Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana: हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक अहम कदम उठाते हुए Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana का दायरा बढ़ा दिया है। अब इस योजना के तहत विधवा महिलाओं की बेटियों को न केवल प्रदेश के भीतर बल्कि राज्य से बाहर उच्च एवं व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार का कहना है कि यह निर्णय शिक्षा की सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करने और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है।
मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu ने कहा कि सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के तहत समाज के वंचित वर्गों के लिए ठोस और परिणामकारी नीतियां लागू कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
27 वर्ष तक मिलेगा लाभ
संशोधित प्रावधानों के अनुसार अब पात्र विधवाओं की बेटियों को 27 वर्ष की आयु तक Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana का लाभ दिया जाएगा। पहले यह सहायता सीमित आयु तक उपलब्ध थी, लेकिन अब उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए आयु सीमा बढ़ाई गई है।
सरकार का मानना है कि कई छात्राएं 18 वर्ष के बाद स्नातक, परास्नातक या प्रोफेशनल कोर्स में प्रवेश लेती हैं। ऐसे में आर्थिक सहायता का दायरा बढ़ाना समय की मांग थी। इस बदलाव से सैकड़ों छात्राओं को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।
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बाहर पढ़ने वाली छात्राओं को भी राहत
Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana के तहत अब राज्य से बाहर सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम कर रही छात्राओं को किराया या पीजी आवास शुल्क के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी। अधिकतम 10 महीनों तक प्रति माह 3,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। यह सुविधा उन छात्राओं को मिलेगी जिन्हें सरकारी छात्रावास उपलब्ध नहीं है।
सरकार का कहना है कि कई प्रतिभाशाली छात्राएं बेहतर अवसरों के लिए दूसरे राज्यों के प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला लेती हैं, लेकिन आवास और अन्य खर्च उनके लिए चुनौती बन जाते हैं। नई व्यवस्था से इन छात्राओं को आर्थिक संबल मिलेगा।
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कई पेशेवर पाठ्यक्रम शामिल
Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana में इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, व्यवसाय प्रबंधन, चिकित्सा एवं संबद्ध स्वास्थ्य विज्ञान, विधि, कंप्यूटर एप्लीकेशन, आईटी सर्टिफिकेशन, शिक्षा एवं मानविकी जैसे विषयों को शामिल किया गया है। इसके अलावा राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) द्वारा संचालित पाठ्यक्रम, शिल्पकार प्रशिक्षण योजना और सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के कार्यक्रम भी इसके दायरे में आते हैं।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि छात्राएं केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि तकनीकी और कौशल आधारित पाठ्यक्रमों में भी आगे बढ़ सकें।
वर्तमान लाभार्थी और बजट प्रावधान
वर्तमान में 18 से 27 वर्ष आयु वर्ग की 504 छात्राएं इस Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana का लाभ उठा रही हैं। अनुमान है कि विस्तारित प्रावधानों के बाद इनकी संख्या और बढ़ेगी। सरकार के अनुसार लगभग 20 प्रतिशत छात्राएं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों का चयन कर सकती हैं, जिसके लिए करीब एक करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक बजट निर्धारित किया गया है।
वित्त वर्ष के लिए योजना के अंतर्गत 31.01 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। 3 फरवरी 2026 तक 22.96 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जो यह दर्शाता है कि योजना का क्रियान्वयन सक्रिय रूप से हो रहा है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण पर फोकस
यह Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। विधवा, निराश्रित या तलाकशुदा महिलाओं और दिव्यांग अभिभावकों के बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्र में भी सहयोग दिया जाता है। राज्य के सरकारी संस्थानों में पढ़ने वाले लाभार्थियों की ट्यूशन फीस, छात्रावास शुल्क और अन्य शैक्षणिक व्यय भी सरकार वहन कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक अभाव के कारण न रुके। उन्होंने समाज से भी अपील की कि शिक्षा को अधिकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखें।
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सामाजिक बदलाव की दिशा में पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की योजनाएं केवल आर्थिक सहायता नहीं देतीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का माध्यम बनती हैं। जब एक लड़की उच्च शिक्षा प्राप्त करती है, तो उसका प्रभाव पूरे परिवार और समुदाय पर पड़ता है।
Indira Gandhi Sukh Shiksha Yojana का विस्तार इसी सोच को मजबूत करता है। सरकार को उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में इससे राज्य में उच्च शिक्षा का स्तर और महिला साक्षरता दर दोनों में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।
हिमाचल प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में यह कदम एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, जो वंचित वर्गों को नए अवसर प्रदान करेगा और राज्य को सामाजिक न्याय की दिशा में आगे बढ़ाएगा।
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