Trump Ukraine Peace Plan: यूक्रेन-रूस युद्ध की आग अभी थमी नहीं, लेकिन इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने शांति प्रस्ताव को लेकर नया दावा किया है उनका कहना है कि 28-बिंदुओं वाला अमेरिका-प्रस्तुत ‘पीस प्लान’ अब लगभग अंतिम स्वरूप में है और सिर्फ ‘कुछ बचे हुए मतभेद” ही हैं जिन पर सहमति बनना बाकी है। ट्रंप ने यह संदेश अपने सोशल प्लेटफ़ॉर्म ‘Truth Social’ पर लिखा और साथ ही घोषणा की कि दो विशेष दूत अब सीधे युद्धरत देशों के नेताओं से मुलाक़ात कर योजना पर अंतिम मुहर लगाने की कोशिश करेंगे।
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ट्रंप ने बताया कि उनके विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलेंगे, वहीं एक अन्य प्रतिनिधि अमेरिकी सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल यूक्रेनी नेतृत्व से मिलकर समझौते के विवरण पर बातचीत करेंगे। ट्रंप ने कहा कि वह पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से मुलाक़ात तभी करेंगे, जब शांति सौदा पूरी तरह पक्का हो जाए या उसके अंतिम चरण में हो।
थैंक्सगिविंग तक समझौते की समयसीमा ट्रंप ने पहले निर्धारित की थी, लेकिन बाद में प्रगति होती दिखे तो उन्होंने इसे आगे बढ़ाने की बात भी कही। इस बीच, रूस ने मंगलवार को कीव पर एक बार फिर मिसाइल और ड्रोन हमले किए ट्रंप के अनुसार पिछले महीने इस युद्ध में 25,000 सैनिक मारे गए, हालांकि इस दावे पर स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है।
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मॉस्को से रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संकेत दिया कि रूस शांति योजना को तभी स्वीकार करेगा, जब “एंकोरेज की भावना और समझदारी” बरकरार रहे। एंकोरेज का संदर्भ पुतिन, ट्रंप मुलाक़ात से जुड़ा है, लेकिन उन चर्चाओं की सामग्री सार्वजनिक नहीं हुई थी।
इस बीच, अबू धाबी में भी अमेरिकी और रूसी अधिकारियों के बीच वार्ता हुई। ड्रिस्कॉल इससे पहले जिनेवा में यूक्रेनी टीम से मिल चुके हैं और उनके प्रवक्ता जेफ़ टॉलबर्ट ने कहा कि बातचीत “सकारात्मक और आशावादी” है।
ट्रंप के आलोचक खासकर यूरोपीय देशों में दावा करते हैं कि मूल शांति योजना विटकॉफ़ और जारेड कुश्नर द्वारा तैयार की गई थी और रूस के पक्ष में झुकी हुई थी। बाद में मीडिया रिपोर्टों में आया कि योजना में कुछ बड़े बदलाव हुए, जैसे 600,000 सैनिकों की सीमा हटाना और यूक्रेन-नाटो संबंधों को भविष्य पर टालना।
सबसे विवादित मुद्दा रूस द्वारा कब्ज़ा किए गए और भविष्य में कब्ज़ा किए जाने की आकांक्षा वाले क्षेत्रों को मान्यता देना यूरोपीय देशों के लिए अस्वीकार्य रहा। ज़ेलेंस्की ने अपने यूरोपीय सहयोगियों से कहा, ‘यूक्रेन की सुरक्षा पर फैसले में यूक्रेन को शामिल किया जाना चाहिए, और यूरोप की सुरक्षा पर फैसले में यूरोप को।‘
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी “वरना समझौता टिकाऊ नहीं रहेगा।‘ इस पूरे घटनाक्रम का सार यही है कि युद्ध के मैदान पर धमाके जारी हैं, लेकिन कूटनीतिक गलियारों में एक ऐसी खामोश, लेकिन निर्णायक बातचीत भी जारी है, जो आने वाले समय में यूक्रेन-रूस युद्ध के भविष्य का मार्ग तय कर सकती है।
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