं खुद को बहुत सौभाग्यशाली और आभारी महसूस कर रहा हूं।‘
क्योंकि डॉक्टर का काम सिर्फ ऑपरेशन थिएटर या दवाइयों की सूची से तय नहीं होता। डॉक्टर का काम तय होता है उस भरोसे से, जिसके सहारे मरीज अपनी कमजोरी को किसी दूसरे इंसान के हाथों सौंप देता है। डॉक्टर भट्ट के लिए यह भरोसा कोई अचानक नहीं आया। यह बना उनकी टीम के साथ मिलकर की गई अनगिनत रातों की ड्यूटी में, कठिन परिस्थितियों में ली गई निर्णायक कॉलों में, और हर उस परिवार के आंसू पोंछने में, जिसने अस्पताल को उम्मीद की अंतिम जगह मानकर प्रवेश किया था।
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आज जब स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार सवाल उठते हैं, तब डॉक्टर भट्ट जैसा नाम यह एहसास दिलाता है कि चिकित्सा सिर्फ एक पेशा नहीं मानवता की रक्षा का अनुशासन है। FRCP जैसा सम्मान, दुनिया के शीर्ष मेडिकल संस्थानों में से एक द्वारा दिया गया यह भरोसा, बताता है कि भारत की चिकित्सा क्षमता किसी भी वैश्विक मंच से कम नहीं है।
लेकिन शायद इस कहानी का सबसे मानवीय हिस्सा वह है, जब डॉक्टर भट्ट अपने मरीजों, अपनी टीम, अपने सहकर्मियों और अपने परिवार का दिल से आभार व्यक्त करते हैं। यह आभार किसी औपचारिक बयान जैसा नहीं लगता… बल्कि उस व्यक्ति की आवाज़ लगता है जिसने अपना जीवन रोगियों की सेवा में लगा दिया और फिर भी यह मानता है कि असल श्रेय अकेले उसका नहीं है।
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अक्सर कहा जाता हैं कि, ‘किसी उपलब्धि का अर्थ तभी होता है जब वह समाज की उम्मीदों को बड़ा करती है।‘ डॉक्टर अनिल प्रसाद भट्ट की यह उपलब्धि, वही अर्थ लेकर आती है। यह उपलब्धि भारत के चिकित्सा क्षेत्र की ताकत का प्रमाण है, और साथ ही यह याद दिलाती है कि समर्पण की यात्रा में न कोई शॉर्टकट होता है, न कोई आसान मोड़।
और इसलिए यह सिर्फ एक डॉक्टर की सफलता नहीं, यह उस भाव का उत्सव है, जो कहता है दर्द को हराने वाले हाथ, जब सम्मान पाते हैं, तो दुनिया थोड़ी और बेहतर हो जाती है।
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