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Home - Pakistan Minority Rights Record: पाकिस्तान को भारत का दो-टूक जवाब, पहले अपने यहां अल्पसंख्यकों की हालत देखे, फिर दूसरों पर उंगली उठाए

DiplomacyNationalहोम

Pakistan Minority Rights Record: पाकिस्तान को भारत का दो-टूक जवाब, पहले अपने यहां अल्पसंख्यकों की हालत देखे, फिर दूसरों पर उंगली उठाए

पहले अपने गिरेबान में झांकिए, फिर भारत पर सवाल उठाइए

Last updated: मार्च 11, 2026 4:10 अपराह्न
Saloni Sharma Published जनवरी 9, 2026
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India rejects Pakistan’s claims on minority rights as MEA spokesperson Randhir Jaiswal addresses media briefing
Pakistan raises questions on minority rights, India gives a sharp reply—first fix your own record before pointing fingers at others.TV Today Bharat Live
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Highlights
  • पाकिस्तान के आरोपों पर भारत का सख्त और साफ जवाब
  • अवैध अतिक्रमण बनाम अल्पसंख्यक मुद्दा सच क्या है
  • पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हकीकत और डरावने आंकड़े
  • ब्लास्फेमी कानून और जबरन धर्मांतरण की काली सच्चाई
  • नैतिकता का सवाल, किसे दूसरों पर बोलने का हक?

Pakistan minority rights record: इंडिया ने एक बार फिर पाकिस्तान को सीधा और दो-टूक जवाब दिया है। इस बार मुद्दा है माइनॉरिटी राइट्स का, जहाँ पाकिस्तान ने हमेशा की तरह उंगली उठाने की कोशिश की, और भारत ने बिना किसी घूम-फिराव की याद दिला दी कि पहले अपना घर संभालो। मिनिस्ट्री ऑफ़ एक्सटर्नल अफेयर्स के स्पोक्सपर्सन रणधीर जायसवाल ने वीकली ब्रीफिंग में साफ कहा कि पाकिस्तान को माइनॉरिटी इश्यूज पर बोलने का कोई मोरल राइट नहीं है। उनके शब्दों में, मैं उस देश में माइनॉरिटीज की सिचुएशन पर विस्तार से बात करने की ज़रूरत नहीं समझता। जो लोग दूसरों पर टिप्पणी करते हैं, उन्हें पहले अपना रिकॉर्ड देखना चाहिए।

पाकिस्तान का विरोध और भारत का काउंटर

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब पाकिस्तान फॉरेन ऑफिस के स्पोक्सपर्सन ताहिर अंद्राबी ने दिल्ली के तुर्कमान गेट एरिया में फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास हुई डिमोलिशन ड्राइव पर सवाल उठाए। पाकिस्तान ने इसे माइनॉरिटी टारगेटिंग के तौर पर प्रोजेक्ट करने की कोशिश की। लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ और थी। दिल्ली म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के मुताबिक, यह ड्राइव किसी धर्म या कम्युनिटी के खिलाफ नहीं थी, बाल्की गैर-कानूनी कब्जे हटाने की गई थी, और यह पूरी तरह दिल्ली हाई कोर्ट के डायरेक्शन के मुताबिक थी। यानी कानून के दायरे में रहकर एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन लिया गया।

पाकिस्तान की पुरानी आदत

सच यह है कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड रहा है जब भी घरेलू दबाव बढ़ता है, या अपनी नाकामी छुपानी होती है, तो भारत पर विरोध लगा दो। पिछले महीने भी जब पाकिस्तान ने माइनॉरिटीज़ पर हिंसा के आरोप लगाए थे, भारत ने उन्हें बहुत खराब रिकॉर्ड यानी बहुत शर्मिंदगी वाला ट्रैक रिकॉर्ड याद दिला दिया था। MEA ने तब भी कहा था कि पाकिस्तान में धार्मिक माइनॉरिटीज़ का सिस्टेमिक परसेक्यूशन एक जानी-मानी बात है, जिसे बाहर के विरोध लगाकर धक्का नहीं दे सकते।

अयोध्या पर भी बोलने की कोशिश

नवंबर में भी ऐसा ही हुआ था, जब पाकिस्तान ने अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर पर झंडा फहराने को लेकर चेतावनी दी थी। उस वक़्त भी रणधीर जायसवाल ने कड़क अंदाज़ में कहा था कि जिसका रिकॉर्ड कट्टरता, दमन और सिस्टमिक बुरे बर्ताव से भरा हो, उसे दूसरों को लेक्चर देने का कोई हक़ नहीं है। संदेश बिल्कुल साफ़ था भारत अपने अंदरूनी मामलों पर किसी बाहरी दखल को मंज़ूर नहीं करेगा।

पाकिस्तान माय माइनॉरिटी रियलिटी

अगर हम पाकिस्तान की असली तस्वीर देखें, तो वहाँ की इंडिपेंडेंट रिपोर्ट्स और डेटा बहुत कुछ कह जाते हैं। नई दिल्ली बेस्ड इंटरनेशनल सेंटर फॉर पीस स्टडीज़ की रिपोर्ट्स बताती हैं कि पाकिस्तान में धर्म को पॉलिटिकल टूल बना दिया गया है, और कुछ कम्युनिटीज़ को जान-बूझकर बाहरी लोगों के रूप में दिखाया जाता है। यह सिर्फ़ परसेप्शन नहीं है, बाल्की डॉक्यूमेंटेड रियलिटी है।

नंबर जो सच बोलते हैं

लाहौर बेस्ड सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के डेटा के मुताबिक, सिर्फ 2024 में 344 ईशनिंदा केस के डॉक्यूमेंट किए गए। यह एक ऐसा कानून है, जिसका गलत इस्तेमाल पाकिस्तान में माइनॉरिटीज को टारगेट करने के लिए होता रहा है। और अगर हम जबरन धर्म बदलने की बात करें, तो 2021 से 2024 के बीच कम से कम 421 माइनॉरिटी महिलाओं और लड़कियों को ज़बरदस्ती धर्म परिवर्तन का शिकार बनाया गया। इनमें ज़्यादातर हिंदू और क्रिश्चियन कम्युनिटी से थीं, और सबसे ज़्यादा चिंता की बात यह है कि मैजोरिटी माइनर्स थीं। ये स्टैटिस्टिक्स सिर्फ नंबर नहीं, बाल्की एक गहरा ह्यूमन राइट्स क्राइसिस दिखाते हैं।

मोरल अथॉरिटी का सवाल

यहीं पर सबसे बड़ा सवाल उठता है क्या पाकिस्तान के पास मोरल अथॉरिटी है भारत पर उंगली उठाने की? जब खुद के देश में माइनॉरिटीज़ को लीगल, सोशल और वायलेंट प्रेशर का सामना करना पड़ रहा हो, तब दूसरों को ज्ञान देना सिर्फ हिपोक्रेसी कहलाएगा। भारत ने बार-बार यह साफ किया है कि वो रूल ऑफ़ लॉ के तहत काम करता है। चाहे वो एनक्रोचमेंट हटाना हो, या किसी और एडमिनिस्ट्रेटिव एक्शन, हर फैसला कानूनी प्रोसेस के ज़रूरी होता है, ना कि धार्मिक पहचान के आधार पर।

भारत का स्टैंड बिल्कुल क्लियर

इस खराब एपिसोड से एक बात बिल्कुल क्लियर हो जाती है। भारत इंटरनेशनल फोरम पर भी और बाइलेटरल लेवल पर भी, अपने इंटरनल मैटर्स पर कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं करेगा। पाकिस्तान चाहे जितनी बार आरोप लगाए, जवाब उतनी ही क्लैरिटी और कॉन्फिडेंस के साथ मिलेगा। MEA का स्टैंड यही है कि जो देश खुद माइनॉरिटीज के लिए अनसेफ है, उससे पहले अपने घर की सफाई करनी चाहिए।

अंत में सीधी बात

अंत में बात इतनी सी है माइनॉरिटी राइट्स का मुद्दा सीरियस है, और इस पर पॉलिटिक्स या प्रोपेगैंडा नहीं, बाल्की ग्राउंड रियलिटी और डेटा के आधार पर बात होनी चाहिए। भारत ने अपना पक्ष रख दिया है, और दुनिया के सामने ये भी दिखा दिया है कि इल्ज़ामों से ज़्यादा ज़रूरी बातें होती हैं। पाकिस्तान के लिए भी बेहतर होगा कि वो बयानबाज़ी छोड़ कर अपनी माइनॉरिटी की सुरक्षा, इज्ज़त और हक़ पर ध्यान दे क्योंकि जब तक अपना रिकॉर्ड साफ़ नहीं होगा, दूसरों पर सवाल उठाना सिर्फ़ खोखला शोर ही लगेगा।

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