CENTCOM: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल टकराव के बीच एक नाम लगातार सुर्खियों में है, सेंटकॉम फोर्स। ईरान पर अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई के बाद जिस सैन्य कमांड का सबसे अधिक उल्लेख हो रहा है, वह है United States Central Command, जिसे संक्षेप में CENTCOM कहा जाता है।
यह वही कमांड है, जिसने हालिया संघर्ष में ईरान की कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने और क्षेत्रीय ठिकानों की रक्षा करने में अहम भूमिका निभाई। आइए समझते हैं कि सेंटकॉम क्या है, इसकी स्थापना क्यों हुई और किन देशों में इसकी सक्रिय मौजूदगी है।
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CENTCOM क्या है?
CENTCOM अमेरिकी रक्षा विभाग Pentagon के 11 यूनिफाइड कॉम्बैटेंट कमांड्स में से एक है। अमेरिका ने पूरी दुनिया को अलग-अलग सैन्य कमांड क्षेत्रों में विभाजित कर रखा है और प्रत्येक क्षेत्र की जिम्मेदारी एक विशेष कमांड को सौंपी गई है।
सेंटकॉम का मुख्यालय फ्लोरिडा के टाम्पा स्थित MacDill Air Force Base में है। वहीं इसका फॉरवर्ड हेडक्वार्टर कतर के Al Udeid Air Base में संचालित होता है। यह कमांड थल सेना, नौसेना, वायु सेना और मरीन कॉर्प्स के संयुक्त ढांचे के तहत काम करता है।
कब और क्यों हुआ गठन?
CENTCOM की स्थापना 1 जनवरी 1983 को की गई थी। इसके गठन के पीछे 1979 की दो बड़ी घटनाएं अहम थीं, ईरान में इस्लामी क्रांति और सोवियत संघ का अफगानिस्तान पर आक्रमण।
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अमेरिका को आशंका थी कि सोवियत प्रभाव खाड़ी देशों तक फैल सकता है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल आपूर्ति होती है। उस समय अमेरिका के पास इस क्षेत्र के लिए कोई समर्पित सैन्य कमांड नहीं था। संकट की स्थिति में तुरंत कार्रवाई के लिए सेंटकॉम का गठन किया गया, ताकि मध्य पूर्व और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अमेरिकी हितों की रक्षा की जा सके।
CENTCOM का कार्यक्षेत्र
CENTCOM की जिम्मेदारी में वर्तमान में 20 से अधिक देश शामिल हैं, जो मध्य पूर्व, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के हिस्सों में फैले हुए हैं। इनमें बहरीन, मिस्र, इराक, इजराइल, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और यमन जैसे देश शामिल हैं।
इनमें से कई देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे मौजूद हैं। कतर, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैनिकों की बड़ी तैनाती रहती है। फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे सामरिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा भी इसी कमांड की जिम्मेदारी है।
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मुख्य उद्देश्य और रणनीतिक महत्व
CENTCOM के प्रमुख कार्यों में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना, आतंकवादी संगठनों के खिलाफ अभियान चलाना और सहयोगी देशों को सैन्य सहायता प्रदान करना शामिल है। अल-कायदा, ISIS जैसे संगठनों के खिलाफ कार्रवाई में इसकी प्रमुख भूमिका रही है।
इसके अलावा, यह इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था में भी अहम सहयोगी माना जाता है। हालिया संघर्ष में ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को रोकने में सेंटकॉम की तकनीकी और खुफिया सहायता महत्वपूर्ण रही।
अमेरिका के लिए CENTCOM केवल एक सैन्य इकाई नहीं, बल्कि रणनीतिक कवच है। दुनिया के बड़े तेल भंडार इसी क्षेत्र में हैं। यदि आपूर्ति बाधित होती है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है। ऐसे में ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना इसकी प्राथमिकता में शामिल है।
ईरान के साथ तनाव में भूमिका
US-Iran War के बीच लंबे समय से टकराव की स्थिति बनी हुई है। ईरान समर्थित गुटों, जैसे हिजबुल्लाह और हूती, के हमलों का जवाब देने में सेंटकॉम अग्रिम मोर्चे पर रहता है।
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ईरान CENTCOM को शत्रुतापूर्ण संगठन मानता है, जबकि अमेरिका ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। यही कारण है कि क्षेत्र में हर तनाव के दौरान सेंटकॉम की भूमिका और अधिक सक्रिय हो जाती है।
वैश्विक शक्ति संतुलन में अहम कड़ी
मध्य पूर्व और मध्य एशिया में चीन और रूस भी अपना प्रभाव बढ़ा रहे हैं। ऐसे में सेंटकॉम की मौजूदगी अमेरिका के लिए शक्ति संतुलन बनाए रखने का माध्यम है। यह कमांड न केवल सैन्य अभियानों का संचालन करता है, बल्कि खुफिया नेटवर्क और कूटनीतिक समन्वय के जरिए अमेरिकी रणनीति को जमीन पर लागू करता है।
CENTCOM केवल US-Iran War की स्थिति में सक्रिय होने वाली फोर्स नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की दीर्घकालिक वैश्विक रणनीति का अहम स्तंभ है। जब तक मध्य पूर्व में तेल, राजनीति और सुरक्षा से जुड़े समीकरण बने रहेंगे, तब तक सेंटकॉम की भूमिका भी निर्णायक बनी रहेगी।
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