Johannesburg, November 23 (TTB): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को जोहान्सबर्ग में हो रहे G20 शिखर सम्मेलन के दौरान जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाक़ात की। यह बैठक कई मायनों में ऐतिहासिक रही क्योंकि ताकाइची के प्रधानमंत्री बनने के बाद यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाक़ात थी।
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प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाक़ात को उत्पादक बताया और कहा कि भारत-जापान की मजबूत साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है। मुलाक़ात के दौरान दोनों नेताओं ने नवाचार, प्रतिभा-आदान-प्रदान (टैलेंट मोबिलिटी), रक्षा सहयोग और व्यापारिक संबंधों को और आगे बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। मोदी ने अपने X (पूर्व ट्विटर) पोस्ट में लिखा, प्रधानमंत्री साने ताकाइची के साथ उत्पादक मुलाक़ात हुई। नवाचार, रक्षा, प्रतिभा-गतिशीलता और अन्य क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। हम अपने व्यापारिक संबंधों को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। एक मजबूत भारत-जापान साझेदारी एक बेहतर ग्रह के लिए महत्वपूर्ण है।
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गौरतलब है कि इससे पहले 29 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी और ताकाइची के बीच लगभग 25 मिनट तक चली टेलीफोन वार्ता हुई थी। उस बातचीत में मोदी ने उन्हें प्रधानमंत्री पद संभालने के लिए बधाई दी थी और भारत-जापान के ‘स्पेशल स्ट्रेटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप’ को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई थी। दोनों नेताओं ने आर्थिक सुरक्षा, रक्षा सहयोग तथा प्रतिभा-गतिशीलता जैसे क्षेत्रों को सहयोग के मुख्य स्तंभ बताया था। उस समय भी प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि मजबूत भारत-जापान संबंध वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए अहम हैं।
उसी बातचीत में ताकाइची ने IND-PACIFIC क्षेत्र में फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक की अवधारणा पर जोर दिया था और Quad देशों के माध्यम से भारत के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जाहिर की थी। जापान के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार ताकाइची का मानना है कि भारत-जापान की यह Freundschaft एशिया और विश्व राजनीति में एक नया स्वर्णिम अध्याय” लिख सकती है।
इसके अलावा 27 अक्टूबर को भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मलेशिया के कुआलालंपुर में ASEAN शिखर सम्मेलन के दौरान जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी से मुलाक़ात की थी। इस मुलाक़ात में दोनों नेताओं ने भारत-जापान के अगले दशक की संयुक्त रणनीतिक दृष्टि पर कार्यान्वयन तेज़ करने पर सहमति व्यक्त की थी। जयशंकर ने X पर लिखा जापान के विदेशी मंत्री मोटेगी से मिलकर प्रसन्नता हुई। द्विपक्षीय संबंधों पर व्यापक चर्चा हुई और अगले दशक की संयुक्त दृष्टि को लागू करने पर निकटता से काम करने का निश्चय किया। साथ ही वैश्विक स्थिति और इंडो-पैसिफिक दृष्टिकोण पर भी विचार साझा किए।
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भारत और जापान के संबंध हाल के वर्षों में केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि रक्षा, सामरिक नीति, वैज्ञानिक अनुसंधान और युवा प्रतिभाओं के आदान-प्रदान तक विस्तार पा चुके हैं। दोनों देशों का मानना है कि एक साथ आगे बढ़ते हुए वे एशिया में स्थिरता और विकास का आधार बन सकते हैं। इस मुलाक़ात को इस दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि G20 मंच पर दोनों नेताओं ने एक दूसरे के साथ न केवल रणनीतिक साझेदारी पर बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए तकनीकी और मानवीय सहयोग के अवसरों पर भी चर्चा की।
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