Smartphone Screen Time and Spondylitis: आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी ज़िंदगी का सबसे ज़रूरी हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलते ही नोटिफिकेशन चेक करना, ऑफिस का काम, सोशल मीडिया, वीडियो स्ट्रीमिंग और ऑनलाइन गेमिंग—हर गतिविधि स्क्रीन के इर्द-गिर्द घूम रही है। लेकिन जिस स्मार्टफोन ने जीवन को आसान बनाया है, वही अब धीरे-धीरे हमारी सेहत का दुश्मन बनता जा रहा है। खासतौर पर लंबी स्क्रीन टाइमिंग रीढ़ और गर्दन से जुड़ी गंभीर समस्या स्पॉन्डिलाइटिस का बड़ा कारण बन रही है।
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क्या है स्पॉन्डिलाइटिस?
स्पॉन्डिलाइटिस एक ऐसी स्थिति है जिसमें गर्दन, कंधे या रीढ़ की हड्डी में लगातार दर्द, अकड़न और सूजन बनी रहती है। पहले यह समस्या अधिकतर बुजुर्गों या शारीरिक मेहनत करने वालों में देखी जाती थी, लेकिन अब युवा और यहां तक कि किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है घंटों तक गलत पोस्चर में मोबाइल या लैपटॉप का इस्तेमाल।
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स्मार्टफोन और गर्दन पर दबाव
जब हम मोबाइल देखते हैं, तो सामान्य स्थिति में सिर आगे की ओर झुक जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीधा सिर करीब 5 किलो का दबाव डालता है, लेकिन जैसे ही सिर आगे झुकता है, यह दबाव कई गुना बढ़ जाता है। लंबे समय तक यही स्थिति बनी रहे तो गर्दन की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और रीढ़ पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। यही आदत आगे चलकर सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस या कमर से जुड़ी समस्याओं को जन्म देती है।
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बढ़ता स्क्रीन टाइम और बदलती जीवनशैली
वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन पढ़ाई और डिजिटल मनोरंजन के चलते लोगों का स्क्रीन टाइम पहले के मुकाबले कई गुना बढ़ गया है। लगातार बैठकर मोबाइल स्क्रॉल करना, बिना ब्रेक के वीडियो देखना और देर रात तक फोन इस्तेमाल करना शरीर की प्राकृतिक गतिविधियों को बाधित करता है। नतीजा गर्दन दर्द, पीठ दर्द, सिरदर्द और धीरे-धीरे स्पॉन्डिलाइटिस जैसी गंभीर समस्या।
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शुरुआती लक्षण जिन्हें न करें नजरअंदाज
स्पॉन्डिलाइटिस की शुरुआत अक्सर मामूली लक्षणों से होती है, जिन्हें लोग थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। गर्दन में जकड़न, कंधों में दर्द, सुबह उठते समय अकड़न, लंबे समय तक बैठने के बाद पीठ में खिंचाव—ये सभी संकेत हो सकते हैं कि आपकी रीढ़ पर स्क्रीन टाइम का असर पड़ रहा है।
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बचाव ही है सबसे बेहतर इलाज
स्पॉन्डिलाइटिस से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करना। हर 30–40 मिनट में ब्रेक लेना, गर्दन और कंधों की हल्की स्ट्रेचिंग करना बेहद फायदेमंद है। मोबाइल को आंखों के स्तर पर रखने की आदत डालें ताकि गर्दन झुकानी न पड़े। बैठने की सही मुद्रा अपनाएं और कुर्सी-टेबल की ऊंचाई शरीर के अनुसार रखें।
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योग और एक्सरसाइज की भूमिका
नियमित योग और व्यायाम स्पॉन्डिलाइटिस के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं। गर्दन घुमाने की एक्सरसाइज, भुजंगासन, ताड़ासन और प्राणायाम रीढ़ को मजबूत बनाते हैं। साथ ही, रोजाना थोड़ी देर टहलना भी शरीर को एक्टिव रखता है और मांसपेशियों की जकड़न कम करता है।
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स्मार्टफोन का समझदारी से इस्तेमाल जरूरी
स्मार्टफोन को पूरी तरह छोड़ना संभव नहीं है, लेकिन इसका संतुलित और समझदारी से उपयोग ही आपकी सेहत की रक्षा कर सकता है। समय पर सोना, फोन से दूरी बनाकर आराम देना और डिजिटल डिटॉक्स जैसी आदतें अपनाना बेहद जरूरी हो गया है। आज स्मार्टफोन सुविधा है, लेकिन लापरवाही बरती गई तो यही सुविधा गंभीर बीमारी में बदल सकती है। लंबी स्क्रीन टाइमिंग से बढ़ता स्पॉन्डिलाइटिस का खतरा एक चेतावनी है कि अब अपनी डिजिटल आदतों पर नियंत्रण करना जरूरी है। सही पोस्चर, सीमित स्क्रीन टाइम और सक्रिय जीवनशैली अपनाकर हम इस डिजिटल दुश्मन से अपनी सेहत को बचा सकते हैं।
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