US Israel Iran war: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कमान अब जनरल अहमद वाहिदी (Ahmad Vahidi) को सौंप दी गई है। उन्हें देश का नया कमांडर-इन-चीफ नियुक्त किया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष तेज हो चुका है और अमेरिका भी खुलकर मैदान में नजर आ रहा है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जनरल Ahmad Vahidi अब सैन्य रणनीति से जुड़े सभी अहम फैसले लेंगे। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। तेहरान में लगातार आपात बैठकों का दौर जारी है।
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खामेनेई की मौत के बाद नेतृत्व पर सस्पेंस
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर ने पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर दिया है। हालांकि ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर विस्तृत बयान अभी सीमित ही जारी किया गया है, लेकिन अंदरूनी हलकों में नेतृत्व को लेकर हलचल तेज है।
इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अमेरिकी न्यूज चैनल से बातचीत में बड़ा बयान दिया। ट्रंप ने कहा कि उन्हें पता है कि ईरान में फैसले कौन ले रहा है, लेकिन वह अभी उसका खुलासा नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी जोड़ा, “ईरान को लीड करने के लिए कुछ अच्छे लीडर मौजूद हैं और वह ऐसे नेतृत्व को देखना पसंद करेंगे जो क्षेत्र में स्थिरता ला सके।”
ट्रंप के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नए कयास शुरू हो गए हैं। क्या अमेरिका ईरान में किसी वैकल्पिक नेतृत्व के समर्थन की तैयारी कर रहा है? या यह सिर्फ कूटनीतिक दबाव की रणनीति है? फिलहाल इसका स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
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ईरान का सख्त रुख, जंग जारी रहेगी
खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है। तेहरान से जारी बयान में कहा गया कि देश अपने नेता की मौत का बदला लेगा और सैन्य अभियान जारी रहेगा।
सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि यह लड़ाई केवल सीमाओं की नहीं, बल्कि संप्रभुता और सम्मान की है। ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि ईरान अपनी सैन्य रणनीति को और आक्रामक बना सकता है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में मिसाइल हमलों या साइबर हमलों की आशंका बढ़ सकती है।
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अमेरिका-इजराइल की रणनीति क्या?
अमेरिका और इजराइल दोनों ने अब तक अपने सैन्य कदमों को रक्षात्मक कार्रवाई बताया है। हालांकि ईरान का आरोप है कि ये हमले उसकी संप्रभुता पर सीधा हमला हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह US Israel Iran war सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक मोर्चे पर भी लड़ा जा रहा है। अमेरिका जहां ईरान के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं की बात कर रहा है, वहीं ईरान इसे बाहरी हस्तक्षेप करार दे रहा है।
वैश्विक असर और बढ़ती चिंताएं
US Israel Iran war का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिख रहा है। तेल की कीमतों में उछाल और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और वार्ता का रास्ता अपनाने की अपील की है।
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राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर न सिर्फ क्षेत्रीय स्थिरता पर, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा ढांचे पर भी पड़ेगा।
आगे का रास्ता
ईरान में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया किस दिशा में जाती है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। जनरल Ahmad Vahidi की नियुक्ति से संकेत जरूर मिला है कि सैन्य ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। दूसरी ओर, ट्रंप के बयान ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वॉशिंगटन पर्दे के पीछे कोई नई रणनीति पर काम कर रहा है।
फिलहाल हालात बेहद संवेदनशील हैं। हर बयान और हर सैन्य कदम का असर दूर तक जा सकता है। दुनिया की नजर अब तेहरान, वॉशिंगटन और तेल अवीव पर टिकी है क्योंकि आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि यह संघर्ष सीमित रहेगा या व्यापक युद्ध का रूप लेगा।
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