Venezuela political crisis: पुरानी कहावत है कि जब भी सत्ता अहंकार बन जाती है और शासन जनता से अलग हो जाता है, तब बदलाव केवल समय की बात रह जाता है। वेनेजुएला में जो कुछ हुआ, वह केवल एक देश की राजनीतिक घटना नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए एक प्रेरक संदेश है कि अन्याय चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न दिखे, आखिर में उसे जवाबदेही तय करनी पड़ती है।
वेनेजुएला के लंबे समय तक शासक रहे Nicolas Maduro का अचानक सत्ता से बाहर होना और अमेरिका में हिरासत में लिया जाना, उन करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन गया है जिन्होंने वर्षों तक भय, भूख और अस्थिरता में जीवन बिताया। यह घटना बताती है कि जब जनता की आवाज दबाई जाती है, चुनावों की विश्वसनीयता खत्म होती है और सत्ता केवल बल के सहारे चलती है, तब इतिहास हस्तक्षेप करता है। इस पूरे घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का आक्रामक और विवादास्पद निर्णय वैश्विक बहस का विषय बना। समर्थक इसे तानाशाही के खिलाफ सख्त कदम मानते हैं, जबकि आलोचक अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता पर सवाल उठा रहे हैं। लेकिन इन बहसों से परे, वेनेजुएला के आम नागरिकों के लिए यह एक ऐसे युग का अंत है जिसमें सपने टूटते चले गए थे।
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कभी लैटिन अमेरिका के सबसे समृद्ध देशों में गिने जाने वाले Venezuela ने पिछले दशक में अभूतपूर्व आर्थिक गिरावट देखी। तेल संपदा से भरपूर यह देश महंगाई, बेरोजगारी और पलायन का प्रतीक बन गया। हर पांच में से एक नागरिक देश छोड़ने को मजबूर हुआ। ऐसे में जब सत्ता परिवर्तन की खबर आई, तो दुनिया भर में बसे वेनेजुएलावासी सड़कों पर उतरे, आंखों में आंसू और दिल में उम्मीद लेकर। यह कहानी केवल राजनीति की नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वतंत्रता की भी है। तानाशाही शासन में सबसे पहले कुचली जाती है व्यक्ति की गरिमा। बोलने की आज़ादी, निष्पक्ष न्याय और सुरक्षित भविष्य ये सब धीरे-धीरे छिन जाते हैं। वेनेजुएला का उदाहरण दिखाता है कि जब जनता लंबे समय तक चुप रहती है, तब भी उसकी पीड़ा इतिहास के पन्नों में दर्ज होती रहती है, और एक दिन वही पीड़ा परिवर्तन का कारण बनती है।
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आज दुनिया के कई देशों में लोग यह सवाल पूछ रहे हैं क्या शक्ति का उपयोग सही था? क्या किसी देश को बाहर से चलाया जा सकता है? ये प्रश्न जरूरी हैं, लेकिन इनके बीच एक सच्चाई और भी अहम है, कोई भी शासन जनता की इच्छा के विरुद्ध लंबे समय तक टिक नहीं सकता। डर के सहारे खड़ी की गई इमारतें आखिरकार ढह जाती हैं। यह घटनाक्रम युवाओं के लिए विशेष रूप से प्रेरक है। यह बताता है कि लोकतंत्र केवल एक व्यवस्था नहीं, बल्कि निरंतर संघर्ष और सजगता की मांग करता है। वोट का अधिकार, सवाल पूछने की आज़ादी और जवाबदेही इन सबकी कीमत तब समझ आती है जब वे छिन जाती हैं। वेनेजुएला की पीढ़ियों ने यह कीमत चुकाई, और आज उनकी कहानी दुनिया को चेतावनी दे रही है।
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साथ ही, यह घटना यह भी सिखाती है कि बदलाव के बाद सबसे बड़ा काम होता है पुनर्निर्माण। संस्थानों को मजबूत करना, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना और समाज में भरोसा लौटाना ये आसान नहीं हैं। लेकिन आशा वही करती है जो कठिन रास्तों पर चलने का साहस रखती है। आज वेनेजुएला एक चौराहे पर खड़ा है। एक ओर अनिश्चितता है, दूसरी ओर नई शुरुआत का अवसर। यही जीवन का सत्य है हर अंधेरी रात के बाद सुबह होती है। तानाशाही का अंत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि यह विश्वास दिलाता है कि इंसान की आज़ादी सबसे बड़ी शक्ति है। दुनिया के हर उस व्यक्ति के लिए जो अन्याय से जूझ रहा है, वेनेजुएला की यह घड़ी एक संदेश है: हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, उम्मीद को जीवित रखो। क्योंकि जब उम्मीद जीवित रहती है, तब इतिहास भी करवट बदलने पर मजबूर हो जाता है।
(Reuters)
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