Laksar Court Vinay Tyagi attack: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के लक्सर में कोर्ट पेशी के दौरान गैंगस्टर विनय त्यागी पर हुआ जानलेवा हमला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि काले धन, बेनामी संपत्ति और सत्ता–अपराध के खतरनाक गठजोड़ की परतें खोलता दिख रहा है। पुलिस अभिरक्षा में पेशी के लिए ले जाते समय दो अज्ञात बाइक सवारों द्वारा की गई फायरिंग ने पूरे सिस्टम को हिला दिया है। विनय त्यागी बाल-बाल बच गया, लेकिन इस हमले ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिनके जवाब केवल अपराध तक सीमित नहीं, बल्कि के उस सच से जुड़े हैं जहाँ अवैध पैसा सीमाओं, राज्यों और रसूखदार चेहरों के पीछे छिपाया जाता है।
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जांच की शुरुआती कड़ियां इस हमले को देहरादून की एक हाई-प्रोफाइल चोरी से जोड़ती हैं। यह चोरी किसी आम नागरिक की नहीं, बल्कि गाजियाबाद के एक बड़े और प्रभावशाली ठेकेदार से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस चोरी में केवल नकदी या जेवरात ही नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये मूल्य की जमीनों के प्रॉपर्टी पेपर्स भी शामिल थे। यही कागजात इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील और विस्फोटक हिस्सा बन चुके हैं।
कहानी की शुरुआत देहरादून से होती है, जहाँ ठेकेदार ने कथित तौर पर अपनी काली कमाई को छिपाने के लिए एक बेहद ‘सुरक्षित’ रास्ता चुना। बताया जाता है कि उसे प्रवर्तन निदेशालय की संभावित कार्रवाई का डर था। इसी डर के चलते उसने सोना, चांदी, भारी मात्रा में कैश और जमीनों के अहम दस्तावेज एक कार में भरकर देहरादून में अपने करीबी दोस्त के घर रख दिए। यह दोस्त पेशे से डॉक्टर बताया जा रहा है, ताकि किसी भी जांच एजेंसी को शक न हो और अवैध संपत्ति लंबे समय तक नजरों से दूर रहे।
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यहीं से इस पूरे खेल में विनय त्यागी की एंट्री होती है। पुलिस जांच के मुताबिक, विनय त्यागी का उस डॉक्टर के घर आना-जाना था। लंबे समय तक चली इस आवाजाही के दौरान उसे उस कार में छिपे काले खजाने की भनक लग गई। अपराध की दुनिया में अनुभव रखने वाला विनय त्यागी मौके की तलाश में था और जैसे ही उसे सही समय दिखा, उसने इस दौलत पर हाथ साफ कर दिया। यह चोरी ठेकेदार के लिए किसी झटके से कम नहीं थी, क्योंकि मामला खुलने का मतलब था सीधे ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की नजर में आना।
यहीं ठेकेदार ने एक चाल चली, जो इस केस को और भी पेचीदा बनाती है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चोरी की रिपोर्ट डॉक्टर दोस्त के नाम से दर्ज करवाई गई और उसमें केवल कुछ लाख रुपये की चोरी का जिक्र किया गया। करोड़ों की बेनामी संपत्ति और जमीनों के कागजात को जानबूझकर छिपा लिया गया, ताकि जांच की आंच आगे न बढ़े। यह रणनीति कुछ हद तक सफल भी रही, लेकिन ज्यादा दिन तक नहीं।
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विनय त्यागी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने चोरी हुए माल का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा बरामद कर लिया। इसमें सोना, चांदी और कैश शामिल हैं। लेकिन जो चीज अब भी पुलिस की पहुंच से बाहर है, वह हैं करोड़ों की जमीनों के वे प्रॉपर्टी पेपर्स। जांच एजेंसियों का मानना है कि यही दस्तावेज ठेकेदार के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। अगर ये कागजात सामने आते हैं, तो न सिर्फ बेनामी संपत्ति का पूरा जाल उजागर हो सकता है, बल्कि बड़े स्तर पर मनी लॉन्ड्रिंग और टैक्स चोरी की परतें भी खुल सकती हैं।
24 दिसंबर को लक्सर कोर्ट में हुआ हमला इसी डर की ओर इशारा करता है। पुलिस इस एंगल से जांच कर रही है कि हमले का मकसद क्या था—क्या हमलावर उन कागजातों की जानकारी निकालना चाहते थे? या फिर उन्हें हमेशा के लिए खत्म करने का दबाव बनाना चाहते थे? एक संभावना यह भी है कि विनय त्यागी को इसलिए निशाना बनाया गया ताकि वह पूछताछ में पूरी सच्चाई न उगल सके। अदालत में पेशी के दौरान हमला यह भी दिखाता है कि हमलावरों को उसकी मूवमेंट और सुरक्षा व्यवस्था की सटीक जानकारी थी।
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दिलचस्प बात यह है कि विनय त्यागी का आपराधिक इतिहास भले ही लंबा रहा हो, लेकिन पिछले करीब दो दशकों में उसका नाम किसी बड़ी वारदात में सीधे तौर पर नहीं आया था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, वह लंबे समय से लो-प्रोफाइल में था। ऐसे में देहरादून की यह चोरी उसके ‘कमबैक क्राइम’ के तौर पर देखी जा रही है एक ऐसी वारदात जिसने न सिर्फ उसे फिर से सुर्खियों में ला दिया, बल्कि कई रसूखदार लोगों की नींद भी उड़ा दी।
अब पुलिस के सामने सवालों की लंबी सूची है। हमलावर कौन थे? उन्हें किसने भेजा? क्या वे पेशेवर शूटर थे या किसी स्थानीय नेटवर्क का हिस्सा? सबसे अहम सवाल यही है कि वे प्रॉपर्टी पेपर्स आखिर हैं कहां। क्या वे विनय त्यागी के पास अब भी सुरक्षित हैं, या किसी तीसरे हाथ में पहुंच चुके हैं? अगर ऐसा है, तो वह तीसरा हाथ कौन है कोई दलाल, कोई राजनीतिक कनेक्शन या कोई और बड़ा खिलाड़ी?
यह मामला उस चेहरे को भी उजागर करता है जहाँ आर्थिक अपराध केवल एक शहर या एक राज्य तक सीमित नहीं रहते। काला धन, बेनामी संपत्ति और अपराध का नेटवर्क राज्यों की सीमाएं लांघकर काम करता है। देहरादून से गाजियाबाद और हरिद्वार तक फैली यह कहानी दिखाती है कि कैसे अवैध पैसा सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाता है, और जब खतरा बढ़ता है तो गोलियों की भाषा बोली जाती है।
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां हर पहलू को खंगाल रही हैं। सुरक्षा में चूक से लेकर ठेकेदार के नेटवर्क तक, हर कड़ी को जोड़ने की कोशिश हो रही है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि विनय त्यागी पर हुआ हमला केवल बदले की कार्रवाई था या फिर करोड़ों के काले खजाने को बचाने की आखिरी कोशिश। इतना तय है कि इस केस में जो सच सामने आएगा, वह सिर्फ एक गैंगस्टर की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम का आईना होगा जहाँ पैसा, पावर और अपराध एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं।
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